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एनसीईआरटी की किताबें हुईं नदारद

Thu, 10 May 2018 11:26 PM IST
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mau Updated Thu, 10 May 2018 11:26 PM IST
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NCERT books have disappeared
NCERT
शिक्षा सत्र का दूसरा माह चल रहा है लेकिन यूपी बोर्ड के एनसीईआरटी पैटर्न पर आधारित विभिन्न कक्षाओं की पुस्तकें बाजार से नदारद हैं। सरकारी पुस्तकों पर कमीशन नहीं मिलने से फुटकर दुकानदार इन्हें बेचने में रुचि नहीं ले रहे। जबकि पुस्तकों की तलाश में विद्यार्थी ही अभिभावक भी दुकान-दुकान भटक रहे। उधर,  अधिकांश निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को ही चलाया जा रहा है।
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जिले में 508 माध्यमिक विद्यालय हैं। सरकार की तरफ से नए शिक्षा सत्र में यूपी बोर्ड के नौवीं से 12वीं कक्षाओं तक एनसीईआरटी पैटर्न आधारित पाठ्यक्रम लागू किया है। शिक्षा सत्र का दूसरा माह चल रहा है। लेकिन बाजार में एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिल पा रही हैं। इससे छात्रों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। सरकारी किताबों की अपेक्षा निजी प्रकाशकों की किताबें खासी महंगी हैं। ऐसे में गरीब छात्र पुस्तकें नहीं खरीद पा रहे हैं। पुस्तकें नहीं मिलने से कॉलेजों में मासिक टेस्ट नहीं हो सका है।  उधर, रिटेलरों की मानें तो होलसेलर  सरकारी किताबें प्रिंट रेट पर ही दे रहे हैं। ऐसे में मार्जिन न मिलने से रिटेलर निजी प्रकाशकों की ही पुस्तकें बेचने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। सीबीएसई तथा आईसीएसई से संचालित अधिकांश विद्यालयों में एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें चल रही हैं। स्कूल प्रशासन द्वारा चिह्नित दुकानों से ही इन्हें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।  
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तालीमुद्दीन इंटर कालेज के प्रधानाचार्य मजहर अली का कहना है कि बाजार में एनसीईआरटी की यूपी बोर्ड की किताबें उपलब्ध न होने के चलते छात्रों को दिक्कत आ रही है। इसके चलते कालेज में मासिक टेस्ट नहीं हो पाया है। एएल नोमानी इंटर कालेज के प्रधानाचार्य उस्मान अली बताते हैं कि नौवीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में बदलाव तो किया गया है, लेकिन बाजार में किताबों की उपलब्ध नहीं हैं। सहादतपुरा स्थित पुस्तक विक्रेता सुरेश कुमार ने कहा कि वाराणसी के होलसेलर प्रिंट रेट पर ही किताबें दे रहे हैं। ऐसे में लाभ नहीं मिल रहा।
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इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि  शासन की तरफ से अधिकृत प्रकाशकों से बातचीत कर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
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