{"_id":"655b85812d84ed01a50db8d6","slug":"proved-guilty-in-assault-case-released-mau-news-c-295-1-svns1028-5245-2023-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: मारपीट के मामले में दोष साबित, किया गया रिहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: मारपीट के मामले में दोष साबित, किया गया रिहा
विज्ञापन
मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने मारपीट और धमकी देने के मामले में सुनवाई के बाद एक को दोषी पाते हुए एक वर्ष की सजा के साथ ही एक हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। एडीजे ने उसे परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए छह माह तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार, सुखा पट्टी गांव निवासी दुर्गेश कुमार सिंह यादव पुत्र रामकेर सिंह यादव की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें शहर कोतवाली क्षेत्र के परदहां निवासी सोनू सिंह पुत्र त्रिभुवन सिंह को आरोपी बनाया। वादी का कहना था कि 14 अप्रैल 2011 को वह बढुआगोदाम से घर आ रहा था कि रास्ते में सोनू सिंह ने उसे मारपीट कर गंभीर चोटें पहुंचाई। गालीगलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए प्रभारी डीजीसी फौजदारी अजय कुमार सिंह ने कुल 5 पांच गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यो का अवलोकन करने के बाद आरोपी सोनू सिंह को मारपीट और धमकी देने के मामले में दोषी पाया। वहीं, गंभीर चोट पहुंचाने और गाली देने के मामले में दोषमुक्त कर दिया।
विज्ञापन
दोषी पाए जाने के बाद उसे मारपीट के मामले में एक वर्ष की सजा के साथ ही एक हजार रुपया अर्थदंड लगाया। वहीं, धमकी देने के मामले में छह माह की सजा का निर्णय सुनाया। एडीजे ने दोषी सोनू सिंह को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए छह माह तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया।
विज्ञापन
अभियोजन के अनुसार, सुखा पट्टी गांव निवासी दुर्गेश कुमार सिंह यादव पुत्र रामकेर सिंह यादव की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें शहर कोतवाली क्षेत्र के परदहां निवासी सोनू सिंह पुत्र त्रिभुवन सिंह को आरोपी बनाया। वादी का कहना था कि 14 अप्रैल 2011 को वह बढुआगोदाम से घर आ रहा था कि रास्ते में सोनू सिंह ने उसे मारपीट कर गंभीर चोटें पहुंचाई। गालीगलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
विज्ञापन
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए प्रभारी डीजीसी फौजदारी अजय कुमार सिंह ने कुल 5 पांच गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यो का अवलोकन करने के बाद आरोपी सोनू सिंह को मारपीट और धमकी देने के मामले में दोषी पाया। वहीं, गंभीर चोट पहुंचाने और गाली देने के मामले में दोषमुक्त कर दिया।
विज्ञापन
दोषी पाए जाने के बाद उसे मारपीट के मामले में एक वर्ष की सजा के साथ ही एक हजार रुपया अर्थदंड लगाया। वहीं, धमकी देने के मामले में छह माह की सजा का निर्णय सुनाया। एडीजे ने दोषी सोनू सिंह को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए छह माह तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया।