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नहीं सुधरने की जैैैसे खा रखी है कसम
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 30 Jun 2016 11:17 PM IST
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रेलवे स्टेशन के आरक्षण कक्ष में खराब पड़ी डिसप्ले स्क्रीन।
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रेलवे कर्मचारियों ने मानो न सुधरने की कसम खा ली है। कंप्यूटरीकृत आरक्षण केंद्र के हाल में लगे पंखे चलाना ही जिम्मेदार कर्मचारी भूल गए थे। काउंटर पर टिकट लेने के लिए खडे़ लोग भीषण गर्मी में पसीने से तरबतर रहे। सुबह दस बजे तक हाल में लगे आठ रूफ फैन और दो वाल फैन बंद रहे। एक व्यक्ति के कहने पर एक कर्मचारी ने कहा कि यह काम इलेक्ट्रिकल वालों का है, वे ही जानें। दो घंटे बाद लौटकर आने पर भी आरक्षण केंद्र के हाल की पंखे नहीं चल रहे थे। टीम ने आरक्षण लिपिक से कहकर उन पंखों को चलवाया।
अमर उजाला की टीम जब सुबह आठ बजे रेलवे स्टेशन पहुंची तो मेन गेट के सामने काफी संख्या में मोटरसाइकिलें पहले के ही दिनों की तरह खड़ी दिखीं। 8:05 बजे कंप्यूटरीकृत रेलवे टिकट आरक्षण केंद्र पहुंचने पर देखा कि हाल में लगे छत के आठ पंखे और दो वालफैन बंद हैं। सामान्य रूप से चलने वाले दो काउंटरों में से एक पर कोई लिपिक नहीं था। ट्रेनों की लोकेशन दर्शाने वाला डिस्पले बोर्ड खराब था। प्लेटफार्म नंबर एक पर लगे दो खराब शीतल पेय सिस्टम में से एक की मरम्मत कर दी गई थी। कूड़ेदानों में कूड़े पहले की ही तरह भरे रहे। प्लेटफार्म नंबर तीन पर लगे पंखों की मरम्मत कुछ कर्मचारी करते दिखे।
ऊपरी मंजिल पर स्थित डारमेट्री में ताला बंद था। ताला खुलवाकर अंदर जाने पर मेजों पर धूल की मोटी परत पड़ी दिखी। लग रहा था कि कई दिनों से सफाई नहीं हुई थी। बिस्तरों पर भी धूल पड़ी हुई थी। ऐसा लगा रहा था कि कई दिनों से एक भी यात्री हाल में ठहरा नहीं था। महिला डारमेट्री का भी यही हाल रहा। विश्रामालय नंबर 1 और अधिकारी विश्रामालय में ताले लटक रहे थे। अपर क्लास वेटिंग रूम में अपेक्षित साफ सफाई नहीं रही। इसके साथ ही वहां साउंड सिस्टम नहीं था।
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अमर उजाला की टीम जब सुबह आठ बजे रेलवे स्टेशन पहुंची तो मेन गेट के सामने काफी संख्या में मोटरसाइकिलें पहले के ही दिनों की तरह खड़ी दिखीं। 8:05 बजे कंप्यूटरीकृत रेलवे टिकट आरक्षण केंद्र पहुंचने पर देखा कि हाल में लगे छत के आठ पंखे और दो वालफैन बंद हैं। सामान्य रूप से चलने वाले दो काउंटरों में से एक पर कोई लिपिक नहीं था। ट्रेनों की लोकेशन दर्शाने वाला डिस्पले बोर्ड खराब था। प्लेटफार्म नंबर एक पर लगे दो खराब शीतल पेय सिस्टम में से एक की मरम्मत कर दी गई थी। कूड़ेदानों में कूड़े पहले की ही तरह भरे रहे। प्लेटफार्म नंबर तीन पर लगे पंखों की मरम्मत कुछ कर्मचारी करते दिखे।
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ऊपरी मंजिल पर स्थित डारमेट्री में ताला बंद था। ताला खुलवाकर अंदर जाने पर मेजों पर धूल की मोटी परत पड़ी दिखी। लग रहा था कि कई दिनों से सफाई नहीं हुई थी। बिस्तरों पर भी धूल पड़ी हुई थी। ऐसा लगा रहा था कि कई दिनों से एक भी यात्री हाल में ठहरा नहीं था। महिला डारमेट्री का भी यही हाल रहा। विश्रामालय नंबर 1 और अधिकारी विश्रामालय में ताले लटक रहे थे। अपर क्लास वेटिंग रूम में अपेक्षित साफ सफाई नहीं रही। इसके साथ ही वहां साउंड सिस्टम नहीं था।
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