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मौनी अमावस्याः मौन व्रत से मिलती है अनंत ऊर्जा
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दोहरीघाट। मौनी अमावस्या के अवसर पर शुक्रवार को दोहरीघाट के पवित्र सरयू तट पर श्रद्धालुओं का जमघट लगेगा। सूर्य के उत्तरायण की गति और उसकी प्रथम आभा के रूप में अमावस्या का स्नान उपासकों को जीवनदायिनी शक्ति देता है। नदी तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और मेले की चल रही तैयारी बृहस्पतिवार को पूरी हो गई। मान्यता है कि इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान तथा मौन व्रत धारण करने से अनंत ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या के अवसर पर विभिन्न इलाकों से स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का रेला लगता है।
माघ मास की अमावस्या तिथि, माघ के महीने का सबसे बड़ा स्नान पर्व है। पवित्र तीर्थ स्थलों में नदियों में इस पावन तिथि को स्नान व दान की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार उपासक यथाशक्ति अन्न, तिल, सप्तधान्य, के दान का विधान इस तिथि को बताया गया है। मौन व्रत का धारण करना उपासक का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। मौन व्रत से गंभीरता, आत्मशक्ति और वाक्यशक्ति में बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही कम बोलने का अभ्यास होने के साथ ही अधिक बोलने के दोष का निवारण हो जाता है।
इस संबंध में मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा निवासी पं. विरेंद्र शुक्ल का कहना है कि अमावस्या को पीपल तथा विष्णु का पूजन करके पीपल की 108 परिक्रमाएं करने का विधान है। मौन व्रत रखने से न सिर्फ धार्मिक लाभ होता है बल्कि आत्मबल भी बढ़ता है। माघ मास की अमावस्या को ब्रह्माजी और गायत्री की विशेष अर्चना के साथ-साथ देव पितृ तर्पण का भी विधान है। सतयुग में तपस्या को, त्रेता युग में ज्ञान को, द्वापर में पूजन को और कलियुग में दान को उत्तम माना गया है। उधर नदी तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और मेले की तैयारी के मद्देनजर तैयारी पूरी हो गई। नगर पंचायत प्रशासन की तरफ से रामघाट की साफ सफाई सहित सभी व्यवस्था कराया गया।
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माघ मास की अमावस्या तिथि, माघ के महीने का सबसे बड़ा स्नान पर्व है। पवित्र तीर्थ स्थलों में नदियों में इस पावन तिथि को स्नान व दान की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार उपासक यथाशक्ति अन्न, तिल, सप्तधान्य, के दान का विधान इस तिथि को बताया गया है। मौन व्रत का धारण करना उपासक का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। मौन व्रत से गंभीरता, आत्मशक्ति और वाक्यशक्ति में बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही कम बोलने का अभ्यास होने के साथ ही अधिक बोलने के दोष का निवारण हो जाता है।
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इस संबंध में मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा निवासी पं. विरेंद्र शुक्ल का कहना है कि अमावस्या को पीपल तथा विष्णु का पूजन करके पीपल की 108 परिक्रमाएं करने का विधान है। मौन व्रत रखने से न सिर्फ धार्मिक लाभ होता है बल्कि आत्मबल भी बढ़ता है। माघ मास की अमावस्या को ब्रह्माजी और गायत्री की विशेष अर्चना के साथ-साथ देव पितृ तर्पण का भी विधान है। सतयुग में तपस्या को, त्रेता युग में ज्ञान को, द्वापर में पूजन को और कलियुग में दान को उत्तम माना गया है। उधर नदी तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और मेले की तैयारी के मद्देनजर तैयारी पूरी हो गई। नगर पंचायत प्रशासन की तरफ से रामघाट की साफ सफाई सहित सभी व्यवस्था कराया गया।
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