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विरोध के बाद भी रेलवे ने बंद कराई क्रासिंग

Mon, 22 Aug 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ Updated Mon, 22 Aug 2016 12:09 AM IST
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जेसीबी से खोदा जा रहा गड्ढा
इंदारा दोहरीघाट रेल मार्ग पर घोसी कोतवाली क्षेत्र के हरहुआ गांव के पास फाटक विहीन रेलवे क्रासिंग के रास्ते को रेलवे ने बंद करवा दिया। रेलवे ने जेसीबी लगवाकर इसे खुदवा दिया। जिससे की आवागमन ठप हो गया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यहां पर विभाग की ओर से कोई रास्ता नहीं था, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि यह रास्ता अंग्रेजों के शासन काल से ही है। रास्ता बंद किए जाने का ग्रामीणों ने विरोध किया।
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 रविवार को सुबह दस बजे भारी संख्या में आरपीएफ के जवानों के साथ रेलवे के अवर अभियंता और अन्य अधिकारी हरहुआ गांव के पास फाटक विहीन क्रासिंग पर पहुंचे। साथ में प्रशासनिक अमला भी था। अधिकारियों ने क्रासिंग के दोनों तरफ जेसीबी मशीन से रेलवे ट्रैके पार करने के लिए बने रास्ते को खुदवा कर आवागमन बंद करवा दिया।
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इसकी भनक लगते ही वहां आसपास के कई गांवों के ग्रामीण पहुंच गए। ग्रामीणों ने रेलवे द्वारा रास्ते को बंद करने की कार्रवाई का पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया।  एसडीएम और सीओ का कहना था कि वे लोग उच्चाधिकारियों के निर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं। उधर विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि उनकी सैकड़ों एकड़ खेती रेलवे ट्रैक के उस पार है।
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यह क्रासिंग अंग्रेजों के समय से ही रास्ते के रूप में आसपास के कई दर्जन गांवों केेे किसानों और अन्य सभी गांव वासियों के द्वारा उपयोग में लाई जा रही है। यह रास्ता बंद हो जाने से 100 मीटर की दूरी को तय करने के लिए पांच किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा। लगभग तीन घंटों के भारी प्रतिरोध के बावजूद  ग्रामीणों को निराश होना पड़ा।


इस दौरान महिलाओं व पुलिस में काफी नोकझोंक भी हुई। इस संबंध में रेलवे विभाग के क्षेत्रीय जेई अमित का कहना है कि रेलवे के मैप में यह रास्ता नहीं है। ग्रामीणों को पहले भी कई बार सचेत किया जा चुका है। विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि कैलवर, फुलवरिया, बनगाँव, बनियापर, नोनारी, बहरामपुर आदि गांवों को राष्ट्रीय राज मार्ग से जोड़ने वाला यही एक मात्र संपर्क मार्ग था। इस दौरान फूलमती, विद्यावती, जयवंती  देवी, लालमती, रामकेश, बिहारी आदि सैकड़ों की संख्या में लोगों ने विरोध जताया।



 इस संबंध में एसडीएम घोसी सुनील दत्त सिंह,  सीओ  घोसी रविंद्र सिंह का कहना था कि पिछली बार ही ग्रामीणों को बता दिया गया था कि रेलवे के उच्चाधिकारियों से संपर्क कर कोई आदेश ले लें, बावजूद अबतक कोई आदेश नहीं लाया। अब हम कुछ नहीं कर सकते।

 
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