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घर-आंगन रोशनी से नहाए
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Sun, 30 Oct 2016 06:56 PM IST
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दीपावली पर नगर क्षेत्र के सहादतपुरा में प्रतिष्ठानों की हुई आकर्षक झालरों से सजावट।
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संपन्नता और खुशहाली का प्रतीक प्रकाश पर्व दीपावली रविवार को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर एक तरफ जहां पटाखों की गूंज और दीपकों तथा रंग-बिरंगे लाइटों की चकाचौंध से समूचा वातावरण जगमगा उठा। वहीं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और बाजारों में त्योहारों की जबरदस्त चहल पहल नजर आ रही थी।
इस दौरान जगह-जगह माता लक्ष्मी और काली की प्रतिमाओं की पंडालों में हुई भव्य सजावट त्योहारों की रौनक में चार चांद लगाने का काम कर रही थी। मिठाइयों की बिक्री व पटाखों की धूम इस त्योहारों का मुख्य आकर्षण थी। दीपावली पर्व के अवसर पर सुबह से ही बाजारों में गहमागहमी रही। लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों को फूलों की माला और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया। तत्पश्चात लोग आवश्यक सामानों की खरीददारी में लग गए।
व्यवसायिक रूप से खास महत्व रखने वाले इस त्यौहार के मद्देनजर दुकानों पर लोगों को अपना लेनदेन चुकता करते देखा गया। दीपावली पर्व के अवसर पर शाम को लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। लोगों ने हवन पूजन किया। इस दौरान मिठाइयों और पटाखों के तरफ बच्चों का खासा उत्साह रहा। शाम से शुरू हुई आतिशबाजी देर रात तक जारी रही। खासकर पूजा पंडालों पर भव्य सजावट के बीच जमकर आतिशबाजी हुई।
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उल्लेखनीय है कि इस त्यौहार को मनाने के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को राजा बलि के शिकंजे से छुड़ाया था। दूसरी कथा यह है कि इस दिन आकाश गंगा में से देवी लक्ष्मी का अभ्युदय हुआ था। जबकि तीसरी प्रचलित कथा यह है कि राम के वनवास से लौटने के बाद इसी दिन अयोध्यावासियों ने दीपोत्सव मनाया था। दीपावली मनाने के पीछे एक मान्यता यह भी है कि नरक के राजा बलि मृत्युदेव यम ही है। इसीलिए चारों ओर दीप जलाए जाते हैं। ताकि खानदान के पूर्वज प्रकाश देखकर यम से छुटकारा पा सकें।
पर्व की इन्हीं सारी मान्यताओं को देखते हुए दीपावली के मौके पर दीए जलाए गए। साथ ही परंपरा के मुताबिक लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। नदवासराय संवाददाता के अनुसार नदवासराय, भिखारीपुर, देवकली देवलास, आरीपुर, रामपुर कांधी, हांसपुर, सियाबस्ती, भदीड, नसोपुर सहित विभिन्न इलाकों में दीपावली का पर्व उल्लास के बीच मनाया गया। देर रात तक पंडालों में मां लक्ष्मी गणेश का पूजन अर्चन करने के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगी रही।
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इस दौरान जगह-जगह माता लक्ष्मी और काली की प्रतिमाओं की पंडालों में हुई भव्य सजावट त्योहारों की रौनक में चार चांद लगाने का काम कर रही थी। मिठाइयों की बिक्री व पटाखों की धूम इस त्योहारों का मुख्य आकर्षण थी। दीपावली पर्व के अवसर पर सुबह से ही बाजारों में गहमागहमी रही। लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों को फूलों की माला और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया। तत्पश्चात लोग आवश्यक सामानों की खरीददारी में लग गए।
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व्यवसायिक रूप से खास महत्व रखने वाले इस त्यौहार के मद्देनजर दुकानों पर लोगों को अपना लेनदेन चुकता करते देखा गया। दीपावली पर्व के अवसर पर शाम को लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। लोगों ने हवन पूजन किया। इस दौरान मिठाइयों और पटाखों के तरफ बच्चों का खासा उत्साह रहा। शाम से शुरू हुई आतिशबाजी देर रात तक जारी रही। खासकर पूजा पंडालों पर भव्य सजावट के बीच जमकर आतिशबाजी हुई।
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उल्लेखनीय है कि इस त्यौहार को मनाने के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को राजा बलि के शिकंजे से छुड़ाया था। दूसरी कथा यह है कि इस दिन आकाश गंगा में से देवी लक्ष्मी का अभ्युदय हुआ था। जबकि तीसरी प्रचलित कथा यह है कि राम के वनवास से लौटने के बाद इसी दिन अयोध्यावासियों ने दीपोत्सव मनाया था। दीपावली मनाने के पीछे एक मान्यता यह भी है कि नरक के राजा बलि मृत्युदेव यम ही है। इसीलिए चारों ओर दीप जलाए जाते हैं। ताकि खानदान के पूर्वज प्रकाश देखकर यम से छुटकारा पा सकें।
पर्व की इन्हीं सारी मान्यताओं को देखते हुए दीपावली के मौके पर दीए जलाए गए। साथ ही परंपरा के मुताबिक लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। नदवासराय संवाददाता के अनुसार नदवासराय, भिखारीपुर, देवकली देवलास, आरीपुर, रामपुर कांधी, हांसपुर, सियाबस्ती, भदीड, नसोपुर सहित विभिन्न इलाकों में दीपावली का पर्व उल्लास के बीच मनाया गया। देर रात तक पंडालों में मां लक्ष्मी गणेश का पूजन अर्चन करने के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगी रही।