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‘किसानों की जिम्मेदारी उठाने से बच रहीं सरकारें’
BEARU, AMAR UJALA, MAU
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:24 PM IST
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घोसी में उत्तर प्रदेश किसान सभा की जागरण यात्रा के समापन पर प्रेसवार्ता को संबोधित करते पूर्व विधायक और यात्रा के संयोजक राजेन्द्र यादव।
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पूर्व विधायक व किसान जागरण यात्रा के प्रभारी राजेंद्र यादव ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर केंद्र और प्रदेश की सरकारें एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रही हैं। इसका उदाहरण खरीफ फसल में मुआवजा बांटने को लेकर है। दोनों एक दूसरे पर दोषारोपण कर रही हैं। कहा कि 20 मई को यात्रा के लखनऊ पहुंचने पर विशाल धरना-प्रदर्शन कर किसान अपनी एकता का प्रदर्शन करेंगे।
पूर्व विधायक राजेंद्र यादव घोसी में अतुल कुमार अंजान के आवास पर पत्रकार वार्ता को संबधित कर रहे थे। कहा कि किसानसभा किसानों का संगठन है। हम केवल किसानों के हित के लिए लड़ते हैं। किसान आंदोलन को कमजोर करने में जाति और धर्म की राजनीति बहुत हद तक जिम्मेदार है।
किसान जबतक जाति धर्म से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक उसका भला नहीं होगा। इसी तरह से 2 दिसंबर को सभी मजदूर संगठन यहां तक भारतीय मजदूर संघ ने भी हड़ताल में भाग लिया और सरकार को झुकना पड़ा।
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किसान सभा की लड़ाई नहरों में पानी, अलग से किसान बजट, किसान आयोग, कर्ज माफ़ी आदि की है। इसको लेकर सभी को हमारा साथ देना चाहिये। कहा कि कितने दु:ख की बात है कि छोटे से छोटा दूकानदार भी महंगाई के अनुसार अपने सामान का मूल्य तय करता है। लेकिन दु:ख की बात है की सबका पेट भरने वाले किसान के उपज का मूल्य वह नहीं सरकार तय करती है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर 20 मई को जागरण यात्रा लखनऊ पहुंचेगी। विधानसभा का घेराव कर सरकार को चेताया जाएगा। सबसे अपील की कि जाति, धर्म, दलगत राजनीति से उठकर लखनऊ पहुंचे।
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पूर्व विधायक राजेंद्र यादव घोसी में अतुल कुमार अंजान के आवास पर पत्रकार वार्ता को संबधित कर रहे थे। कहा कि किसानसभा किसानों का संगठन है। हम केवल किसानों के हित के लिए लड़ते हैं। किसान आंदोलन को कमजोर करने में जाति और धर्म की राजनीति बहुत हद तक जिम्मेदार है।
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किसान जबतक जाति धर्म से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक उसका भला नहीं होगा। इसी तरह से 2 दिसंबर को सभी मजदूर संगठन यहां तक भारतीय मजदूर संघ ने भी हड़ताल में भाग लिया और सरकार को झुकना पड़ा।
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किसान सभा की लड़ाई नहरों में पानी, अलग से किसान बजट, किसान आयोग, कर्ज माफ़ी आदि की है। इसको लेकर सभी को हमारा साथ देना चाहिये। कहा कि कितने दु:ख की बात है कि छोटे से छोटा दूकानदार भी महंगाई के अनुसार अपने सामान का मूल्य तय करता है। लेकिन दु:ख की बात है की सबका पेट भरने वाले किसान के उपज का मूल्य वह नहीं सरकार तय करती है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर 20 मई को जागरण यात्रा लखनऊ पहुंचेगी। विधानसभा का घेराव कर सरकार को चेताया जाएगा। सबसे अपील की कि जाति, धर्म, दलगत राजनीति से उठकर लखनऊ पहुंचे।