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अस्पताल में जांच टीम के सामने कमियां छिपाने लगे कर्मचारी

Wed, 24 Nov 2021 10:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Nov 2021 10:18 PM IST
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Employees started hiding shortcomings in front of the investigation team in the hospital
मऊ। कायाकल्प अवॉर्ड योजना के तहत तीन सदस्यीय टीम ने बुधवार को जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। दो घंटे तक जांच टीम ने ओपीडी, वार्ड में अवॉर्ड योजना के तहत निर्धारित बिंदुओं का बारीकी से निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट तैयार की। इससे पहले टीम के निरीक्षण को देखते हुए सुबह से ही अस्पताल प्रबंधन साफ सफाई व्यवस्था से लेकर दूसरी खामियों को छुपाने में जुटे रहे। उधर जिला अस्पताल में टीम के निरीक्षण के बाद भी खामिया जस की तस दिखी। ओपीडी वार्ड में जहां दीवारों पर पान तथा गुटखा की पीक दिखी तो परिसर में अवैध रूप से कई बाइक खड़ी दिखी।
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राज्य स्तरीय टीम में शामिल डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. जसवंत मल्ल, डॉ. रोहित कुमार की टीम बुधवार को जिला महिला अस्पताल पहुंची।टीम ने अस्पताल में साफ-सफाई, चिकित्सीय कचरा निस्तारण, संक्रमण नियंत्रण, संचालित सहयोगी सेवाएं, स्वच्छता को बढ़ावा देना, परिसर के आसपास का क्षेत्र और पर्यावरण अनुकूल क्रियाकलाप के बिंदुओं का निरीक्षण किया। टीम ने पैथोलॉजी, ओपीडी, लेबर रूम, ऑपरेशन थियेटर, नवजात शिशु चिकित्सा यूनिट, किचन, चिकित्सालय के आसपास का क्षेत्र, टंकियों की साफ सफाई और पत्रावलियों का रखरखाव को भी देखा। इस दौरान टीम ने मरीजों से भी चिकित्सालय सेवाओं का फीडबैक लिया।
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महिला अस्पताल के क्वालिटी मैनेजर मिथिलेश कुमार ने बताया कि कायाकल्प योजना के तहत तीन चरणों में असेसमेंट किया जाता है। हर चरण में 70 फीसदी से अधिक अंक लाना अनिवार्य है। बताया कि कायाकल्प योजना के तहत तैयारियां पूरी कर ली गई है। उम्मीद है कि इस बार भी अस्पताल को पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2020-21 में अस्पताल कायाकल्प में मंडल में प्रथम स्थान पर था। इस दौरान सीएमएस डॉ. चंद्रा सिन्हा, चीफ फार्मासिस्ट अखिलेश पांडेय, चंद्रमणी त्रिपाठी सहित समस्त अस्पताल स्टॉफ मौजूद रहा।
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चयन के बाद दी जाती है प्रोत्साहन राशि
मऊ। क्वालिटी मैनेजर मिथिलेश कुमार ने बताया कि बेली में कायाकल्प अवार्ड योजना चेकलिस्ट के अनुसार करीब आठ विभागों का असेसमेंट हुआ। उन्होंने बताया कि असेसमेंट की रिपोर्ट जमा होने के बाद भारत सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न मापदंडों पर जांच के बाद लगभग एक से डेढ़ माह में इसका परिणाम घोषित किया जाता है। इसके तहत सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने एवं उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।

फटकार के बाद भी नहीं दुरस्त कर सके अपने खामियां
मऊ। कायाकल्प योजना में टाप रेटिंग में बीते तीन साल से फिसड्डी होने के बाद भी अपनी खामियों को सुधारने की कवायद जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा होती नहीं दिख रही है। अस्पताल प्रबंधन की यह लापरवाही बीते मंगलवार को लखनऊ से आई कायाकल्प योजना के तहत मूल्यांकन करने आई टीम को निरीक्षण के दौरान भी दिखी। पूरे अस्पताल परिसर में गंदगी का आलम के साथ वार्डों में अव्यवस्था दिखी। टीम ने इसको दुरुस्त करने की बात अस्पताल प्रबंधन को कही। बावजूद बुधवार को अमर उजाला की टीम जब जिला अस्पताल पहुंची तो ओपीडी वार्ड में दीवारों पर पान, गुटखा की पीक साफ दिखाई दी। वहीं ओपीडी में एक हिस्से में बड़ी संख्या में बाइक पार्क दिखी।
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