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सत्यापन में फंसा पेंच नहीं मिली किसानों को राहत

Tue, 27 Oct 2020 11:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2020 11:27 PM IST
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Relief for farmers not found in verification
मऊ। बाढ़ प्रभावित किसानों को राहत धनराशि देने के लिए प्रदेश सरकार ने मऊ को दस करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित किया है। लेकिन लेखपालों द्वारा दी गई रिपोर्ट में कुछ पेंच फंसने से उसे दुबारा सत्यापन के लिए घोसी और मधुबन तहसीलों पर भेजा गया। इस दौरान किसान नेताओं ने कहा कि जांच की आड़ में किसानों का नुकसान होना तय है।
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जिलेे में बाढ़ से पीड़ित क्षेत्रों में घोसी के साथ मधुबन तहसील का हिस्सा शामिल है। बाढ़ की विभीषिका होने पर शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित किसानों का सर्वे कराया था। इस दौरान कृषि विभाग ने अलग तथा तहसील प्रशासन ने अपने हिसाब से अलग सर्वे किया था। तहसील प्रशासन ने मधुबन और घोसी तहसील के 18,600 किसानों को बाढ़ पीड़ितों की श्रेणी में रखा। लेखपाल के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सबसे अधिक नुकसान होने वाले किसान को 27 हजार रुपये की राहत धनराशि मिलनी है। ऐसे में शासन से आवंटित राहत धनराशि दस करोड़ में से महज सवा आठ करोड़ में सभी किसानों को राहत देने का कार्य पूर्ण हो रहा था।
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इस बीच धनराशि स्थानांतरित करने में कई प्रकार की दिक्कतें आने लगी। इसमें प्रमुख परेशानी कि एक ही नाम के कई व्यक्ति होना, एक व्यक्ति उनके नाम से कई गाटा संख्या का होना आदि। कुल मिलाकर सर्वे रिपोर्ट उलझी मिलने से किसानों को तय समय सीमा के अंदर राहत धनराशि का लाभ नहीं मिल पाया।
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आपदा प्रभारी एडीएम केहरि सिंह ने बताया कि एक नाम से कई किसान थे, लेकिन रिपोर्ट में उनकी वलदियत स्पष्ट नहीं थी, इसके चलते पुन: सत्यापन को भेजा गया है। बोले किसानों को राहत धनराशि उनके नुकसान हुए रकबे के हिसाब से दिया जा रहा है। विभागीय सूत्रों की मानेें तो बाढ आपदा में उन किसानों को शामिल किया गया है, जिनकी फसल 33 फीसदी से अधिक चौपट हुई, यदि इससे कम फसल चौपट हुई तो उन्हे आपदा की श्रेणी में नहीं शामिल किया गया। इस तरह से 18 सौ रुपया प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किसानों को राहत धनराशि दी जानी है।
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