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Mau News: फार्मासिस्ट के नदारद होने पर प्रशिक्षुओं के भरोसे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज

Fri, 24 Apr 2026 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:45 PM IST
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In case of absence of pharmacist, emergency treatment of district hospital is dependent on trainees.
जिला अस्पताल के इमरजेंसी में मरीजों का उपचार करते प्र​शिक्षु।संवाद
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इन दिनों फार्मासिस्ट अनुपस्थित हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का उपचार प्रशिक्षुओं के भरोसे किया जा रहा है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार रोजाना लगभग 100 मरीज इमरजेंसी में आते हैं, जिनका उपचार किया जाता है।
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अस्पताल की इमरजेंसी में प्रशिक्षुओं से मरीजों का उपचार कराए जाने की शिकायत के बाद शुक्रवार को हमारी टीम ने सुबह साढ़े 10 बजे ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक आधे घंटे पड़ताल की। ओपीडी के दौरान भी फार्मासिस्ट अपने अनुभाग में मौजूद नहीं थे।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फार्मासिस्ट की तैनाती आर्थो, ईसीजी, दवा वितरण काउंटर और एआरबी पर रहती है। जिला अस्पताल में फार्मासिस्ट के कुल 11 पद हैं, जिनमें पांच फार्मासिस्ट, पांच चीफ फार्मासिस्ट और एक फार्मेसी अधिकारी का पद शामिल है।
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वर्तमान में सात फार्मासिस्ट तैनात हैं। बाकी के पद बीते कई सालों से खाली हैं। इमरजेंसी में 24 घंटे के दौरान तीन शिफ्ट में एक चिकित्सक और एक फार्मासिस्ट की तैनाती रहती है। आपातकालीन मरीजों का उपचार चिकित्सक के परामर्श पर फार्मासिस्ट करते हैं।
बीते कई दिनों से इमरजेंसी नर्सिंग कालेज में शिक्षारत छात्र और अन्य प्रशिक्षु आने वाले मरीजों का उपचार कर रहे हैं। खास बात यह है कि दुर्घटना में घायल मरीजों का भी उपचार यही प्रशिक्षु करते हैं।
पड़ताल के दौरान इमरजेंसी में एक मरीज को प्रशिक्षु ही दवा दे रहा था। वहीं भर्ती वार्ड में भी मरीज को इंजेक्शन प्रशिक्षु ही लगा रहे थे। यहां आने वाले मरीज भी नहीं समझ पाते कि उनका उपचार प्रशिक्षित न किए गए लोग कर रहे हैं। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अभी 20 से अधिक प्रशिक्षु हैं।


ऐसा नहीं हो सकता है, प्रशिक्षु को चिकित्सक या फार्मासिस्ट की देखरेख में उपचार करना है। शासन के निर्देश पर अनुबंधित नर्सिंग कॉलेज के छात्रों को बैच वार प्रशिक्षण दिया जाता है। इमरजेंसी में हर समय चिकित्सक और फार्मासिस्ट रहते हैं। कभी कभार मरीज की संख्या बढ़ने पर उनको त्वरित उपचार देना होता है, ऐसे में बेहतर प्रशिक्षु से मरीजों के उपचार में सहयोग लिया जाता है। - डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
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