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कोर्ट का आदेश: नाबालिग को पीटने और उसका झूठा बयान लिखने वाले दरोगा को करें दंडित, जानें- क्या है पूरा मामला

Sat, 11 May 2024 09:41 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 11 May 2024 09:41 AM IST
सार

मऊ जिले में नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार करने के साथ ही अदालत ने जूठा बयान दर्ज करने वाले दरोगा के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। 

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Court order Punish inspector who beat minor girl and wrote false statement in mau
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राजवीर सिंह की अदालत ने शुक्रवार को पीड़िता के बयान के आधार पर नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर लिया।

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पुलिस अधीक्षक और डीआईजी आजमगढ़ को आदेश की प्रति भेजकर मामले के विवेचक एसआई आनंद सिंह चौहान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। आदेश पत्र में एसपी से जल्द से जल्द कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने को कहा है। साथ ही पुलिस अधीक्षक को चेताया है कि वे ध्यान रखें कि बयान देने वाली पीड़िता का उत्पीड़न पुलिस न कर पाए।
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अभियोजन के अनुसार, मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है। वादी ने 25 अक्तूबर 2023 को थाने में तहरीर देकर दक्षिण टोला थाना क्षेत्र के सिंहालपुरा अछार गांव निवासी आकाश कुमार पुत्र सूबेदार राम पर अपनी दो नाबालिग बेटियों के अपहरण और उनके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। मामले में आरोपी पर केस दर्ज कर 22 अप्रैल 2024 को पुलिस ने दोनों किशोरियों को सूरत में बरामद किया था। 
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दोनों को जिले की पुलिस गृह जनपद लेकर आई थी। विशेष न्यायाधीश के आदेश में उल्लेख है कि पीड़िता ने (धारा 164 सीआरपीसी में) अपने बयान में बताया है कि दोनों बहनों को उसका पिता रोजाना पीटता था। दोनों को बेचने की बात करता था। परेशान होकर दोनों बहनें 25 अक्तूबर 2023 को परिजनों को बिना बताए सूरत चली गई थीं। वहां दोनों एक कंपनी में काम करती थीं। कमरा लेकर रहती थीं।


22 अप्रैल 2024 को पुलिस दोनों को गृहजनपद लेकर आई। थाने में दरोगा आनंद सिंह चौहान ने दोनों को पीटा और मुंशी से झूठा बयान दर्ज कराया। जज ने अपने आदेश में लिखा है कि नाबालिग को पीटकर दरोगा ने अनैतिक कृत्य किया है। इससे लोगों में पुलिस के प्रति भय और अविश्वास पैदा होता है। दरोगा को दंडित किया जाना आवश्यक है।

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