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कोपागंज में जल्द बनकर तैयार होगा एमआरएफ सेंटर
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कोपागंज नगर पंचायत द्वारा बनाया जा रहा डंपिंग ग्राउंड।
- फोटो : MAU
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जिले के नगर पंचायत कोपागंज के 60 हजार की आबादी को कचरे से निजात मिल जाएगी। नगर पंचायत द्वारा बनाया जा रहा एमआरएफ सेंटर के निर्माण की प्रक्रिया आखिरी चरण में है। जिले के दस निकायों में कोपागंज पहली निकाय होगी जिसको यह सुविधा मिलेगी। इससे पहले डंपिंग ग्राउंड चिन्हित करने में भी कोपागंज ने दूसरे निकायों को पीछे छोड़ दिया है।
आठ किमी के क्षेत्रफल वाले कोपागंज नगर पंचायत में मैटेरियल रिकवरी फैसलिटी (एमआरएफ) सेंटर बनाने के लिए शासन स्तर से 2020 में 33 लाख 67 हजार रुपये मिले थे। लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण इस पर काम शुरू नहीं हो सका था। बाद में नगर पंचायत द्वारा कोपागंज के सीमा पर चिरैयूईयां में एक हेक्टयर जमीन चिह्नित की थी। इस जमीन में एमआरएफ के अलावा बाउंड्री, प्रोसेसिंग यूनिट, कंपोस्टिंग सहित दूसरे कार्यों के लिए नगर पंचायत को एमआरएफ के अलावा डेढ़ करोड़ रुपये की राशि का बजट मिला है। नगर पंचायत द्वारा एमआरएफ सेंटर बनाने का कार्य भी अंतिम चरण में है, एमआरएफ सेंटर बनता है तो लोगों को रोजाना नगर पंचायत के 17 वार्डों से निकलने वाले करीब दस टन कचरे से निजात मिलेगी जो सड़क किनारे पड़ा रहता है।
कचरे से बनाई जाएगी जैविक खाद
मैटेरियल रिकवरी फैसलिटी सेंटर बनने के बाद कस्बे से निकलने वाला सभी प्रकार का गीला, सूखा कचरा, प्लास्टिक, लोहा, कांच आदि वाहनों से सेंटर पहुंचेगा। जहां तैनात कर्मचारी इस कचरे को अलग-अलग करेंगे। लोहा और कांच को बिक्री किया जाएगा। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए दूसरा विकल्प खोजा जाएगा। अन्य कचरे को एक मशीन के जरिये छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उसे खाद बनाने के लिए बनाए गए गड्ढों में भर दिया जाएगा। इनता ही नहीं नगर पंचायत इस खाद को निकालकर बोरियों में भरकर किसानों को सस्ते दाम में बिक्री करेगा। कचरे में लोग बड़े पैमाने पर प्लास्टिक फेंकते हैं।
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नगर में प्रतिदिन करीब दस टन मिश्रित कचरा निकलता है। एमआरएफ सेंटर के निर्माण के बाद कूड़े को रिसाइकल कर जैविक खाद तैयार की जाएगी।
- जयप्रकाश यादव, ईओ कोपागंज
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आठ किमी के क्षेत्रफल वाले कोपागंज नगर पंचायत में मैटेरियल रिकवरी फैसलिटी (एमआरएफ) सेंटर बनाने के लिए शासन स्तर से 2020 में 33 लाख 67 हजार रुपये मिले थे। लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण इस पर काम शुरू नहीं हो सका था। बाद में नगर पंचायत द्वारा कोपागंज के सीमा पर चिरैयूईयां में एक हेक्टयर जमीन चिह्नित की थी। इस जमीन में एमआरएफ के अलावा बाउंड्री, प्रोसेसिंग यूनिट, कंपोस्टिंग सहित दूसरे कार्यों के लिए नगर पंचायत को एमआरएफ के अलावा डेढ़ करोड़ रुपये की राशि का बजट मिला है। नगर पंचायत द्वारा एमआरएफ सेंटर बनाने का कार्य भी अंतिम चरण में है, एमआरएफ सेंटर बनता है तो लोगों को रोजाना नगर पंचायत के 17 वार्डों से निकलने वाले करीब दस टन कचरे से निजात मिलेगी जो सड़क किनारे पड़ा रहता है।
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कचरे से बनाई जाएगी जैविक खाद
मैटेरियल रिकवरी फैसलिटी सेंटर बनने के बाद कस्बे से निकलने वाला सभी प्रकार का गीला, सूखा कचरा, प्लास्टिक, लोहा, कांच आदि वाहनों से सेंटर पहुंचेगा। जहां तैनात कर्मचारी इस कचरे को अलग-अलग करेंगे। लोहा और कांच को बिक्री किया जाएगा। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए दूसरा विकल्प खोजा जाएगा। अन्य कचरे को एक मशीन के जरिये छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उसे खाद बनाने के लिए बनाए गए गड्ढों में भर दिया जाएगा। इनता ही नहीं नगर पंचायत इस खाद को निकालकर बोरियों में भरकर किसानों को सस्ते दाम में बिक्री करेगा। कचरे में लोग बड़े पैमाने पर प्लास्टिक फेंकते हैं।
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नगर में प्रतिदिन करीब दस टन मिश्रित कचरा निकलता है। एमआरएफ सेंटर के निर्माण के बाद कूड़े को रिसाइकल कर जैविक खाद तैयार की जाएगी।
- जयप्रकाश यादव, ईओ कोपागंज