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नोटबंदी से कारोबार ठप औधे मुंह गिरा बाजार
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:13 PM IST
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नगर क्षेत्र मुगलपुरा स्थित बैंक आफ बड़ौदा पर लगी नोट बदलने के लिए लगी लाइन।
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आठ नवंबर से एक हजार और 500 रुपये के नोटों के बंद का असर अब छोटे-बड़े बाजारों से लेकर औद्योगिक इकाइयों पर भी पड़ने लगा है। उत्पादन इस कदर प्रभावित हो रहा है कि अगर हालत यही रही तो वह पूरी तरह से बंद हो जाएगा। एक तरफ जहां आर्डर नोट नहीं हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ नए आने भी बंद हैं। इसके चलते उद्यमी भी इस नोटबंदी के प्रभाव में बुरी तरह से प्रभावित हैं। इनके यहां काम करने के लिए लेबर से लेकर कच्चे माल एवं छोटे-मोटे मार्केट से बिना पैसों के सामान मिलना मुश्किल हो गया है। मऊ की प्रसिद्ध एवं मुख्य साड़ी कारोबार तो अभी से ठप हो गया है।
जिले में छोटी-बड़ी 150 औद्योगिक इकाइयां हैं। इन इकाइयों के संचालन के लिए जहां लेबर से लेकर उद्यमियों का कार्य प्रभावित हो गया है वहीं बाहर से कच्चे माल मिलना एवं यहां से बने माल को बाहर भेजना भी मुश्किल हो गया है। एक सप्ताह तक तो नोटबंदी का असर ज्यादा कारोबार पर नहीं पड़ा लेकिन अब हालत बिगड़ रहे हैं।
प्रतिदिन काम करने वाले मजदूर फुटकर पैसे मांग रहे हैं तो वहीं जिनके पैसे कछ बैंक में हैं वह काम की बजाए अपने खर्च चलाने के लिए बैंकों की लाइन में जाकर लग गए हैं। इससे उत्पादन ठप होने की स्थिति आ गई है। कारोबार के लिए छोटे-मोटे सामान एवं लेबरों को देने के लिए पैसे ना होने से उनके सामने विकट समस्या है।
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जिले में छोटी-बड़ी 150 औद्योगिक इकाइयां हैं। इन इकाइयों के संचालन के लिए जहां लेबर से लेकर उद्यमियों का कार्य प्रभावित हो गया है वहीं बाहर से कच्चे माल मिलना एवं यहां से बने माल को बाहर भेजना भी मुश्किल हो गया है। एक सप्ताह तक तो नोटबंदी का असर ज्यादा कारोबार पर नहीं पड़ा लेकिन अब हालत बिगड़ रहे हैं।
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प्रतिदिन काम करने वाले मजदूर फुटकर पैसे मांग रहे हैं तो वहीं जिनके पैसे कछ बैंक में हैं वह काम की बजाए अपने खर्च चलाने के लिए बैंकों की लाइन में जाकर लग गए हैं। इससे उत्पादन ठप होने की स्थिति आ गई है। कारोबार के लिए छोटे-मोटे सामान एवं लेबरों को देने के लिए पैसे ना होने से उनके सामने विकट समस्या है।
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