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प्रधान अपने घरों पर रखते हैं कुटुंब रजिस्टर
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जनपद के अधिकांश गांवों के प्रधान कुटुंब रजिस्टर अपने घर पर रखवा लिए हैं। ये रजिस्टर सेक्रेटरियों के पास होने चाहिए। जरूरतमंदों को परिवार रजिस्टर की नकल सेक्रेटरी को जारी करने का अधिकार है। लेकिन रजिस्टर उनके पास न होने से सेक्रेटरी जरूरतमंदों को कुटुंब रजिस्टर की नकल जारी नहीं कर पाते हैं। इससे लोगों को परेशानी होती है । खासकर ऐसे लोगों को जो ग्राम प्रधान के विरोधी खेमे के होते हैं।
गांव के लोगों का आरोप है कि मनमानी की मंशा से ग्राम प्रधान कुटुंब रजिस्टर अपने कब्जे में रखते हैं। जिससे वे विरोधियों के नाम निकलवा देते हैं। चूंकि इस समय ग्राम पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मतदाता पुनरीक्षण का कार्य होने वाला है। इसलिए भी प्रधानों के विरोधी खेमे के लोग चिंतित हो रहे हैं। इसके अलावा वरासत, खारिज दाखिल से लेकर अन्य कार्यों में लोगों को कुटुंब रजिस्टर की नकल की जरूरत पड़ती है। लोग सेक्रेटरी के पास जाते हैं तो सेक्रेटरी का जवाब होता है कि उनके पास तो रजिस्टर नहीं है। रजिस्टर तो प्रधान जी के पास है, जब हम वहां जाएंगे तो आप आइएगा। प्रधान और सेक्रेटरी के एक साथ घर पर न मिलने से लोगों को समय से परिवार रजिस्टर की नकल नहीं मिल पाती और वे परेशानी का सामना करने को विवश होते हैं।
इस संबंध में बड़रावं ब्लॉक के हर हुआ गांव के धर्मदेव, राम हरक, दोहरीघाट ब्लॉक के लामी गांव निवासी राम नाथ चौहान और कतवारू यादव, बहादुरपुर गांव निवासी राजेंद्र यादव और राम प्रसाद सिंह तथा शाहपुर गांव निवासी अंबिका प्रजापति और मनोज मौर्य आदि ने आरोप लगाया कि गांव के प्रधान कुटुंब रजिस्टर अपने घर पर रखते हैं ,इसीलिए जरूरत पड़ने पर जरूरतमंदों कुटुंब रजिस्टर की नकल नहीं मिल पाती।
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नकल के लिए वसूलते हैं रुपये
ग्राम प्रधान के घरों पर कुुुटुंब रजिस्टर रखे होने पर उसकी नकल के लिए सेक्रेटरी चूंकि हमेशा गांव पर उपलब्ध नहीं होते हैं, इसलिए उसे जारी करने के लिए एक निजी सहायक को इसकी जिम्मेदारी दी गई होती है। जरूरतमंदों को यही सहायक सेक्रेटरियों के फर्जी हस्ताक्षर कर नकल देने का आरोप है। इसके बदले में सौ रुपये से लेकर पांच पांच सौ रुपये वसूलने के आरोप हैं।
कुटुंब रजिस्टर नहीं हुआ ऑनलाइन
मऊ। सरकार से जुड़ी सारी योजनाएं और कार्य ऑनलाइन हो चुके हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कुटुंब रजिस्टर आज तक ऑनलाइन नहीं किया जा सका है। इसके चलते कुटुंब रजिस्टर में हेराफेरी करने की शिकायतें भी आती रहती हैं। कई साल पहले से कुटुंब रजिस्टर को ऑनलाइन करने की कवायद की घोषणा की गई थी लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हो सका है।
कुटुंब रजिस्टर ग्राम पंचायत की संपत्ति है, इसे नियमानुसार ग्राम सचिवालय में रखा जाना चाहिए। ग्राम प्रधानों के घर पर परिवार रजिस्टर रखा जाना उचित नहीं है ।जहां ग्राम सचिवालय नहीं बने हैं ,वहां इसके रखरखाव और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के सचिव यानी सेक्रेटरी को है न कि अध्यक्ष यानी ग्राम प्रधान को। - विवेकानंद यादव, अध्यक्ष ग्राम प्रधान संगठन मऊ।
