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जिला अस्पताल में मरीजों का कंप्यूटर पर होगा पंजीकरण
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मऊ। कोरोना संक्रमण काल में मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही जिला अस्पताल की ओपीडी को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। जहां अलग-अलग काउंटर बनाकर मरीजों की ओपीडी पर्ची बनाई जाएगी। ओपीडी को कंप्यूटरीकृत होने से मैनुअली पर्चा बनवाने से मरीजों को मुक्ति मिलेगी। इससे ओपीडी में आने वाले सैकड़ों मरीजों को सहूलियत मिल मिलेगी। वहीं आने वाले समय में अस्पताल में पर्ची के साथ ही अन्य सुविधाएं आनलाइन करने की योजना है।
जिला अस्पताल को ई-हास्पिटल बनाने का प्रयास शुरू किया जा चुका है। इसके तहत पहले चरण में अस्पताल की ओपीडी को कम्प्यूटरीकृत और आनलाइन करने की योजना है। इसके लिए ओपीडी में तीन और इमरजेंसी में एक काउंटर बनाया जाएगा। सूत्रों की माने तो इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को बजट भी जारी किया जा चुका है। ओपीडी के कम्प्यूटरीकृत होने के बाद रोजाना इलाज के लिए आने वाले सैकड़ों मरीजों को न केवल पर्ची बनाने के दौरान होने वाली आपा धानी से राहत मिलेगी, बल्कि इससे कोरोना संक्रमण काल में समाजिक दूरी का पालन करने में सहूलियत मिलेगी, साथ ही अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों को इससे राहत मिलेगी। कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत बराबर संख्या में मरीजों की ओपीडी कार्ड बनाया जाएगा। जो कि एक सीरीज के तहत होगा। बीच में कोई दूसरा नंबर नहीं होगा। सुबह साढ़े आठ बजे से दस बजे तक बनने वाले ओपीडी कार्ड के लिए मरीजों को मौके पर रहना होगा। ताकि उनका नंबर आने पर वो अपना कार्ड बनवा सकेे। इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ब्रजकुमार ने बताया कि ओपीडी को कम्प्यूटरीकृत करने की योजना है। ओपीडी कम्प्यूटरीकृत होने से मरीज तथा अस्पताल प्रबंधन दोनों को लाभ होगा।
दूसरे स्वास्थ्य सेवाएं भी होंगी आनलाइन
मऊ। ओपीडी कंप्यूटरीकृत होने के बाद दूसरे चरण में इमरजेंसी वार्ड, स्टोर, ब्लड बैंक, पैथालॉजी को भी कम्प्यूटरीकृत करते हुए उन्हें आपस में कनेक्ट किया जाएगा।आनलाइन होने के बाद अस्पताल के कर्मचारी मरीजों से संबंधित जानकारी या रिकार्ड न होने का बहाना नहीं बना सकेंगे।
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जिला अस्पताल को ई-हास्पिटल बनाने का प्रयास शुरू किया जा चुका है। इसके तहत पहले चरण में अस्पताल की ओपीडी को कम्प्यूटरीकृत और आनलाइन करने की योजना है। इसके लिए ओपीडी में तीन और इमरजेंसी में एक काउंटर बनाया जाएगा। सूत्रों की माने तो इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को बजट भी जारी किया जा चुका है। ओपीडी के कम्प्यूटरीकृत होने के बाद रोजाना इलाज के लिए आने वाले सैकड़ों मरीजों को न केवल पर्ची बनाने के दौरान होने वाली आपा धानी से राहत मिलेगी, बल्कि इससे कोरोना संक्रमण काल में समाजिक दूरी का पालन करने में सहूलियत मिलेगी, साथ ही अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों को इससे राहत मिलेगी। कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत बराबर संख्या में मरीजों की ओपीडी कार्ड बनाया जाएगा। जो कि एक सीरीज के तहत होगा। बीच में कोई दूसरा नंबर नहीं होगा। सुबह साढ़े आठ बजे से दस बजे तक बनने वाले ओपीडी कार्ड के लिए मरीजों को मौके पर रहना होगा। ताकि उनका नंबर आने पर वो अपना कार्ड बनवा सकेे। इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ब्रजकुमार ने बताया कि ओपीडी को कम्प्यूटरीकृत करने की योजना है। ओपीडी कम्प्यूटरीकृत होने से मरीज तथा अस्पताल प्रबंधन दोनों को लाभ होगा।
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दूसरे स्वास्थ्य सेवाएं भी होंगी आनलाइन
मऊ। ओपीडी कंप्यूटरीकृत होने के बाद दूसरे चरण में इमरजेंसी वार्ड, स्टोर, ब्लड बैंक, पैथालॉजी को भी कम्प्यूटरीकृत करते हुए उन्हें आपस में कनेक्ट किया जाएगा।आनलाइन होने के बाद अस्पताल के कर्मचारी मरीजों से संबंधित जानकारी या रिकार्ड न होने का बहाना नहीं बना सकेंगे।
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