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कैसे मिले जिले में आयुर्वेद विधा से इलाज, जब अधिकांश अस्पतालों में है ही नहीं डाक्टर

Fri, 24 Dec 2021 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 24 Dec 2021 12:06 AM IST
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How to get treatment by Ayurveda mode in the district, when most of the hospitals do not have doctors
मऊ। कोरोना संक्रमण काल में आयुष के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। इसको देखते हुए आयुष चिकित्सा पद्धति को सरकार ने बढ़ावा देने का काम भी किया, लेकिन जिले में आयुर्वेद चिकित्सा की दशा बहुत दयनीय है। इसके पीछे वजह है संचालित आयुर्वेद अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी। इसके अलावा दूसरी सुविधाओं का अभाव भी इसमें एक रोड़ा बन रहा है। ऐसे में दिन प्रतिदिन इस विधा के संचालित अस्पतालों की दशा दयनीय होती जा रही है।
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हालात यह है कि चार तहसील के नौ ब्लॉकों में 35 अस्पतालों में सृजित पदों की तुलना में न तो डॉक्टर हैं और न ही कर्मचारी, अधिकांश अस्पताल तो किराए के भवनों और ग्राम पंचायतों की अनुकंपा पर मिले भवनों में संचालित है। यहां तक कि विभाग के अफसरों को वाहन तक मुहैया नहीं कराया गया, ताकि वे अस्पतालों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर सकें।
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जनपद की करीब 25 लाख की आबादी को आयुर्वेद विधा से उपचार मिल सके इसके लिए आयुर्वेद के 29 तथा यूनानी के छह अस्पताल स्थापित है। वर्तमान में आयुर्वेद अस्पतालों में 31 चिकित्सकों के सापेक्ष केवल 15 चिकित्सकों की तैनाती है। जबकि छह यूनानी चिकित्सक के सापेक्ष तीन चिकित्सक है। यानी तीन यूनानी अस्पताल बिना चिकित्सक तथा कई आयुर्वेद अस्पताल चिकित्सक विहिन है। ऐसे में इन अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को उपचार फार्मासिस्ट या दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे हो रहा है। इतना ही नहीं जिम्मेदारों की काफी समय से उदासीनता के चलते आयुर्वेद के 29 अस्पताल में केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवन में संचालित हो रहा है, बाकी किराए के भवन में संचालित हो रहा।
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जिला मुख्यालय पर इसका ज्वलंत उदाहरण देखा जा सकता है, जहां 15 शैया का बेड वाला आयुर्वेद अस्पताल नगर क्षेत्र के पुरानी तहसील स्थित एक किराए की भवन में दूसरी मंजिल पर संचालित हो रहा है। इस अस्पताल में काफी समय से महिला चिकित्सक की कमी बनी है, लेकिन दशकों बीतने के बाद भी यह कमी दूर नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं कई राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में वार्ड ब्वाय और परिचारकों की संख्या भी कम हो गई है।

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने तथा स्थानांतरण की वजह से अधिकांश पद खाली हो गए हैं। रिक्त पदों करो भरने के लिए आला अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है।
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