ग्राम प्रधान के पास परिवार रजिस्टर का रखा जाना उचित नहीं है। ग्राम प्रधानों को निर्देशित किया जाएगा कि परिवार रजिस्टर अपने पास न रखें उन्हें सेक्रेटरियों को सौंप दें।
- संजय मिश्र, प्रभारी डीपीआरओ, मऊ
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गांव के लोगों का आरोप है कि मनमानी की मंशा से ग्राम प्रधान कुटुंब रजिस्टर अपने कब्जे में रखते हैं। जिससे वे विरोधियों के नाम निकलवा देते हैं। चूंकि इस समय ग्राम पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मतदाता पुनरीक्षण का कार्य होने वाला है। इसलिए भी प्रधानों के विरोधी खेमे के लोग चिंतित हो रहे हैं। इसके अलावा वरासत, खारिज दाखिल से लेकर अन्य कार्यों में लोगों को कुटुंब रजिस्टर की नकल की जरूरत पड़ती है। लोग सेक्रेटरी के पास जाते हैं तो सेक्रेटरी का जवाब होता है कि उनके पास तो रजिस्टर नहीं है। रजिस्टर तो प्रधान जी के पास है, जब हम वहां जाएंगे तो आप आइएगा। प्रधान और सेक्रेटरी के एक साथ घर पर न मिलने से लोगों को समय से परिवार रजिस्टर की नकल नहीं मिल पाती और वे परेशानी का सामना करने को विवश होते हैं।
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इस संबंध में बड़रावं ब्लॉक के हर हुआ गांव के धर्मदेव, राम हरक, दोहरीघाट ब्लॉक के लामी गांव निवासी राम नाथ चौहान और कतवारू यादव, बहादुरपुर गांव निवासी राजेंद्र यादव और राम प्रसाद सिंह तथा शाहपुर गांव निवासी अंबिका प्रजापति और मनोज मौर्य आदि ने आरोप लगाया कि गांव के प्रधान कुटुंब रजिस्टर अपने घर पर रखते हैं ,इसीलिए जरूरत पड़ने पर जरूरतमंदों कुटुंब रजिस्टर की नकल नहीं मिल पाती।
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नकल के लिए वसूलते हैं रुपये
ग्राम प्रधान के घरों पर कुुुटुंब रजिस्टर रखे होने पर उसकी नकल के लिए सेक्रेटरी चूंकि हमेशा गांव पर उपलब्ध नहीं होते हैं, इसलिए उसे जारी करने के लिए एक निजी सहायक को इसकी जिम्मेदारी दी गई होती है। जरूरतमंदों को यही सहायक सेक्रेटरियों के फर्जी हस्ताक्षर कर नकल देने का आरोप है। इसके बदले में सौ रुपये से लेकर पांच पांच सौ रुपये वसूलने के आरोप हैं।
कुटुंब रजिस्टर नहीं हुआ ऑनलाइन
मऊ। सरकार से जुड़ी सारी योजनाएं और कार्य ऑनलाइन हो चुके हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कुटुंब रजिस्टर आज तक ऑनलाइन नहीं किया जा सका है। इसके चलते कुटुंब रजिस्टर में हेराफेरी करने की शिकायतें भी आती रहती हैं। कई साल पहले से कुटुंब रजिस्टर को ऑनलाइन करने की कवायद की घोषणा की गई थी लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हो सका है।
कुटुंब रजिस्टर ग्राम पंचायत की संपत्ति है, इसे नियमानुसार ग्राम सचिवालय में रखा जाना चाहिए। ग्राम प्रधानों के घर पर परिवार रजिस्टर रखा जाना उचित नहीं है ।जहां ग्राम सचिवालय नहीं बने हैं ,वहां इसके रखरखाव और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के सचिव यानी सेक्रेटरी को है न कि अध्यक्ष यानी ग्राम प्रधान को। - विवेकानंद यादव, अध्यक्ष ग्राम प्रधान संगठन मऊ।
ग्राम प्रधान के पास परिवार रजिस्टर का रखा जाना उचित नहीं है। ग्राम प्रधानों को निर्देशित किया जाएगा कि परिवार रजिस्टर अपने पास न रखें उन्हें सेक्रेटरियों को सौंप दें।
- संजय मिश्र, प्रभारी डीपीआरओ, मऊ