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बाढ़ : आबादी के हिसाब से नाव ही नहीं, ग्रामीणाें को लेकर प्रशासन चितिंत

Thu, 19 Sep 2024 12:41 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2024 12:41 AM IST
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Flood: Not only boats according to population, administration worried about villagers
सरयू नदी का रौद्र रूप जिले के मधुबन तहसील के देवारांचल इलाकों में देखने को मिल रहा है। बुधवार को सरयू नदी का इस क्षेत्र में जलस्तर 66.44 सेंटीमीटर है, जो कि खतरा बिंदू से 13 सेंटीमीटर ज्यादा है। ऐसे में बीस से ज्यादा गांवों को नदी के जलस्तर ने अपने जद में लेकर इन गांवों को टापू में तब्दील कर दिया है। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को चार गांवों में पड़ताल कर यहां रह रहे लोगों से मुख्य समस्याओं के बारे में जानने की कोशिश की।
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इस दौरान ग्रामीणों से बातचीत के दौरान पता चला कि कई जगहों पर नाव की सुविधा नहीं है, जहां हैं वहां भी आबादी के हिसाब से अपर्याप्त है। वहीं ग्रामीणों को अपनों के साथ अपने पाले हुए मवेशियों के जीवन को लेकर चिंता है। दरअसल पूरी फसल पानी में डूबे होने के चलते चारा लाने के लिए ग्रामीणों को पांच से दस किमी दूर जाना पड़ रहा है। वहीं ग्रामीणों पर प्रशासन का ध्यान है, लेकिन मवेशियों के चारा को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
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सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहने से घोसी और मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा इलाकाें के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। बीते 45 दिन में छठवीं बार सरयू में जलस्तर खतरा बिंदु से ऊपर पहुंचने से देवारा इलाके के 18 संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। 20 से अधिक गांव नदी के घेरे में आ गए हैं। जलस्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा असर बिंदटोलिया की नई बस्ती ,बइरकंटा, धूस, चक्कामूसाडोही के चारों तरफ पानी भरने से यह गांव चारों टापू में तब्दील हो गए हैं। इन गांवों की स्थिति यह है कि उनके संपर्क मार्ग पर चार से पांच फीट तक पानी भर चुका है।
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ग्रामीण शैलेंद्र ने बताया कि धूंस में 100 से ज्यादा घर है, लेकिन यहां नाव की सुविधा नहीं है। बताया कि अधिकांश ग्रामीण दूध बेचने का कारोबार करते हैं, ऐसे में नाव न होने से उन्हें दूध पहुंचाने में सबसे ज्यादा समस्या हो रही है।
पृथ्वी राज, पूरन ने बताया कि आबादी के हिसाब से नाव केवल ही हर पुरवा पर लगाया जा रहा है, जबकि किसी भी पुरवे में 50 से कम घर नहीं है, जो नाव भी लगाई जा रही है वह मझोली साइज की होने से उनकी अधिकतम क्षमता पांच से छह लोगों की है।

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संपर्क मार्गों पर पहुंचीं सरयू

सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से दुबारी, बइकंटा, भगतका पुरा, विशुन का पुरा, सुन्नर का पुरवा, चक्कीमूसाडोही, बरोहा, कुंवरपुरवा, धुस, नकीहवा के सभी संपर्क मार्ग डूब चुके हैं। वहीं हरीलाल का पुरवा का संपर्क मार्ग तो पुरी तरह से कट गया है। ऐसे में नाव ही आवाजाही के लिए ग्रामीणों का सहारा बन रही है। बिजली की समस्या भी ग्रामीणों को परेशान कर रही है। रात के समय बिजली कटौती के चलते ग्रामीण रातजगा कर अपने घरों की सुरक्षा कर रहे हैं। दरअसल पानी बढ़ने से सांप बिच्छु ज्यादा निकल रहे है।
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