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Mau News: बिना इलाज सुपोषित हो जा रहे हैं सैकड़ों अतिकुपोषित बच्चे

Sun, 01 Oct 2023 10:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 Oct 2023 10:21 PM IST
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Hundreds of severely malnourished children are becoming well-nourished without treatment.
मऊ। जिले में अतिकुपोषित बच्चे बिना पोषण पुनर्वास केंद्र गए बिना ही ठीक हो जा रहे है। हर वर्ष यह संख्या सैकड़ों में है। वर्तमान आंकड़े के अनुसार जिले में अगस्त माह तक 4481 बच्चे अतिकुपोषित है। जबकि पिछले अगस्त माह में 17 बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होकर सुपोषित हुए। जबकि अगस्त में विभाग द्वारा 53 अतिकुपोषित बच्चे सुपोषित होना का दावा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा किया गया। यह आंकड़ा हर वर्ष सैकड़ों में होता है। वहीं दस बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में यह संख्या उससे कहीं कम होती है।
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जिला अस्पताल में अतिकुपोषित बच्चों के लिए उपचार के लिए दस बेड का पोषण पुर्नवास केंद्र -न्यूट्रीशन रिहैबिलिटेशन सेंटर - वर्ष 2016 से संचालित हो रहा है। वर्तमान में एनआरसी में तीन अतिकुपोषित बच्चे दस माह का अमलखन पुत्र मिंटू तो चार वर्ष का रामू पुत्र जगदीश और तीन माह का अंश पुत्र राजू भर्ती है। शनिवार तक इस माह में इस केंद्र में 20 बच्चे भर्ती होकर सुपोषित हो चुके हैं। एनआरसी के प्रभारी डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि 2016 से संचालित एनआरसी में अब तक 923 अतिकुपोषित बच्चे भर्ती हुए, जिसमें 743 ने पूरा उपचार कराकर स्वस्थ होकर घर गए। बताया कि वर्तमान माह में 20 तो बीते अगस्त में 17 और बीते जुलाई में 17 बच्चे सुपोषित हुए। वहीं, दूसरी ओर बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग का आंकड़ा कुछ ओर ही बयां कर रहा है। यहां बीते जून में जिले में 3924 अतिकुपोषित बच्चे दर्ज हुए दिखाए गए, जबकि अगले माह यानी जुलाई में यह आंकड़ा 4534 हो गया और वहीं अगस्त में यह आंकड़ा 4481 पहुंच गया। वहीं बीते वर्ष के आंकड़े की बात करें तो 2021 में अतिकुपोषित बच्चों का आंकड़ा 3864 था, जो 2022 में घटकर 2694 हो गया। यानी एक वर्ष में 1170 बच्चे सुपोषित हुए। दूसरी ओर जिला अस्पताल के एनआरसी के आंकड़े देखे तो यहां अप्रैल 2020 से 2021 तक 29 अतिकुपोषित बच्चे भर्ती हुए, जिनमें 24 ठीक होकर लौटे। अप्रैल 2021 से 2022 तक 43 बच्चे भर्ती हुए। इसमें 35 स्वास्थ्य होकर लौटे। वहीं, अप्रैल 2022 से 2023 अप्रैल तक 162 बच्चों में 129 सुपोषित हुए। वहीं, अप्रैल 2023 से 26 सितंबर तक 105 भर्ती बच्चों में 73 स्वास्थ्य हुए। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना एनआरसी गए अतिकुपोषित कैसे स्वस्थ हो जा रहे हैं, क्या केवल आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित होने वाले पोषण से यह संभव हो पा रहा है। यह केवल कागजों पर ही अतिकुपोेषित बच्चों को दर्ज दिखाने का खेल चल रहा है।
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बिना उपचार कराए लौट रहे है अभिभावक
मऊ। एनआरसी में एक अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका उपचार किया जाता है, लेकिन बच्चे के साथ रहने वाले कई अटेंडर यह कोर्स पूरा करने से पहले चले जाते हैं। बीते अप्रैल से 26 सितंबर तक ही भले ही 105 बच्चे आए, लेकिन इसमें सुपोषित हुए बच्चों की संख्या 73 थी। यानी 32 बच्चों के अभिभावक बिना पूरा उपचार कराए ही घर लौट गए। वहीं 2016 से 26 सितंबर तक 923 अतिकुपोषित बच्चे भर्ती हुए, जिसमें 743 ने पूरा उपचार कराकर स्वस्थ होकर घर गए। लेकिन 180 बच्चों को पूरा उपचार कराए बिना ही अभिभावक लेते गए। इसके पीछे अभिभावक मजदूर वर्ग होने के चलते कामकाज प्रभावित होने का तर्क देते हैं।
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कुपोषण दूर करने की जिम्मेदारी दो विभागों की
मऊ। जिले में कुपोषण दूर करने को लेकर बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के साथ स्वास्थ्य विभाग की भी जिम्मेदारी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के नौ ब्लाक पर आरबीएसके टीम बनाई गई है। हर ब्लाक पर इसके लिए दो दो टीमें बनी है। लेकिन हजारों अतिकुपोषित बच्चों होने के बाद बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के पर्यवेक्षकों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तो स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके टीम को अतिकुपोषित बच्चों को खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।


अतिकुपोषित बच्चों को चिहिन्त करने के लिए तीन श्रेणी तय की गई है। बेहद कुपोषित बच्चों को जब मेडिकल टीम द्वारा अस्वस्थ पाया जाता है तो उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। अन्य बच्चों को एएनएम सेंटर से मिलनी वाली दवाइयां तथा कई परिवारों को साफ-सफाई तथा पोषण के प्रति जागरूक कर इसे दूर किया जा रहा है। - अजीत सिंह, कार्यक्रम अधिकारी
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