{"_id":"64b048316468dc669202c447","slug":"pandavas-used-to-graze-cows-under-this-banyan-tree-mau-news-c-295-1-mau1001-7-2023-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: इस वटवृक्ष के नीचे पांडव गाय चराते थे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: इस वटवृक्ष के नीचे पांडव गाय चराते थे
विज्ञापन
रानीपुर। रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के कसारी गांव में तमसा नदी के तट पर महाभारतकालीन वटवृक्ष है। किंवदंती है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां पर समय व्यतीत किया था। राजा विराट के महल विराटपुरी में पांडवों ने शरण ली थी, जो वर्तमान में सदर तहसील के वैराठपुर के नाम से जाना जाता है। अज्ञातवास के दौरान पांडव, गायों को लेकर चराते वक्त इसी वटवृक्ष के नीचे समय व्यतीत किया करते था। वटवृक्ष के पास तमसा नदी पर जो घाट है, उसे गायघाट के नाम से जाना जाता है। वर्तमान समय में यह पौराणिक महाभारतकालीन वटवृक्ष स्थल उपेक्षित है।
बाढ़ के कारण वृक्ष के आसपास की जमीन कटती चली जा रही है। इससे वटवृक्ष की जड़ें कमजोर होती जा रही हैं। वटवृक्ष के नीचे मिट्टी डलवाकर, चबूरा बनवा दिया जाए तो यह स्थान सुरक्षित हो सकता है। वट वृक्ष के बगल में करीयवा बाबा धाम है। यहां पर लोगों की बड़ी आस्था है। दूर दूर से लोग बाबा के धाम पर श्रद्धा के अनुसार आते हैं।
इस संबंध में क्षेत्र के मदनलाल श्रीवास्तव, मुकुंद राय, अमर गुप्ता, विनोध श्रीवास्तव आदि क्षेत्रीय लोगों ने कहा कि इस पौराणिक स्थल का सुंदरीकरणकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग शासन प्रशासन से की गई है। अब तक प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
इनसेट ।सबसे आश्चर्य की बात है की तमसा नदी की धारा इस विशाल पौराणिक वटवृक्ष के ठीक सामने पश्चिम दिशा से आई है और वटवृक्ष का स्पर्श करने के पश्चात तमसा नदी की धारा के बजाय पूरब जाने के सीधे उतर दिशा की ओर जाने के बाद तब पूरब दिशा को गई है।
विज्ञापन
बाढ़ के कारण वृक्ष के आसपास की जमीन कटती चली जा रही है। इससे वटवृक्ष की जड़ें कमजोर होती जा रही हैं। वटवृक्ष के नीचे मिट्टी डलवाकर, चबूरा बनवा दिया जाए तो यह स्थान सुरक्षित हो सकता है। वट वृक्ष के बगल में करीयवा बाबा धाम है। यहां पर लोगों की बड़ी आस्था है। दूर दूर से लोग बाबा के धाम पर श्रद्धा के अनुसार आते हैं।
विज्ञापन
इस संबंध में क्षेत्र के मदनलाल श्रीवास्तव, मुकुंद राय, अमर गुप्ता, विनोध श्रीवास्तव आदि क्षेत्रीय लोगों ने कहा कि इस पौराणिक स्थल का सुंदरीकरणकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग शासन प्रशासन से की गई है। अब तक प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
इनसेट ।सबसे आश्चर्य की बात है की तमसा नदी की धारा इस विशाल पौराणिक वटवृक्ष के ठीक सामने पश्चिम दिशा से आई है और वटवृक्ष का स्पर्श करने के पश्चात तमसा नदी की धारा के बजाय पूरब जाने के सीधे उतर दिशा की ओर जाने के बाद तब पूरब दिशा को गई है।