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विकसित बीज का प्रयोग करें किसान : डॉ. अन्नामलै
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्था के तत्वावधान में
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान कुशमौर में पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह का शनिवार को किया गया।
निदेशक डॉ. अन्नामलै आनंदन के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण, सारण, बिहार से प्रायोजित था। कुल 20 किसानों ने गेहूं में प्रमाणिक बीज उत्पादन विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
निदेशक ने कहा कि अच्छे उत्पादन के लिए किसानों को दस वर्ष के भीतर विकसित किए गये बीजों को ही अपने खेती में प्रयोग लाना चाहिए। उन्होंने किसानों के बाढ़ ग्रसित क्षेत्र में धान न उपजा पाने की समस्या का निदान करते हुए गहरे पानी में उपजने वाले उन्नत धान के बीजों से किसानों को अवगत कराया।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे अनुभव को अपने परिचितों और मित्रों से साझा कर बीज उत्पादन के तकनीकों का प्रसार करें। इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कल्याणी कुमारी, वैज्ञानिक डॉ. पवित्रा वी के, वरिष्ठ तकनीशियन कुमारी निशा और संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
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निदेशक डॉ. अन्नामलै आनंदन के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण, सारण, बिहार से प्रायोजित था। कुल 20 किसानों ने गेहूं में प्रमाणिक बीज उत्पादन विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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निदेशक ने कहा कि अच्छे उत्पादन के लिए किसानों को दस वर्ष के भीतर विकसित किए गये बीजों को ही अपने खेती में प्रयोग लाना चाहिए। उन्होंने किसानों के बाढ़ ग्रसित क्षेत्र में धान न उपजा पाने की समस्या का निदान करते हुए गहरे पानी में उपजने वाले उन्नत धान के बीजों से किसानों को अवगत कराया।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे अनुभव को अपने परिचितों और मित्रों से साझा कर बीज उत्पादन के तकनीकों का प्रसार करें। इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कल्याणी कुमारी, वैज्ञानिक डॉ. पवित्रा वी के, वरिष्ठ तकनीशियन कुमारी निशा और संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।