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सचिवों सहित 65 उर्वरक विक्रेताओं को नोटिस
Thu, 21 Feb 2019 11:31 PM IST
पवन सिंह
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Published by: पवन सिंह
Updated Thu, 21 Feb 2019 11:31 PM IST
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खाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले के साधन सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक की दुकानों से उर्वरक बिक्री किए जाने के मामले में व्यापक अनियमितता बरतने का मामला उजागर हुआ है। पीओएस मशीन के माध्यम से एकल ट्रांजेक्शन में एक ही किसान को 100 से अधिक उर्वरक की बिक्री की गई है। जबकि किसान की जोतबही में अंकित कृषि भूमि के आधार पर ही उर्वरक की बिक्री की जानी है। स्टेट कोआर्डिनेटर डीबीटी लखनऊ के पत्र पर जिला कृषि अधिकारी ने सहकारिता के 43 सचिवों तथा 22 निजी उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही एफआईआर दर्ज कराया जाएगा।
जिले में 92 साधन सहकारी समितियां, 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ तथा 250 से अधिक निजी उर्वरक विक्रेताओं को लाईसेंस जारी किया गया है। उर्वरक किल्लत तथा उर्वरक वितरण में अनियमितता रोकने के लिए वर्ष पीओएस मशीन सेवा संचालित की गई है। किसानों के आधार कार्ड से लिंक किया गया है। इसके बाद भी साधन सहकारी समितियों के सचिवों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा उर्वरक वितरण में नियम को ताक पर रखकर उर्वरक की बिक्री की जा रही है। स्टेट कोआर्डिनेटर डीबीटी लखनऊ ने पीओएस मशीन के माध्यम से बिक्री की गई गड़बड़ी को पकड़ा है। स्टेट कोआर्डिनेटर डीबीटी लखनऊ के पत्र के मुताबिक, एक अक्तूबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 के मध्य पीओएस मशीन के माध्यम से एकल ट्रांजेक्शन में एक ही किसान को 100 से अधिक उर्वरक की बिक्री की गई है। कई बार पुनरावृत्ति भी कर दी गई है। जबकि किसान की जोतबही में अंकित कृषि भूमि के आधार पर ही उर्वरक की बिक्री की जानी है।
नवंबर तथा दिसंबर माह में खाद की किल्लत के चलते उर्वरक के लिए किसानों को समितियों का चक्कर लगाना पड़ रहा था। शासन के पत्र को संज्ञान में लेते हुए जिला कृषि अधिकारी ने सहकारिता के 43 सचिवों तथा 22 निजी उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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जिले में 92 साधन सहकारी समितियां, 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ तथा 250 से अधिक निजी उर्वरक विक्रेताओं को लाईसेंस जारी किया गया है। उर्वरक किल्लत तथा उर्वरक वितरण में अनियमितता रोकने के लिए वर्ष पीओएस मशीन सेवा संचालित की गई है। किसानों के आधार कार्ड से लिंक किया गया है। इसके बाद भी साधन सहकारी समितियों के सचिवों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा उर्वरक वितरण में नियम को ताक पर रखकर उर्वरक की बिक्री की जा रही है। स्टेट कोआर्डिनेटर डीबीटी लखनऊ ने पीओएस मशीन के माध्यम से बिक्री की गई गड़बड़ी को पकड़ा है। स्टेट कोआर्डिनेटर डीबीटी लखनऊ के पत्र के मुताबिक, एक अक्तूबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 के मध्य पीओएस मशीन के माध्यम से एकल ट्रांजेक्शन में एक ही किसान को 100 से अधिक उर्वरक की बिक्री की गई है। कई बार पुनरावृत्ति भी कर दी गई है। जबकि किसान की जोतबही में अंकित कृषि भूमि के आधार पर ही उर्वरक की बिक्री की जानी है।
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नवंबर तथा दिसंबर माह में खाद की किल्लत के चलते उर्वरक के लिए किसानों को समितियों का चक्कर लगाना पड़ रहा था। शासन के पत्र को संज्ञान में लेते हुए जिला कृषि अधिकारी ने सहकारिता के 43 सचिवों तथा 22 निजी उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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