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सप्तम कालरात्रि की हुई आराधना
mau news
Updated Thu, 28 Sep 2017 12:14 AM IST
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हिन्दी भवन पर स्थापित मां की भव्य प्रतिमा।
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मऊ। नवरात्र के सातवें दिन बुधवार को दुर्गा मंदिरों में मां दुर्गा के सातवें स्वरुप सप्तम कालरात्रि की आराधना की गई। दूर दराज से आए श्रद्घालुओं ने मां के चरणों में शीश नवाकर मंगलकामना की। मनोकामना लेकर मां के दरबार में पहुंचे श्रद्घालुओं के जयकारे से वातावरण गूंज उठा।
नवरात्र के सातवें दिन नगर के शीतला माता मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें तड़के से ही भक्तों का रेला लगा रहा। दूर दराज सहित गैर जनपदों से पहुंचे भारी सं या में श्रद्घालुओं ने श्रद्घा भाव से मत्था टेका। कहा जाता है कि कालीजी की पूजा से सब कुछ सिद्घ होता है। नवरात्र में सप्तमी का विशेष महत्व है। मां काली नवरात्र के सातवें दिन मंदिरों में विराजमान होती हैं। इसी मान्यता के तहत
जगत जननी मां का दर्शन करने के लिए आए भक्तों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया। शक्ति की उपासना करके फल की प्राप्ति के लिए हर रोज भारी सं या में श्रद्घालु मां का दर्शन कर रहे हैं। मां के जयकारे तथा भक्तों की भारी भीड़ से प्रमुख मंदिर परिसर में मेला जैसा दृश्य हो गया है। कोई नारियल, चुनरी सहित मिष्ठान चढ़ाकर
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मां की आराधना कर रहा है तो कोई पूड़ी हलवा चढ़ाकर मां का पूजन अर्चन कर रहा है। उधर नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में दुर्गा प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के बाद देर शाम तक चहल पहल बढ़ गई है। नगर के बने दुर्गा पंडालों को देखने और मां के दर्शन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से भारी सं या में लोगों के आने से देर शाम तक मेला जैसा दृश्य रहा। भक्तों के जयकारे तथा भक्तिगीतों के बजने से वातावरण भक्तिमय हो गया है। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित कई प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं का अभाव होने से श्रद्घालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ा। नवरात्र में
मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर पर श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है बावजूद प्रशासन की ओर से शुद्घ पेयजल सहित अन्य सुविधाओं को बहाल नहीं किया जा सका है।
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नवरात्र के सातवें दिन नगर के शीतला माता मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें तड़के से ही भक्तों का रेला लगा रहा। दूर दराज सहित गैर जनपदों से पहुंचे भारी सं या में श्रद्घालुओं ने श्रद्घा भाव से मत्था टेका। कहा जाता है कि कालीजी की पूजा से सब कुछ सिद्घ होता है। नवरात्र में सप्तमी का विशेष महत्व है। मां काली नवरात्र के सातवें दिन मंदिरों में विराजमान होती हैं। इसी मान्यता के तहत
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जगत जननी मां का दर्शन करने के लिए आए भक्तों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया। शक्ति की उपासना करके फल की प्राप्ति के लिए हर रोज भारी सं या में श्रद्घालु मां का दर्शन कर रहे हैं। मां के जयकारे तथा भक्तों की भारी भीड़ से प्रमुख मंदिर परिसर में मेला जैसा दृश्य हो गया है। कोई नारियल, चुनरी सहित मिष्ठान चढ़ाकर
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मां की आराधना कर रहा है तो कोई पूड़ी हलवा चढ़ाकर मां का पूजन अर्चन कर रहा है। उधर नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में दुर्गा प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के बाद देर शाम तक चहल पहल बढ़ गई है। नगर के बने दुर्गा पंडालों को देखने और मां के दर्शन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से भारी सं या में लोगों के आने से देर शाम तक मेला जैसा दृश्य रहा। भक्तों के जयकारे तथा भक्तिगीतों के बजने से वातावरण भक्तिमय हो गया है। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित कई प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं का अभाव होने से श्रद्घालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ा। नवरात्र में
मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर पर श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है बावजूद प्रशासन की ओर से शुद्घ पेयजल सहित अन्य सुविधाओं को बहाल नहीं किया जा सका है।