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Mau News: रतनपुरा और बड़ागांव में अंडरपास की स्वीकृति के बाद भी काम शुरू नहीं

Wed, 29 Oct 2025 01:11 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Oct 2025 01:11 AM IST
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Despite approval for underpasses at Ratanpura and Baragaon, work has not yet begun.
- रेलवे ने बंद कर दिया पिपरीडीह, रतनपुरा बाजार, दोहरीघाट के गोंठा लोहारपुरा, बहादुरपुर और घोसी के बड़ागांव की रेलवे क्रॉसिंग
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ/रतनपुरा। तीन रेलखंडों पर अंडरपास नहीं बनने से जिले की चार लाख की आबादी को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए स्थानीय लोगों के धरना प्रदर्शन करने पर रतनपुरा और घोसी के बड़ागांव में अंडरपास की स्वीकृति मिली, कार्यदायी संस्था ने भूमि का सीमांकन भी कर लिया। नक्शा भी तैयार किया जा चुका है, इसके बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है। इंदारा, फेफना रेलमार्ग पर रतनपुरा रेलवे स्टेशन के पूर्वी रेल समपार-23 को चार साल पहले प्लेटफॉर्म विस्तार के लिए बंद कर दिया गया था। इससे इटैली, अतरौल पांडेय, बिसुकिया, कुड़सर, पहदेवाजीत, उमरपुर, नसीराबाद खुर्द सहित 18 ग्राम पंचायत के लोगों का आवागमन प्रभावित है।
पहले गांव के लोग 50 मीटर की दूरी तय करके रतनपुरा बाजार और ब्लॉक मुख्यालय जाते थे अब 3 किमी की अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। अब भी पैदल राहगीर नजदीक होने के चलते प्लेटफॉर्म पार करके आते-जाते हैं। क्षेत्रीय लोगों के प्रदर्शन और पत्रक सौंपने के बाद इस जगह अंडरपास बनाने की स्वीकृति मिल गई। इसकी जिम्मेदारी गति शक्ति कार्यदायी संस्था को दी गई। संस्था के इंजीनियर 23 जून 2024 को रतनपुरा पहुंचकर जमीन का सीमांकन कराए। नक्शा तैयार किया। इसी तरह इंदारा दोहरीघाट रेलमार्ग पर समपार-14सी पर अंडरपास स्वीकृति के एक साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका है। देरी का खामियाजा घोसी नगर पंचायत के बड़ागांव मोहल्ले के साथ ही आसपास के कई ग्राम पंचायतों के हजारों को लोगों को भुगतना पड़ रहा है। रेलवे क्राॅसिंग बंद होने से घोसी आने-जाने में करीब दो किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर बुजुर्ग, छात्र और बीमार लोगों को परेशानी होती है। मजबूरी में लोग रेलवे ट्रैक पार करके आते जाते थे। जब तक अंडरपास का निर्माण नहीं होता, तब तक लोगों के लिए परेशानी बनी रहेगी। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष शमसुल हसन, पूर्व महामंत्री हरिद्वार राय, अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह और नागेंद्र राय के नेतृत्व में घोसी के लोगों का प्रतिनिधिमंडल डीआरएम वाराणसी और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री से मिलकर अंडरपास बनाए जाने की मांग किया। 13 फरवरी 2024 को समपार संख्या 14सी पर अंडरपास बनाए जाने की स्वीकृति दी थी।
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पांच गांव के लोगों ने किया था आम चुना का बहिष्कार
पिपरीडीह। वाराणसी-भटनी रेलखंड पर स्थित पिपरीडीह रेलवे स्टेशन के पास पांच साल पहले रेलवे क्रॉसिंग बंद करने के बाद रेलवे ने उसका विकल्प नहीं सोचा। इससे प्रभावित पिपरीडीह, हासपुर, मड़ैया, फुलवरिया और नई बस्ती के लोगों ने नाराज होकर आम चुनाव 2024 का बहिष्कार किया था। जबकि प्रभावित खरगजेपुर, पतिला, ताजपुर भार, गढ़ीया सहित 15 ग्राम पंचायतों में केवल 30 से 40 फीसदी लोगों ने ही मतदान किया था। अंडरपास नहीं बनने से आवाजाही के लिए लोगों को तीन से चार किमी अतिरिक्त की दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे नाराज ग्रामीण डेढ़ साल पहले लगातार पांच माह तक धरने पर बैठे रहे और रेलवे के अधिकारियों की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन पूजन भी किया था।
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पांच किमी दूरी तय कर कृषि मंडी पहुंचते हैं किसान

कुसुम्हा। दोहरीघाट के गोंठा लोहारपुरा और बहादुरपुर में अंग्रेजों ने वर्ष 1901 में रेलवे फाटक बनवाया था। इसे इंदारा दोहरीघाट रेलमार्ग के गेज परिवर्तन के दौरान चार साल पहले बंद कर पटरी बिछा दी गई। इससे ट्रैक के पूर्वी हिस्से के किसानों को गोंठा मंडी और गुड़ मंडी में आने के लिए पांच किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। गोंठा लोहरपुरा के पूर्व दिशा में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल और पश्चिम तरफ रेल पटरी है। बीच में बसिया राम, लोहारपुरा, कुंवारी का पूरा, तिवारी पूरा और गड़ेरी का पूरा है। यहां आने-जाने के लिए फाटक के अलावा कोई रास्ता नहीं था। बीमार होने के बाद 20 मीटर के बजाय एंबुलेंस चार किलोमीटर की दूरी तय करके गांव पहुंचती है। जबकि बहादुरपुर रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से आसपास के किसान कृषि कार्य के लिए रेलवे ट्रैक पार करके आते जाते हैं। अनाज लाने ले जाने के लिए पांच किमी की अतिरिक्त दूरी तय करते हैं। इन दोनों जगहों पर अंडरपास बनाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार धरना भी दिया, लेकिन समाधान नहीं निकला।
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