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भागवत कथा से मन की शुदि्ध
mau news
Updated Wed, 27 Dec 2017 11:46 PM IST
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प्रवचन करते मणिदास।
श्री महाबीर जी सेवा समिति के तत्वाधान में नगर क्षेत्र के हनमान नगर भीटी में चल रहे अष्टोत्तर रुद्राभिषेक एवं भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार की सुबह पुरोहित अंबिका प्रसाद तिवारी ने रुद्राभिषेक कराया।
इस दौरान डनहोंने श्रद्घालुओं से बताया कि कलियुग में पार्थिव शिवलिंग ही श्रेष्ठ माना गया है, जिसके पूजन से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
शाम को श्रीमदभागवत कथा में उपस्थित श्रद्घालुओं को अयोध्या से आए हुए मणिराम दास ने प्रवचन के माध्यम से थक्तिसर का पान कराया। उन्होंने बताया कि कथा की सार्थकता की सिद्घि दैनिक जीवन में आत्मसात करने से होती है, भगवान का स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय बनाकर कल्याण की कामना करनी चाहिए। अन्यथा कथा केवल कानों के मनोरंजन के रुप में ही रह जाती है। बताया कि भागवत कथा के श्रवण से मन का शुद्घिकरण होता है। शिव पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सती के वियोग में शिव जी की दशा दयनीय हो गई। सती ने भी शरीर का त्याग करते हुए संकल्प लिया था कि अगले जन्म में राजा हिमालय के पुत्री के रुप में जन्म लेकर पुन: शिव की अर्धांगिनी बनुंगी। दूसरे जन्म में नारद ने हिमालय को पार्वती को जगदंबा का स्वरुप बताते हुए पार्वती का विवाह शिव से करने का आग्रह किया। शिव विवाह प्रसंग की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर ऋषिकेश पांडेय, अमरनाथ मिश्र, राम अवध सिंह, संजय राय, रमेश सोनकर, रिंकु राय, अखिलेश, राधेश्याम जायसवाल, संदीप शर्मा आदि रहे।
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, विपिन, धर्मेंद्र, धीरज आदि रहे।
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इस दौरान डनहोंने श्रद्घालुओं से बताया कि कलियुग में पार्थिव शिवलिंग ही श्रेष्ठ माना गया है, जिसके पूजन से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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शाम को श्रीमदभागवत कथा में उपस्थित श्रद्घालुओं को अयोध्या से आए हुए मणिराम दास ने प्रवचन के माध्यम से थक्तिसर का पान कराया। उन्होंने बताया कि कथा की सार्थकता की सिद्घि दैनिक जीवन में आत्मसात करने से होती है, भगवान का स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय बनाकर कल्याण की कामना करनी चाहिए। अन्यथा कथा केवल कानों के मनोरंजन के रुप में ही रह जाती है। बताया कि भागवत कथा के श्रवण से मन का शुद्घिकरण होता है। शिव पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सती के वियोग में शिव जी की दशा दयनीय हो गई। सती ने भी शरीर का त्याग करते हुए संकल्प लिया था कि अगले जन्म में राजा हिमालय के पुत्री के रुप में जन्म लेकर पुन: शिव की अर्धांगिनी बनुंगी। दूसरे जन्म में नारद ने हिमालय को पार्वती को जगदंबा का स्वरुप बताते हुए पार्वती का विवाह शिव से करने का आग्रह किया। शिव विवाह प्रसंग की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर ऋषिकेश पांडेय, अमरनाथ मिश्र, राम अवध सिंह, संजय राय, रमेश सोनकर, रिंकु राय, अखिलेश, राधेश्याम जायसवाल, संदीप शर्मा आदि रहे।
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