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प्रचार करने आए प्रत्याशियों का लोग गुड़-भेली खिलाकर करते थे स्वागत
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मऊ। पहले के चुनाव में अब के चुनाव में काफी अंतर हो गया है। पहले लोग चुनाव से पहले इकट्ठा होकर बड़े बुजुर्गों से बातचीत करने के बाद ही किसी के पक्ष में वोट करते थे। लेकिन आज के समय में ऐसा होता नहीं दिख रहा है, लोग प्रत्याशी नहीं पार्टी विशेष को लेकर अपनी राय बनाते हैं और मतदान करते हैं। ज्यादातर जाति धर्म के आधार पर वोटिंग होती है। पहले के समय में प्रत्याशी पैदल ही गांव-गांव, घर-घर जाकर प्रचार करते थे।
प्रचार के दौरान ग्रामीण उनका सम्मान करते थे और घर पहुंचने पर भेली और गुड़ खिलाकर पानी भी पिलाते थे। वहीं दूसरी तरफ पूरे गांव के लोग एक जगह इकट्ठा होते थे। हर किसी के प्रश्नों और समस्या के निदान के संबंध में प्रत्याशी आश्वासन देते थे और चुनाव जीतने के बाद उसे पूरा भी करते थे। ढिलई फिरोजपुर निवासी डॉ. बसर उस्मानी बताते हैं कि अब चुनाव में पहले जैसा माहौल नहीं दिखाई देता है। पहले विरले प्रत्याशी होते थे जिनके पास जीप या गाड़ी होती थी, प्रत्याशी इक्का, तांगा, साइकिल से चलकर गांव-गांव और नुक्कड़ सभाओं में पहुंचते थे। आज प्रलोभन देने के साथ और झूठ भी बोला जा रहा है।
मधुबन के खीरीकोठा निवासी दीनानाथ पांडेय बताते हैं कि पहले लोग निस्वार्थ भाव से चुनाव लड़ते थे और लोगों की सेवा करते थे। प्राथमिकताओं की कार्य योजना बना कर विकास कार्य करते थे। पहले के समय में गांव के बड़े, बुजुर्ग एक जगह इकट्ठा होते थे और उनका फैसला हर कोई मानता था। लेकिन आज लोग अपनी मर्जी से मतदान करते हैं।
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प्रचार के दौरान ग्रामीण उनका सम्मान करते थे और घर पहुंचने पर भेली और गुड़ खिलाकर पानी भी पिलाते थे। वहीं दूसरी तरफ पूरे गांव के लोग एक जगह इकट्ठा होते थे। हर किसी के प्रश्नों और समस्या के निदान के संबंध में प्रत्याशी आश्वासन देते थे और चुनाव जीतने के बाद उसे पूरा भी करते थे। ढिलई फिरोजपुर निवासी डॉ. बसर उस्मानी बताते हैं कि अब चुनाव में पहले जैसा माहौल नहीं दिखाई देता है। पहले विरले प्रत्याशी होते थे जिनके पास जीप या गाड़ी होती थी, प्रत्याशी इक्का, तांगा, साइकिल से चलकर गांव-गांव और नुक्कड़ सभाओं में पहुंचते थे। आज प्रलोभन देने के साथ और झूठ भी बोला जा रहा है।
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मधुबन के खीरीकोठा निवासी दीनानाथ पांडेय बताते हैं कि पहले लोग निस्वार्थ भाव से चुनाव लड़ते थे और लोगों की सेवा करते थे। प्राथमिकताओं की कार्य योजना बना कर विकास कार्य करते थे। पहले के समय में गांव के बड़े, बुजुर्ग एक जगह इकट्ठा होते थे और उनका फैसला हर कोई मानता था। लेकिन आज लोग अपनी मर्जी से मतदान करते हैं।
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