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Mau News: दस साल मेें गन्ने की खेती का रकबा 55 फीसदी घटा, भुगतान में देरी और बढ़ती लागत से छोड़ रहे खेती

Thu, 22 Jan 2026 12:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:52 AM IST
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In ten years, the area under sugarcane cultivation has decreased by 55 percent; farmers are abandoning cultivation due to delayed payments and rising costs.
घोसी चीनी मिल के बाहर खड़े गन्ना लदी ट्रैक्टर ट्राली।संवाद
गन्ना सबका ताऊ है, नकदी और कमाऊ है’ कुछ सालों पहले तक यह स्लोगन चीनी मिल दीवारों पर लिखवाती थी। किसान भी इस बात को मानते थे। धीरे-धीरे समय बदला तो भुगतान में देरी और बढ़ती लागत के कारण 10 हजार किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग हो गया है।
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10 साल मेें गन्ने के रकबे में 55 फीसदी की कमी आई है। इसका असर वर्तमान में घोसी मिल के पेराई सत्र में दिख रहा है। 18 लाख क्विंटल लक्ष्य की तुलना में अभी 45 दिन बीतने के बाद महज 7 लाख क्विटंल ही गन्ना खरीदा जा सका है।
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अब तक किसी भी किसान को गन्ना का भुगतान तक नहीं किया गया हैं। चीनी मिल अधिकतम फरवरी के अंतिम या मार्च के दूसरे सप्ताह तक ही चलेगी जबकि चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ 4 दिसंबर को हुआ था।
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साल 2015 में जिले में गन्ना का रकबा 19 हजार 641 हेक्टेयर था जो वर्तमान में 7 हजार 694 हेक्टेयर पर जा सिमटा है। आंकड़ों पर देखें तो बीते दस वर्ष में केवल 2012/13 में किसानों में गन्ना की फसल को लेकर रुचि देखी गई, इससे उस साल गन्ना का रकबा 11459 पर पहुंच गया था जबकि 2011/12 में 9324 हेक्टेयर था।

11 क्रय केंद्र सठियांव से संबद्ध
गत वर्ष चीनी मिल के 11 क्रय केंद्रों को मध्य सत्र में सठियांव से संबद्ध कर दिया गया था। ऐसे में चीनी मिल का गन्ना क्षेत्रफल ही नहीं घटा बल्कि खरीद भी घटकर 14 लाख क्विंटल हो गई। इस वर्ष सठियांव को आवंटित 11 क्रय केंद्रों में से तीन प्रमुख क्रय केंद्र करखिया देवारा, खोजौली और लाटघाट वापस मिल गए हैं। उधर क्रय किए गए गन्ना का मूल्य 14 करोड़ है, लेकिन भुगतान जीरो है। जबकि चीनी मिल ने अब तक 45940 कुंतल चीनी का उत्पादन भी कर लिया है।


बड़ी समस्या है घटता गन्ना क्षेत्रफल
चीनी मिल की पुरानी तकनीक आधारित जर्जर मशीनों की समस्या के साथ ही सबसे बड़ी समस्या किसानों का गन्ना की खेती की से विमुख होना है। तमाम कवायद के बाद भी पूर्व के गन्ना किसान दोबारा गन्ना की बोआई करने से दूरी बनाए हैं।

रेड रॉट ने तोड़ दी किसानों की कमर
रेड रॉट सड़न रोग ने इस वर्ष किसानों की कमर तोड़ दी है। यह रोग जिस खेत में लग गया उसका पूरा गन्ना ही सड़ कर गिर गया। खास बात यह रही कि तमाम दवाओं का प्रयोग करने के बाद भी इस रोग का प्रकोप कम नहीं हो सका। चीनी मिल अधिकारी जिस ज्यादा चीनी परता वाले गन्ने को बोने पर जोर देते हैं, उसमें यह रोग ज्यादा लगा। गन्ने का रकबा घटने का यह भी एक प्रमुख कारण रहा।

किसान बोले
गन्ने के भुगतान में देरी और मजदूरी लागत ज्यादा होने से किसानों का खेती से मोहभंग हो रहा है। बीते साल आठ से दस बीघा गन्ने की खेती होती थी। इस साल महज पांच बीघा ही बोआई की गई है। - आलोक तिवारी, एकौना

गन्ने की बोआई का रकबा हर साल कम हो रहा है। इसके पीछे कई कारण है, पहला मजदूरी और दूसरा समय से किसान को भुगतान नहीं होना है। किसान घर पर गन्ने की पेराई कर उसका गुड़ बनाकर बेच रहे है। इससे मुनाफा है। - कृष्णकांत चौबे, चौबेपुर

मिल अधिकारी खरीदते समय गन्ने को खराब बता कर परेशान करते हैं और भुगतान के लिए चुप्पी साध कर बैठ जाते हैं। गन्ने का रकबा घटने पर मिलें ही बंद होने लगेंगी, तब मिल मालिकों की आंख खुलेगी। - अंजनी सिंह, ताजोपुर

पहले दस बीघा गन्ने की खेती होती है, अब रकबा सिमट चार बीघा हो गया है। मिल में गन्ने की भुगतान में देरी हाने से गिल पर गन्ना भेजना बंद कर दिया है। छुट्टा मवेशियों की परेशानी भी एक कारण है। - राकेश सिंह, कुशमौर


आंकड़ों की नजर में गन्ने का क्षेत्रफल
वर्ष क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
2014-15 10984
2015-16 19641
2016-17 8406
2017-18 9564
2018-19 9857
2019-20 10546
2020-21 5349.34
2021-22 7131.36
2022-23 5397.448
2023-24 7160
2024-25 7694

चीनी मिल हर हाल में पेराई लक्ष्य पूरा करेगी। किसानों से संपर्क किया जा रहा है। किसानों को निष्पक्षता के साथ पर्ची निर्गत हो रही है। गन्ना मूल्य के भुगतान की तैयारी चल रही है। शीघ्र ही किसानों के खाते में धनराशि प्रेषित होगी। - महेंद्र प्रसाद, प्रधान प्रबंधक, चीनी मिल घोसी
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