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Mau News: 180 दिनों में महिला एच्छिक ब्यूरो में आए 705 मामले, 65 फीसदी शिकायतें पत्नियों के मोबाइल चलाने के
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय में महिला एच्छिक ब्यूरो में आए मामले की सुनवाई करते सदस्य।संवाद
मऊ। जिले में मोबाइल पर सोशल मीडिया पर सक्रियता और सास की दखल के चलते परिवारिक कलह बढ़ रहा है। 180 दिनों में महिला एच्छिक ब्यूरो की कुल 12 बैठकों में आए 705 मामलों में 65 फीसदी शिकायतें पत्नियों के मोबाइल चलाने के आए हैं। 35 फीसदी पुरुषों ने कहा कि सास की दखलंदाजी से परिवार में कलह बढ़ रहा है। इस दौरान 75 दंपतीयों ने एक दूसरे का साथ छोड़ दिया। सकारात्मक बात है कि काउंसिलिंग के चलते 78 जोड़ों ने पुराने विवाद को भुलाकर दोबारा साथ रहने को तैयार हुए।
रविवार को पुलिस लाइन के सभागार में आयोजित महिला ऐच्छिक ब्यूरो की बैठक में 80 मामले आए, इसमें 22 का निस्तारण हुआ। वहीं 9 दंपतियों ने अलग होने की मांग की तो वहीं तीन मामलों में मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया। रविवार को आयोजित बैठक में बेहतर काउंसिलिंग के चलते छह दंपतीयों ने दोबारा साथ रहने पर सहमति जताई। इस दौरान रतनपुरा निवासी महिला ने कहा कि जिस बेटे को उसके पिता ने इस काबिल बनाया कि वह समाज में एक नाम कमाने में सफल रहा। वह ही पत्नी और सास की बातों में ऐसे फंसा की पिता की मौत के एक महीने में उसने मुझे समझने के बजाए दिन रात प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कहा कि बहू को केवल एक मांग है कि वह अपने पति बच्चों के साथ अलग रहे, बल्कि मेरा कहना है कि इस विषम परिस्थिति में परिवार को एक साथ रहने की जरूरत है। इसी तरह से एक दूसरा मामला भी रतनपुरा ब्लॉक के हलधरपुर का आया। इसमें महिला ने आरोप लगाया था कि पति उसे साथ रखने को तैयार नहीं है। जबकि पति का आरोप था कि पत्नी की मनमानी और सोशल मीडिया पर अति सक्रियता के चलते वह तंग आ चुका है। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि महिला के पिता ने दामाद के पक्ष में गवाही देते हुए उसे सही बताया। पिता ने बताया कि बेटी के मनमानी के चलते वर्षों से अपनी इज्जत गवां रहा है। इस दौरान तीन मामलों में मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय सदस्यों ने लिया, जबकि 58 मामलों में सुनवाई की अगली तारीख तय की गई। मामलों के निस्तारण में पदाधिकारी अर्चना उपाध्याय, सर्वेश दूबे, शाहिद पैरिस, मौलवी अरशद शामिल रहे।
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सास की दखलांदाजी तोड़ रही है बेटियों का घर
महिला एच्छिक ब्यूरो की सदस्य अर्चना उपाध्याय ने बताया कि बेटियों के गृहस्थ जीवन में मायके का अत्यधिक दखल घरों में दरार डाल रहा है। हर छोटी-छोटी बातों को लेकर मायके वालों की दखलांदाजी पतियों और उनके परिजनों को रास नहीं आती। यही कारण है कि कई केसों में पति-पत्नी के बीच न केवल मतभेद हुए, बल्कि तलाक की भी नौबत आ चुकी है। दंपती में छोटी-छोटी बातों पर कलह शुरू होती है। फिर माता-पिता, सास ससुर और दूसरों का हस्तक्षेप मामले को और बिगाड़ देता है। आजकल बेटियां हर बात मायके में बताती हैं, जो कई बार पति को अच्छी नहीं लगती। ऐसे में मायके का दखल निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। बेटी और दामाद दोनों की बात सुनकर फैसला करें।
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काउंसिलिंग से रिश्ते जुड़ भी रहे
