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सड़क की पटरियों पर अतिक्रमण
mau news
Updated Sun, 28 Jan 2018 11:59 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
मऊ।
पटरी दुकानदारों को स्थापित करने के लिए शासन से जारी फरमान के करीब एक वर्ष होने जा रहा है, लेकिन नगर क्षेत्र में इस आदेश का असर नहीं दिख रहा। लिहाजा पूरा नगर क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है, इसका परिणाम है कि नगर क्षेत्र के एक छोर से दूसरे छोर जाने के दौरान लोगों को एक बार सोचना पड़ता है। जबकि नगर पालिका की माने तो पटरी दुकानदारों को स्थापित करने की कवायद लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द की इसे अमली जामा पहनाया जाएगा।
मऊ शहर दस किमी की रेडियस में फैला है, लेकिन आजमगढ़ से आने के दौरान मिर्जाहादी का पुरा बाजार और वाराणसी से आने के दौरान गाजीपुर तिराहा तो गोरखपुर और बलिया से आने पर भीटी चौक से होकर गुजरना लोगों की मजबूरी है। ऐसे में इन सभी चौराहों और बाजारों से गुजरना नाकों चने चबाने से कम नहीं है।
यही नहीं नगर मिर्जाहादी का पुरा, भीटी चौक या फिर आजमगढ़ मोड़ से यदि शहर में जाया जाय तो शायद ही कोई ऐसा स्थान होगा, जहां अतिक्रमण न हो, सड़क की पटरी तो ठेला, खोमचा लगाने वालों से भरा पड़ा है, रोडवेज पर रोडवेज की बसें सड़क पर खड़ी होती है। बाल निकेतन फाटक को पार करने पर तो हद ही हो जाती है।
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यहां पर मुंबई की तर्ज पर पटरी को खरीदने बेचने का धंधा दुकानदार करते है।
इस सब की मार राहगीरों को उठानी पड़ती है, खास तौर से यदि कोई व्यक्ति इमरजेंसी मरीज को ले कर जल्दी से डाक्टर के पास जाना चाहे तो मुुमकिन नहीं है। पूरी समस्याओं को जानकर नगर पालिका जानबूझकर अनजान है।
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मऊ।
पटरी दुकानदारों को स्थापित करने के लिए शासन से जारी फरमान के करीब एक वर्ष होने जा रहा है, लेकिन नगर क्षेत्र में इस आदेश का असर नहीं दिख रहा। लिहाजा पूरा नगर क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है, इसका परिणाम है कि नगर क्षेत्र के एक छोर से दूसरे छोर जाने के दौरान लोगों को एक बार सोचना पड़ता है। जबकि नगर पालिका की माने तो पटरी दुकानदारों को स्थापित करने की कवायद लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द की इसे अमली जामा पहनाया जाएगा।
मऊ शहर दस किमी की रेडियस में फैला है, लेकिन आजमगढ़ से आने के दौरान मिर्जाहादी का पुरा बाजार और वाराणसी से आने के दौरान गाजीपुर तिराहा तो गोरखपुर और बलिया से आने पर भीटी चौक से होकर गुजरना लोगों की मजबूरी है। ऐसे में इन सभी चौराहों और बाजारों से गुजरना नाकों चने चबाने से कम नहीं है।
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यही नहीं नगर मिर्जाहादी का पुरा, भीटी चौक या फिर आजमगढ़ मोड़ से यदि शहर में जाया जाय तो शायद ही कोई ऐसा स्थान होगा, जहां अतिक्रमण न हो, सड़क की पटरी तो ठेला, खोमचा लगाने वालों से भरा पड़ा है, रोडवेज पर रोडवेज की बसें सड़क पर खड़ी होती है। बाल निकेतन फाटक को पार करने पर तो हद ही हो जाती है।
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यहां पर मुंबई की तर्ज पर पटरी को खरीदने बेचने का धंधा दुकानदार करते है।
इस सब की मार राहगीरों को उठानी पड़ती है, खास तौर से यदि कोई व्यक्ति इमरजेंसी मरीज को ले कर जल्दी से डाक्टर के पास जाना चाहे तो मुुमकिन नहीं है। पूरी समस्याओं को जानकर नगर पालिका जानबूझकर अनजान है।