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जिला अस्पताल में गंदगी पर बिफरे मंत्री
ब्यूरो/ अमर उजाला मऊ
Updated Sat, 26 Dec 2015 12:20 AM IST
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प्रदेेेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी शुक्रवार को लगभग 11 बजे जिला अस्पताल पहुंचे और पूरे अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में साफ सफाई का घोर अभाव मिला।
एक मरीज ने सरकारी दवा को बाहर की एक दवा की दूकान से खरीदना बताया। राज्य मंत्री के पहुंचने के 45 मिनट बाद जिला अस्पताल पहुंचे सीएमएस को मंत्री ने जमकर फटकार लगाई।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। वे पीडब्ल्यूडी डाक बंगले से सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। उनके साथ जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव भी थे।
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उस समय स्वयं अस्पताल के सीएमएस डा.एक पांडेय भी मौजूद नहीं थे। राज्य मंत्री ने ओपीडी, इमरजेंसी और वार्डों का सघन निरीक्षण किया। इमरजेंसी के बगल में ओवरफ्लो कर रहे सीवर से आ रही भीषण दुर्गंध देख राज्य मंत्री नाराजगी जताई। वार्डों के सामने बरामदों में काफी गंदगी दिखी, सीढ़ियों पर पान की पीकें और कूड़ों का अंबार लगा मिला। वार्डों में बेडों पर बिछीं चादरें गंदी थीं।
राज्य मंत्री ने वार्डों में भर्ती मरीजों से दवाइयां मिलने की बात पूछा। अधिकांश मरीजों ने दवाइयां मिलने की बात कही। लेकिन एक मरीज के पास सैंपल की दवा देख मंत्री ने पूछा कि यह कहां से मिली तो उसने कह दिया कि अस्पताल के बाहर दवा की दूकान से खरीदी है। मंत्री डीएम को साथ लेकर उसे दवा की दूकान दिखाने ले गए। इस दौरान ओपीडी में सर्जन डॉ. बीबी सिंह का कक्ष बंद देख उन्होंने उनके बारे में पूछा।
उस समय डॉ. बीबी सिंह ओटी में एक मरीज का आपरेशन कर रहे थे। आपरेशन पूरा करने के बाद वे सीधे मंत्री के पास पहुंचे। अस्पताल का मेन स्टोर कक्ष बंद देख वे मिनी ओटी में जाकर दवाइयों का वितरण और स्टाक चेक किए। लगभग पौन घंटे बाद अस्पताल के सीएमएस वहां पहुंचे। उन्हें मंत्री ने जमकर फटकार लगाई।
राज्यमंत्री ने उन्हें कहा कि जब आप स्वयं अस्पताल में नहीं रहेंगे तो दुर्व्यवस्थाएं तो रहेंगी ही। कई सपा नेताओं ने भी सीएमएस की गंभीर शिकायतें कीं। इन लोगों ने कहा कि सीएमएस कभी अस्पताल पर रहते ही नहीं, ये गाजीपुर से ही जिला अस्पताल की व्यवस्था चलाते हैं।
एक मरीज ने शिकायत की कि अस्पताल के एक अस्थि रोग विशेषज्ञ बाजार की महंगी दवाइयां लिखते हैं। इस पर राज्य मंत्री ने गंभीर नाराजगी जताते हुए बाजार की दवाइयां लिखने पर सख्ती से रोक लगाने का निर्देश सीएमएस को दिया।
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एक मरीज ने सरकारी दवा को बाहर की एक दवा की दूकान से खरीदना बताया। राज्य मंत्री के पहुंचने के 45 मिनट बाद जिला अस्पताल पहुंचे सीएमएस को मंत्री ने जमकर फटकार लगाई।
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स्वास्थ्य राज्य मंत्री जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। वे पीडब्ल्यूडी डाक बंगले से सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। उनके साथ जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव भी थे।
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उस समय स्वयं अस्पताल के सीएमएस डा.एक पांडेय भी मौजूद नहीं थे। राज्य मंत्री ने ओपीडी, इमरजेंसी और वार्डों का सघन निरीक्षण किया। इमरजेंसी के बगल में ओवरफ्लो कर रहे सीवर से आ रही भीषण दुर्गंध देख राज्य मंत्री नाराजगी जताई। वार्डों के सामने बरामदों में काफी गंदगी दिखी, सीढ़ियों पर पान की पीकें और कूड़ों का अंबार लगा मिला। वार्डों में बेडों पर बिछीं चादरें गंदी थीं।
राज्य मंत्री ने वार्डों में भर्ती मरीजों से दवाइयां मिलने की बात पूछा। अधिकांश मरीजों ने दवाइयां मिलने की बात कही। लेकिन एक मरीज के पास सैंपल की दवा देख मंत्री ने पूछा कि यह कहां से मिली तो उसने कह दिया कि अस्पताल के बाहर दवा की दूकान से खरीदी है। मंत्री डीएम को साथ लेकर उसे दवा की दूकान दिखाने ले गए। इस दौरान ओपीडी में सर्जन डॉ. बीबी सिंह का कक्ष बंद देख उन्होंने उनके बारे में पूछा।
उस समय डॉ. बीबी सिंह ओटी में एक मरीज का आपरेशन कर रहे थे। आपरेशन पूरा करने के बाद वे सीधे मंत्री के पास पहुंचे। अस्पताल का मेन स्टोर कक्ष बंद देख वे मिनी ओटी में जाकर दवाइयों का वितरण और स्टाक चेक किए। लगभग पौन घंटे बाद अस्पताल के सीएमएस वहां पहुंचे। उन्हें मंत्री ने जमकर फटकार लगाई।
राज्यमंत्री ने उन्हें कहा कि जब आप स्वयं अस्पताल में नहीं रहेंगे तो दुर्व्यवस्थाएं तो रहेंगी ही। कई सपा नेताओं ने भी सीएमएस की गंभीर शिकायतें कीं। इन लोगों ने कहा कि सीएमएस कभी अस्पताल पर रहते ही नहीं, ये गाजीपुर से ही जिला अस्पताल की व्यवस्था चलाते हैं।
एक मरीज ने शिकायत की कि अस्पताल के एक अस्थि रोग विशेषज्ञ बाजार की महंगी दवाइयां लिखते हैं। इस पर राज्य मंत्री ने गंभीर नाराजगी जताते हुए बाजार की दवाइयां लिखने पर सख्ती से रोक लगाने का निर्देश सीएमएस को दिया।