मऊ । स्वास्थ्य विभाग और नगरपालिका प्रशासन द्वारा डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाने के बजाय खानापूर्ति किया जा रहा है। गांवों में रासायनिक दवाओं का छिड़काव करने का फरमान जारी कर दिया गया है, लेकिन अभी तक रासायनिक दवाओं का छिड़काव शुरू नहीं किया जा सका है। हालत यह है कि लोग बुखार, मलेरिया सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। अधिकारी सब कुछ ओके बताकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया फैलने की आशंका रहती है। डेंगू के मच्छर बारिश के पानी, छतों या कूलर में जमा होने से पैदा होते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के लारवा की जांच करने का अभियान चलाने का फैसला किया था। जिला अस्पताल आने वाले बुखार से ग्रसित मरीजों का फीवर टेस्ट करने के लिए अलग से काउंटर कागज में तो बना दिया गया है। लेकिन कर्मचारी का अता पता नहीं रहता है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आंगनबाड़ी, आशा और एनएम को प्रशिक्षण तो दे दिया गया है। लेकिन कहीं इस पर काम नहीं दिख रहा है। नपा प्रशासन ने अब तक न तो सफाई कराई है और न ही अन्य जरूरी कदम उठाए हैं। नालों में दवाओं का छिड़काव कराने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही है। यही नहीं बारिश के मौसम में पानी भरे रहने से या रुके हुए पानी में मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। उनसे बचाव के लिए मलेरिया ऑयल का छिड़काव किया जाता है। डेंगू का लार्वा नष्ट किया जाता है। जबकि ताजा हालात में हो इसके विपरीत रहा है। जल भराव से निपटने के इंतजाम फैल हो चुके हैं। उस पर से मलेरिया ऑयल का छिड़काव ही नहीं किया गया है। इस वजह से भी लोग बीमार पड़ रहे हैं। लाखों रुपए खर्च कर मशीन का कोई अता-पता ही नहीं है। इतना ही नहीं, नालों की सफाई कराने के नपा के दावों की भी पोल खुल गई है। जबकि क्षेत्रों में डेंगू मलेरिया के लिहाज से अन्य संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर वहां के नगरवासियों को आगाह किया जाना चाहिए। साथ ही डेंगू मलेरिया की रोकथाम के लिए फाग मशीन से धुआं छोड़ने के साथ ही आवश्यक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। इसके लिए 684 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान तथा एएनएम के संयुक्त खाते में 10-10 हजार रुपया भेज दिया गया है, लेकिन अभी तक छिड़काव शुरू नहीं किया जा सका है। इस बाबत जिला मलेरिया अधिकारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि डेंगू, मलेरिया की रोकथाम के लिए आशा कार्यकर्ताओं तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। नौ टीम गठित कर दी गई है। अस्पताल आने वाले बुखार से ग्रसित मरीजों का फीवर टेस्ट करने के लिए एक विशेष काउंटर बनाया गया है। लापरवाही का मामला संज्ञान में नहीं आया है। ऐसा मामला मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।