मऊ। शहर के निकट तमसा नदी के किनारे दक्षिणी तट पर हो रहे अतिक्रमण से पानी का दबाव उत्तरी किनारों पर पड़ता है। इसका खामियाजा नदी के उत्तरी तट के किसानों को भुगतना पड़ता है। उत्तरी किनारे पर कटान होने से शहर के उत्तरी इलाके सहित कई गांवों के सैकड़ों किसानों के खेती योग्य काफी जमीन कट कर नदी में विलीन हो चुकी है। कटान से नदी के किनारे स्थित उपजाऊ भूमि का काफी क्षेत्रफल बालू में तब्दील हो चुका है।
नगरपालिका क्षेत्र के भदेसरा से तमसा नदी के किनारे शुरु हुआ अतिक्रमण का खेल भीटी के पूर्वी क्षेत्र तक जारी है। इसके अलावा नदी के उत्तरी किनारे पर सरायलखंसी मौजे से लेकर ख्वाजाजहांपुर से लेकर भीटी से लेकर राघवपट्टी के मौजों तक पर भू माफियाओं की नजर है। नदी के उत्तरी छोर पर स्थित इन इलाकों में भूखंडों की प्लाटिंग और विक्री जोरों पर चल रही है। इधर दक्षिणी किनारे के बेशकीमती भूखंडों पर अतिक्रमण जारी रहने से नदी के उत्तरी किनारों पर दबाव पड़ता है। इसका नतीजा है कि उत्तरी किनारे पर स्थित भदेसरा, सरायलखंसी, भीटी तथा राघवपट्टी सरवां भवनाथ पुर तक के मौजों के कुछ हिस्सों की जमीन का कटान कई सालों से चल रहा है। सबसे अधिक कटान भदेसरा और सरायलखंसी मौजों के क्षेत्रों में हुई है। तमसा में पानी बढ़ने पर नदी के दक्षिणी किनारे पर हो रहे अतिक्रमण वाले क्षेत्रों के विपरीत दिशा में उत्तरी किनारों पर कटान तेज हो जाती रही है। इसमें सैकड़ों हरे पेड़ गिरकर नदी में गिरते रहे लेकिन इस समस्य की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। इस बाबत प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने आवाज उठाई ,लेकिन उनकी यह आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गई। शहर की घनी आबादी वाले इलाके में नदी की चौड़ाई कम हो गई है।