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पंप कैनाल बंद, दो जिलों की खेती प्रभावित
mau
Updated Tue, 07 Jun 2016 12:20 AM IST
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दोहरीघाट पंप कैनाल की बदहाल और जर्जर सूखी पड़ी नहर। अमर उजाला
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दोहरीघाट पंप कैनाल नहर के मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यह किसानों की अपरेक्षाओं पर खरा नहीं उतरी रही। 1954 में स्थापित पंप कैनाल मऊ के साथ बलिया जिले के किसानों के लिए संजीवनी साबित हुई। लंबे समय के अंतराल के बाद जर्जर हो चुके कैनाल की मरम्मत कराने लिए विभाग ने उसे 21 जून तक बंद कर दिया है। नतीजतन दोनों जिलों में हजारों हेक्टेयर भूमि पर कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। शिकायत के बाद भी विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।
दोहरीघाट पंप कैनाल प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत सन 1955 में बनकर तैयार हुई। इसकी लंबाई मऊ और बलिया मिलाकर 350 किमी है। रख रखाव सही ढंग से न हो पाने से नहर की स्थिति दिन ब दिन दयनीय हो रही है। नहर से कुल 45 माइनरें निकलती हैं। जिनमें मऊ में 31 और 14 माइनरें बलिया में हैं। नहर मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहर तथा माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। हालत यह है कि खेती किसानी भगवान भरोसे हो रही है।
आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि धान की नर्सरी के पीक आवर में नहर को मरम्मत कार्य के नाम पर 21 जून तक बंद कर दी गई है। पीक आवर में नहर बंद रहने से अधिकांश किसान धान की नर्सरी की तैयारी नहीं कर पाए हैं। वहीं जिन किसानों ने धान की नर्सरी डाली भी है तो उनको बचाने की चिंता सताने लगी है। जायद की फसल सिंचाई के अभाव में अंतिम सांस गिन रही है।
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रौजा भगवानपुर के दिनेश राय का कहना है कि नहर और पंप मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहर तथा माइनरों के टेल तक पानी नहीं पहुंच पा सका है। राय बुढावर के चंद्रभूषण ने बताया कि मऊ तथा बलिया जिलों के कृषि योग्य भूमि की सिंचाई करने वाली दोहरीघाटपंप कैैनाल नहर जिले के ही कृषि योग्य भूमि की सिंचाई करने में अक्षम साबित हो रही है। धर्मपुर के रामसमुझ ने बताया कि नहर में पानी न आने से धान के नर्सरी के खेत की तैयारी नहीं हो पाई है। ठाकुर गांव के जयप्रकाश राय कहते हैं कि प्रतिवर्ष नहर की मरम्मत कराई जाती है, लेकिन विभाग अपनी कमी को छिपाने के लिए नहर का पूरी क्षमता से ही नहीं चलाता है।
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दोहरीघाट पंप कैनाल प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत सन 1955 में बनकर तैयार हुई। इसकी लंबाई मऊ और बलिया मिलाकर 350 किमी है। रख रखाव सही ढंग से न हो पाने से नहर की स्थिति दिन ब दिन दयनीय हो रही है। नहर से कुल 45 माइनरें निकलती हैं। जिनमें मऊ में 31 और 14 माइनरें बलिया में हैं। नहर मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहर तथा माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। हालत यह है कि खेती किसानी भगवान भरोसे हो रही है।
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आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि धान की नर्सरी के पीक आवर में नहर को मरम्मत कार्य के नाम पर 21 जून तक बंद कर दी गई है। पीक आवर में नहर बंद रहने से अधिकांश किसान धान की नर्सरी की तैयारी नहीं कर पाए हैं। वहीं जिन किसानों ने धान की नर्सरी डाली भी है तो उनको बचाने की चिंता सताने लगी है। जायद की फसल सिंचाई के अभाव में अंतिम सांस गिन रही है।
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रौजा भगवानपुर के दिनेश राय का कहना है कि नहर और पंप मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहर तथा माइनरों के टेल तक पानी नहीं पहुंच पा सका है। राय बुढावर के चंद्रभूषण ने बताया कि मऊ तथा बलिया जिलों के कृषि योग्य भूमि की सिंचाई करने वाली दोहरीघाटपंप कैैनाल नहर जिले के ही कृषि योग्य भूमि की सिंचाई करने में अक्षम साबित हो रही है। धर्मपुर के रामसमुझ ने बताया कि नहर में पानी न आने से धान के नर्सरी के खेत की तैयारी नहीं हो पाई है। ठाकुर गांव के जयप्रकाश राय कहते हैं कि प्रतिवर्ष नहर की मरम्मत कराई जाती है, लेकिन विभाग अपनी कमी को छिपाने के लिए नहर का पूरी क्षमता से ही नहीं चलाता है।