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जरूरतमंदों की मदद करने का अवसर है रमजान : मुफ्ती कमाल अहमद
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इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र महीना रमजान में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगने के साथ ही खुदा की इबादत में अधिक से अधिक समय लगाएं।
जिससे आपका जीवन सफल हो जाए।इस संबंध में घोसी नगर के मदापुर समसपुर छावनी निवासी और जामा मस्जिद तहसील के इमाम मुफ्ती कमाल अहमद ने कहा कि रमजान जरुरतमंदों की मदद का अवसर है।
बताया कि इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमज़ान अल्लाह की रहमतों से भरपूर होता है और इसका हर अशरा अपने अलग संदेश के साथ आता है। पहले अशरे को रहमत का अशरा कहा जाता है।
जिसमें रोज़ेदारों पर अल्लाह की विशेष कृपा होती है। दूसरे अशरे में हमें अपने गुनाहों की माफी के लिए होता है।
अब तीसरे असरे में जहन्नुम की आग यानी नर्क में जाने से बचने की दुआ मांगने वाला होता है।ऐसे में रोजदारों के साथ ही अक़ीदातमंदो को अधिक से अधिक अल्लाह की इबादत करने में अपना समय लगाना चाहिए।उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे इस पाक महीने में ज्यादा से ज्यादा कुरआन पाक की तिलावत, नमाज, दुआ और सदक़ा-खैरात करें ताकि अल्लाह से मग़फिरत हासिल हो सके।
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इसके अलावा उन्होंने समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि रमज़ान न केवल आत्मसंयम और इबादत का महीना है, बल्कि यह जरूरतमंदों की मदद करने और इंसानियत को बढ़ावा देने का भी अवसर है।
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जिससे आपका जीवन सफल हो जाए।इस संबंध में घोसी नगर के मदापुर समसपुर छावनी निवासी और जामा मस्जिद तहसील के इमाम मुफ्ती कमाल अहमद ने कहा कि रमजान जरुरतमंदों की मदद का अवसर है।
बताया कि इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमज़ान अल्लाह की रहमतों से भरपूर होता है और इसका हर अशरा अपने अलग संदेश के साथ आता है। पहले अशरे को रहमत का अशरा कहा जाता है।
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जिसमें रोज़ेदारों पर अल्लाह की विशेष कृपा होती है। दूसरे अशरे में हमें अपने गुनाहों की माफी के लिए होता है।
अब तीसरे असरे में जहन्नुम की आग यानी नर्क में जाने से बचने की दुआ मांगने वाला होता है।ऐसे में रोजदारों के साथ ही अक़ीदातमंदो को अधिक से अधिक अल्लाह की इबादत करने में अपना समय लगाना चाहिए।उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे इस पाक महीने में ज्यादा से ज्यादा कुरआन पाक की तिलावत, नमाज, दुआ और सदक़ा-खैरात करें ताकि अल्लाह से मग़फिरत हासिल हो सके।
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इसके अलावा उन्होंने समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि रमज़ान न केवल आत्मसंयम और इबादत का महीना है, बल्कि यह जरूरतमंदों की मदद करने और इंसानियत को बढ़ावा देने का भी अवसर है।