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‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ पर अड़े ग्रामीण
Wed, 27 Mar 2019 11:09 PM IST
पवन सिंह
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Published by: पवन सिंह
Updated Wed, 27 Mar 2019 11:09 PM IST
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सनेगपुर गांव में मतदान का बहिष्कार करने वाले लोगों को समझाते एसडीएम और सीओ सिटी।
- फोटो : mau
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जिले के दो गांवों के ग्रामीण लोकसभा चुनाव में मतदान के बहिष्कार करने का एलान कर चुके हैं। उन्होंने एक स्वर में कहा है कि ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’। इतना ही नहीं ‘वोट फॉर नोटा’ के समर्थन में लोगों ने जुलूस भी निकाला है। परदहां ब्लाक के सनेगपुर गांव में फोरलेन पर चढ़ने के लिए ढाला और डुमरावं गांव में रास्ते की मांग को लेकर पिछले एक सप्ताह के दौरान दोनों गांव के 200 से अधिक ग्रामीण नेताओं और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ मोर्चा खोल चुुके हैं। विरोध प्रदर्शन के बीच उन्होंने चुनाव में सामूहिक रूप से ‘नोटा’ का बटन दबाने का एलान किया था।
ग्रामीणों के इस एलान पर सदर एसडीएम डा. अंकुर लाठर, सदर सीओ आलोक श्रीवास्तव मय फोर्स के साथ मंगलवार की देर शाम सनेगपुर गांव में पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर करने का आश्वासन दिया। एसडीएम ने गांव में लगाए गए वोट फॉर नोटा के बैनर को उतारने का आग्रह किया। एसडीएम की इस बात को अनुसनी करते हुए गांव के लोगों ने उनका विरोध किया और गांव में आने जाने के लिए फोरलेन पर पर ढाला बनाने की मांग पर अड़े रहे। कहा मांग पूरी नहीं होने पर लोकसभा चुनाव में नोटा दबाया जाएगा।
सबसे पहले सांसद हरिनारायन राजभर के द्वारा गोद लिए गए आदर्श गांव डुमरावं के पश्चिमपुरा के लोगों ने 22 मार्च को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता खिलाफ मोर्चा खोला। ग्रामीणों का कहना है कि गांव राजनीतिक दलों की उपेक्षाओं का शिकार हुआ है। इसी गांव महान कवि पं. श्याम नारायण पांडेय ने वीर रस की महान कृति हल्दीघाट की रचना करके समूचे भारत में गांव का नाम रोशन किया था। ग्रामीण प्रेमनाथ सिंह ने कहा कि जब तक गांव में सड़क और नाली का निर्माण नहीं होगा तब तक चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा और इस बार ‘नोटा’ का बटन दबाया जाएगा। गांव पश्चिमपुरा के 40 परिवारों ने चुनाव का बहिष्कार करने और नोटा बटन दबाने का निर्णय लिया है।
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वहीं, परदहां ब्लाक के सनेगपुर गांव में 24 मार्च को गांव के लोगों ने एनएचएआई द्वारा फोरलेन पर ढाला बनाकर रास्ता बनाया था। लेकिन एक महीने पहले एनएचएआई ने रास्ते को तोड़ दिया। जिससे गांव में आवागमन बाधित हो गया। ऐसे में दस किलोमीटर घूम कर सहरोज और कोपागंज होते हुए जाना पड़ रहा। ग्रामीणों ने चेताया कि जब तक रास्ते का फिर से निर्माण नहीं कराया जाता तब तक चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा और इस बार के लोकसभा चुनाव में नोटा का बटन दबाएंगे। बता दें कि गांव में 500 परिवारों में लगभग 2 हजार मतदाता हैं।
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ग्रामीणों के इस एलान पर सदर एसडीएम डा. अंकुर लाठर, सदर सीओ आलोक श्रीवास्तव मय फोर्स के साथ मंगलवार की देर शाम सनेगपुर गांव में पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर करने का आश्वासन दिया। एसडीएम ने गांव में लगाए गए वोट फॉर नोटा के बैनर को उतारने का आग्रह किया। एसडीएम की इस बात को अनुसनी करते हुए गांव के लोगों ने उनका विरोध किया और गांव में आने जाने के लिए फोरलेन पर पर ढाला बनाने की मांग पर अड़े रहे। कहा मांग पूरी नहीं होने पर लोकसभा चुनाव में नोटा दबाया जाएगा।
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सबसे पहले सांसद हरिनारायन राजभर के द्वारा गोद लिए गए आदर्श गांव डुमरावं के पश्चिमपुरा के लोगों ने 22 मार्च को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता खिलाफ मोर्चा खोला। ग्रामीणों का कहना है कि गांव राजनीतिक दलों की उपेक्षाओं का शिकार हुआ है। इसी गांव महान कवि पं. श्याम नारायण पांडेय ने वीर रस की महान कृति हल्दीघाट की रचना करके समूचे भारत में गांव का नाम रोशन किया था। ग्रामीण प्रेमनाथ सिंह ने कहा कि जब तक गांव में सड़क और नाली का निर्माण नहीं होगा तब तक चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा और इस बार ‘नोटा’ का बटन दबाया जाएगा। गांव पश्चिमपुरा के 40 परिवारों ने चुनाव का बहिष्कार करने और नोटा बटन दबाने का निर्णय लिया है।
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वहीं, परदहां ब्लाक के सनेगपुर गांव में 24 मार्च को गांव के लोगों ने एनएचएआई द्वारा फोरलेन पर ढाला बनाकर रास्ता बनाया था। लेकिन एक महीने पहले एनएचएआई ने रास्ते को तोड़ दिया। जिससे गांव में आवागमन बाधित हो गया। ऐसे में दस किलोमीटर घूम कर सहरोज और कोपागंज होते हुए जाना पड़ रहा। ग्रामीणों ने चेताया कि जब तक रास्ते का फिर से निर्माण नहीं कराया जाता तब तक चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा और इस बार के लोकसभा चुनाव में नोटा का बटन दबाएंगे। बता दें कि गांव में 500 परिवारों में लगभग 2 हजार मतदाता हैं।