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फल योजना भी लापरवाही की भेंट चढ़ी
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Mon, 04 Jul 2016 11:57 PM IST
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फलों का वितरण
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जनपद के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य तथा विद्यालयों में शतप्रतिशत उपस्थिति के लिए शासन की ओर से शुरू की गई फल वितरण योजना पहले दिन ही विभागीय लापरवाही से फ्लाप रही। जनपद के कई ब्लाकों के परिषदीय विद्यालयों में फल वितरण नहीं कराया जा सका। यही नहीं फल वितरण में मानक को ताक पर रख दिया गया। कई स्कूलों में एमडीएम न बनने से बच्चों को भूखे ही घर जाना पड़ा।
जिले के 1716 सरकारी विद्यालयों में मिड-डे-मील योजना संचालित है। रविवार के अवकाश के बाद परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति कम रहती है। शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परिषदीय, सहायता प्राप्त तथा माध्यमिक सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रत्येक सोमवार को मध्याह्न भोजन के पूर्व ही नाश्ते में फल का वितरण करने का फरमान जारी किया।
विभाग की ओर से भी आदेश देकर खानापूर्ति कर दी गई। प्रशासनिक अधिकारियों, जिलास्तरीय अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में विद्यालयों में फल का वितरण करने का आदेश भी कागजी साबित रहा। नगर के अधिकांश विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को फल मेें केला दिया गया।
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लेकिन दर्जनों विद्यालयों में केला की गुणवत्ता निम्न स्तर की रही। वहीं जिले के फतहपुरथ मंडाव, परदहां, रानीपुर, कोपागंज, दोहरीघाट सहित विभिन्न ब्लाकों के दर्जनों विद्यालयों में फल वितरण नहीं किया गया। कई विद्यालयों में तो एमडीएम बना ही नहीं।
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जिले के 1716 सरकारी विद्यालयों में मिड-डे-मील योजना संचालित है। रविवार के अवकाश के बाद परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति कम रहती है। शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परिषदीय, सहायता प्राप्त तथा माध्यमिक सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रत्येक सोमवार को मध्याह्न भोजन के पूर्व ही नाश्ते में फल का वितरण करने का फरमान जारी किया।
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विभाग की ओर से भी आदेश देकर खानापूर्ति कर दी गई। प्रशासनिक अधिकारियों, जिलास्तरीय अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में विद्यालयों में फल का वितरण करने का आदेश भी कागजी साबित रहा। नगर के अधिकांश विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को फल मेें केला दिया गया।
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लेकिन दर्जनों विद्यालयों में केला की गुणवत्ता निम्न स्तर की रही। वहीं जिले के फतहपुरथ मंडाव, परदहां, रानीपुर, कोपागंज, दोहरीघाट सहित विभिन्न ब्लाकों के दर्जनों विद्यालयों में फल वितरण नहीं किया गया। कई विद्यालयों में तो एमडीएम बना ही नहीं।