मऊ। जिले में औद्योगिक इकाईयां बीमार हो गई हैं। परदहां की स्पीनिंग और स्वदेशी कॉटन मिल दशकों से बंद पड़ी हैं। वहीं, चार औद्योगिक क्षेत्रों में 291 यूनिटों में से 128 में ही उद्योग चल रहा है। 163 यूनिटें बंद हैं। ऐसे में जहां जिले का विकास अवरुद्ध हो रहा है तो वहीं बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिल रहा। यदि बंद यूनिटों को पुन: चलाने का प्रयास किया जाए तो बात बन सकती है। जिले में उद्योगों का जाल बिछाने के लिए ताजोपुर, सहादतपुरा, घोसी और गरथौली औद्योगिक क्षेत्र मेें कुल 291 यूनिटें लगाई गई हैं। वर्तमान में 128 में उद्योग चल रहे हैं जबकि 163 यूनिटें बंद हैं। दशकों से परदहां तथा स्वदेशी काटन मिल बंद है। परदहां काटन मिल की स्थापना 1976 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थी। मिल में स्थायी और अस्थायी लगभग पांच हजार मजदूर कार्य करते थे। वहीं, जयपुरिया के हाथों बसाई गई स्वदेशी काटन मिल जिसे 1977 में केंद्र सरकार ने अधिग्रहीत कर लिया था उसमें भी लगभग 500 मजदूर काम करते थे। दोनों मिलों से बनने वाले धागों की खरीदारी भी यहीं के बुनकर करते थे लेकिन दोनों मिलों के बंद होने से बुनकर बाहर से धागे मंगाते हैं। यदि दोनों मिलें चालू हो जाएं तो बुनकरों को सस्ते दर पर धागा भी उपलब्ध होगा और लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। हालांकि मिलों को चलाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से कई बार संपत्तियों का आकलन किया गया। मगर मामला अभी शासन स्तर पर लंबित चल रहा है। उधर, औद्योगिक क्षेत्रों में बंद पड़े उद्योगों को शुरू कराने की बजाय विभाग उद्यमियों को नोटिस जारी कर रस्म अदायगी कर रहा है। कई बार नोटिस जारी करने के बाद न तो उद्योग शुरु हुए और न ही दूसरे को भूखंड एलाट किया जा सका। हालत यह है कि बंद पड़ी यूनिटें आवास या गोदाम में तब्दील हो गई हैं। मगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र राजेश रोमन ने बताया कि बंद चल रही परदहां स्पीनिंग तथा स्वदेशी काटन मिल का मामला शासन स्तर पर लंबित है। औद्योगिक क्षेत्रों में बंद पड़ी इकाईयों को चलाने की जिम्मेदारी उद्यमियों की है। उद्योग बंधुओं की बैठक बुलाई जाएगी। बंद पड़ी यूनिटों के मामले में भूखंड स्वामियों को नोटिस जारी किया गया है। वहीं यूपीसीडा गोरखपुर के क्षेत्रीय प्रबंधक सुभाष पांडेय ने बताया कि ताजोपुर में बंद पड़ी यूनिटों की हर तीन माह पर समीक्षा कर भूखंड स्वामियों को नोटिस जारी किया जाता है। आर्थिक परेशानियोें की वजह से बंद यूनिटों को बैंक का सहयोग लेकर इसे चलाने का उद्यमियों को निर्देश दिए गए हैं।

नगर के सहादतपुरा स्थित बंद पड़ी स्वदेशी काटन मिल।संवाद- फोटो : MAU