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दौड़ाई जा रहीं खटारा स्कूली बसें
mau
Updated Sat, 14 Jul 2018 12:24 AM IST
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खटारे स्कूली वाहन
- फोटो : SELF
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भारी भरकम फीस वसूलने के बाद भी निजी स्कूल संचालक नौनिहालों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। शिक्षा सत्र के तीन माह बाद भी न तो संबंधित विभाग और न ही प्रशासन स्कूल बसों की फिटनेस के प्रति गंभीर है। हालत यह है कि जिले में अनफिट स्कूली बसों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। अनफिट स्कूली बसों के संचालन से अभिभावकों को अपने बच्चों के सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। कहने को तो विभागीय अभिलेखों में 193 स्कूल बसें तथा 251 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। नियम कानून को ताक पर रखकर अधिकांश स्कूल संचालकों द्वारा छोटे सवारी वाहनों से छात्रों को ढ़ोया जाता है। विभाग की तरफ से 32 स्कूली बस संचालकों को नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर ली गई।
जिले में 542 निजी स्कूल संचालित हैं। आए दिन नौनिहालों के साथ हो रहे हादसों के बाद भी जिले में ओवरलोड स्कूली वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। इसके प्रति न तो स्कूल प्रशासन, न ही संबंधित विभाग और न ही प्रशासन गंभीर है। बड़ी घटना में लगभग ढ़ाई वर्ष पूर्व रानीपुर ब्लाक के महासो में स्कूली बस ट्रेन से टकरा गई थी जिसमें कई बच्चों की मौत हो गई थी तथा कई घायल हो गए थे। इसके बाद भी घटना की सबक किसी ने नहीं लिया। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो विभागीय अभिलेखों में 193 स्कूल बस तथा 251 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं।
स्टाफ ढ़ोने वाले वाहनों पर ही स्कूली बच्चों को ढोने का काम किया जा रहा है। नियम के तहत शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व ही सभी स्कूली बसों का फिटनेस कर लिया जाना था। विभाग की तरफ से अनफिट 32 बसों के संचालकों को नोटिस देकर खानापूर्ति कर लिया गया है जबकि 25 स्कूली वाहनों का चालान किया जा चुका है।
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शहर की सड़कों पर मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए खटारा स्कूल वाहन तथा ओवरलोड धड़ल्ले से चल रहे हैं। जबकि स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही अनुमन्य हैं। बावजूद इसके तीनपहिया टेंपो, मैजिक वैन और तमाम छोटी बड़ी स्कूल वैन के नाम पर बच्चों को ढो रही हैं। वह भी क्षमता से अधिक।
इन ओवरलोड स्कूल वाहनों के चलते नौनिहालों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है। इस संबंध में एआरटीओ अवधेश कुमार का कहना है कि अनफिट 32 स्कूल बस संचालकों को नोटिस दी गई है। छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चों को ले जाना गैर कानूनी है। अगर ऐसी शिकायत मिलती है तो सवारी वाहन संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में 542 निजी स्कूल संचालित हैं। आए दिन नौनिहालों के साथ हो रहे हादसों के बाद भी जिले में ओवरलोड स्कूली वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। इसके प्रति न तो स्कूल प्रशासन, न ही संबंधित विभाग और न ही प्रशासन गंभीर है। बड़ी घटना में लगभग ढ़ाई वर्ष पूर्व रानीपुर ब्लाक के महासो में स्कूली बस ट्रेन से टकरा गई थी जिसमें कई बच्चों की मौत हो गई थी तथा कई घायल हो गए थे। इसके बाद भी घटना की सबक किसी ने नहीं लिया। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो विभागीय अभिलेखों में 193 स्कूल बस तथा 251 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं।
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स्टाफ ढ़ोने वाले वाहनों पर ही स्कूली बच्चों को ढोने का काम किया जा रहा है। नियम के तहत शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व ही सभी स्कूली बसों का फिटनेस कर लिया जाना था। विभाग की तरफ से अनफिट 32 बसों के संचालकों को नोटिस देकर खानापूर्ति कर लिया गया है जबकि 25 स्कूली वाहनों का चालान किया जा चुका है।
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शहर की सड़कों पर मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए खटारा स्कूल वाहन तथा ओवरलोड धड़ल्ले से चल रहे हैं। जबकि स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही अनुमन्य हैं। बावजूद इसके तीनपहिया टेंपो, मैजिक वैन और तमाम छोटी बड़ी स्कूल वैन के नाम पर बच्चों को ढो रही हैं। वह भी क्षमता से अधिक।
इन ओवरलोड स्कूल वाहनों के चलते नौनिहालों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है। इस संबंध में एआरटीओ अवधेश कुमार का कहना है कि अनफिट 32 स्कूल बस संचालकों को नोटिस दी गई है। छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चों को ले जाना गैर कानूनी है। अगर ऐसी शिकायत मिलती है तो सवारी वाहन संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।