एसपी इलामारन जी ने बताया कि पति-पत्नी के आपसी तनाव, गलत फहमियों और घरेलू विवादों के कारण टूटते रिश्तों को सहेजने में ऐच्छिक ब्यूरो के सदस्य अहम भूमिका निभा रहे हैं। संवेदनशील मामलों में संवाद और काउंसिलिंग के जरिये परिवारों को एकजुट रखने का काम केंद्र कर रहा है। छह माह में 78 दंपती जो कि अलग रह रहे थे, वह बेहतर काउसिलिंग के बाद फिर से साथ रहने को तैयार हुए हैं। समय रहते उचित मार्गदर्शन मिलने पर रिश्तों में आई दरार को पाटा जा सकता है। संगठित तरीके से हो रही पहल ने कई टूटते घरों को नया जीवन दिया है।
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रविवार को पुलिस लाइन के सभागार में आयोजित महिला ऐच्छिक ब्यूरो की बैठक में 80 मामले आए, इसमें 22 का निस्तारण हुआ। वहीं 9 दंपतियों ने अलग होने की मांग की तो वहीं तीन मामलों में मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया। रविवार को आयोजित बैठक में बेहतर काउंसिलिंग के चलते छह दंपतीयों ने दोबारा साथ रहने पर सहमति जताई। इस दौरान रतनपुरा निवासी महिला ने कहा कि जिस बेटे को उसके पिता ने इस काबिल बनाया कि वह समाज में एक नाम कमाने में सफल रहा। वह ही पत्नी और सास की बातों में ऐसे फंसा की पिता की मौत के एक महीने में उसने मुझे समझने के बजाए दिन रात प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कहा कि बहू को केवल एक मांग है कि वह अपने पति बच्चों के साथ अलग रहे, बल्कि मेरा कहना है कि इस विषम परिस्थिति में परिवार को एक साथ रहने की जरूरत है। इसी तरह से एक दूसरा मामला भी रतनपुरा ब्लॉक के हलधरपुर का आया। इसमें महिला ने आरोप लगाया था कि पति उसे साथ रखने को तैयार नहीं है। जबकि पति का आरोप था कि पत्नी की मनमानी और सोशल मीडिया पर अति सक्रियता के चलते वह तंग आ चुका है। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि महिला के पिता ने दामाद के पक्ष में गवाही देते हुए उसे सही बताया। पिता ने बताया कि बेटी के मनमानी के चलते वर्षों से अपनी इज्जत गवां रहा है। इस दौरान तीन मामलों में मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय सदस्यों ने लिया, जबकि 58 मामलों में सुनवाई की अगली तारीख तय की गई। मामलों के निस्तारण में पदाधिकारी अर्चना उपाध्याय, सर्वेश दूबे, शाहिद पैरिस, मौलवी अरशद शामिल रहे।
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सास की दखलांदाजी तोड़ रही है बेटियों का घर
महिला एच्छिक ब्यूरो की सदस्य अर्चना उपाध्याय ने बताया कि बेटियों के गृहस्थ जीवन में मायके का अत्यधिक दखल घरों में दरार डाल रहा है। हर छोटी-छोटी बातों को लेकर मायके वालों की दखलांदाजी पतियों और उनके परिजनों को रास नहीं आती। यही कारण है कि कई केसों में पति-पत्नी के बीच न केवल मतभेद हुए, बल्कि तलाक की भी नौबत आ चुकी है। दंपती में छोटी-छोटी बातों पर कलह शुरू होती है। फिर माता-पिता, सास ससुर और दूसरों का हस्तक्षेप मामले को और बिगाड़ देता है। आजकल बेटियां हर बात मायके में बताती हैं, जो कई बार पति को अच्छी नहीं लगती। ऐसे में मायके का दखल निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। बेटी और दामाद दोनों की बात सुनकर फैसला करें।
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काउंसिलिंग से रिश्ते जुड़ भी रहे
एसपी इलामारन जी ने बताया कि पति-पत्नी के आपसी तनाव, गलत फहमियों और घरेलू विवादों के कारण टूटते रिश्तों को सहेजने में ऐच्छिक ब्यूरो के सदस्य अहम भूमिका निभा रहे हैं। संवेदनशील मामलों में संवाद और काउंसिलिंग के जरिये परिवारों को एकजुट रखने का काम केंद्र कर रहा है। छह माह में 78 दंपती जो कि अलग रह रहे थे, वह बेहतर काउसिलिंग के बाद फिर से साथ रहने को तैयार हुए हैं। समय रहते उचित मार्गदर्शन मिलने पर रिश्तों में आई दरार को पाटा जा सकता है। संगठित तरीके से हो रही पहल ने कई टूटते घरों को नया जीवन दिया है।