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नौ नई कोर्ट के सृजन को मिली स्वीकृति
ब्यूरो, अमर उजाला/ मऊ
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:06 AM IST
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सजा सुनने के बाद भाग
- फोटो : amar ujala
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प्रदेश सरकार ने जिले में नौ नई अदालतों की स्थापना की स्वीकृति प्रदान करते हुए इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया। प्रदेश सरकार द्वारा लंबे समय से जिले के अधिवक्ताओं की चल रही मांग को पूरा किए जाने पर बार के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के पुस्तकालय भवन में प्रेस वार्ता कर खुशी का इजहार किया। साथ ही प्रदेश सरकार व उच्च न्यायालय को बधाई दी।
बार के अध्यक्ष शमसुल हसन व महामंत्री दारोगा सिंह ने बताया कि जिले में वर्तमान समय में लगभग 76 हजार मुकदमें विभिन्न अदालतों में लंबित है। लंबित मुकदमों की संख्या के सापेक्ष अदालतों की संख्या न होने के चलते वादकारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में कई बार उच्च न्यायालय व व प्रदेश शासन से न्यायालयों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग की काफी लंबे समय से की जा रही थी।
जिस पर प्रदेश सरकार ने जिले में नौ नई अदालतों की स्थापना की स्वीकृति प्रदान करते हुए इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया। पदाधिकारियों ने बताया जो जारी शासनादेश के अनुसार एक एडीजे, एक सिविल जज सीनियर डिवीजन व सात सिविल जज जूनियर डिवीजन की नई कोर्ट स्थापित हुई। शासनादेश के बाद शीघ्र ही उच्च न्यायालय से इन नई अदालतों में अधिकारियों की भी तैनाती होगी।
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महामंत्री दारोगा सिंह ने बताया कि जिले में रिक्त पड़ी अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की मांग को लेकर बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को लखनऊ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डीबी भेसले से मिला। मुख्य न्यायमूर्ति ने अधिवक्ताओं की मांगों को गंभीरता से लेते हुए रजिस्ट्रार जनरल डीके सिंह को आदेश दिया कि अतिशीघ्र मऊ जिले में दो एडीजे व एक सिविल जज सीनियर डिवीजन तथा एक सिविल जज जूनियर डिवीजन स्तर के अधिकारियों को तैनात करे।
शासन द्वारा नौ नई कोर्ट की स्थापना का शासनादेश के बाद जिले में अब कुल 26 कोर्ट हो जाएगी। नई कोर्ट की जानकारी होते ही अधिवक्ताओं ने खुशी का इजहार किया। तथा कहा कि जिले के वादकारियों को शीघ्र न्याय मिलने लगेगा।
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बार के अध्यक्ष शमसुल हसन व महामंत्री दारोगा सिंह ने बताया कि जिले में वर्तमान समय में लगभग 76 हजार मुकदमें विभिन्न अदालतों में लंबित है। लंबित मुकदमों की संख्या के सापेक्ष अदालतों की संख्या न होने के चलते वादकारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में कई बार उच्च न्यायालय व व प्रदेश शासन से न्यायालयों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग की काफी लंबे समय से की जा रही थी।
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जिस पर प्रदेश सरकार ने जिले में नौ नई अदालतों की स्थापना की स्वीकृति प्रदान करते हुए इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया। पदाधिकारियों ने बताया जो जारी शासनादेश के अनुसार एक एडीजे, एक सिविल जज सीनियर डिवीजन व सात सिविल जज जूनियर डिवीजन की नई कोर्ट स्थापित हुई। शासनादेश के बाद शीघ्र ही उच्च न्यायालय से इन नई अदालतों में अधिकारियों की भी तैनाती होगी।
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महामंत्री दारोगा सिंह ने बताया कि जिले में रिक्त पड़ी अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की मांग को लेकर बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को लखनऊ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डीबी भेसले से मिला। मुख्य न्यायमूर्ति ने अधिवक्ताओं की मांगों को गंभीरता से लेते हुए रजिस्ट्रार जनरल डीके सिंह को आदेश दिया कि अतिशीघ्र मऊ जिले में दो एडीजे व एक सिविल जज सीनियर डिवीजन तथा एक सिविल जज जूनियर डिवीजन स्तर के अधिकारियों को तैनात करे।
शासन द्वारा नौ नई कोर्ट की स्थापना का शासनादेश के बाद जिले में अब कुल 26 कोर्ट हो जाएगी। नई कोर्ट की जानकारी होते ही अधिवक्ताओं ने खुशी का इजहार किया। तथा कहा कि जिले के वादकारियों को शीघ्र न्याय मिलने लगेगा।