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कोआपरेटिव बैंकों संग भेदभाव पर भड़के
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:21 PM IST
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पुराने नोट बदलने से रोक लगाने पर नगर क्षेत्र के सहादतपुरा जिला सहकारी बैंक पर प्रदर्शन करते कर्मचारी।
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कोआपरेटिव बैंक इंपलाइज यूनियन उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में गुरुवार को कर्मचारियों ने भेदभाव किए जान पर प्रदर्शन किया। इस दौरान कहा कि नोटबंदी के बाद उनके बैंकों को पैसा जमा करने का अधिकार नहीं दिया गया। जब कि उपभोक्ता अपना पैसा लेकर आ रहे हैं।
संगठन के अध्यक्ष रमाशंकर यादव न कहा कि यह पक्षपातपूर्ण अवैधानिक कदम है। इसके परिणाम स्वरूप जिला सहकारी बैंकों की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचा है। रिजर्व बैंक द्वारा जिला सहकारी बैंकाें के लाखों किसानों, मजदूरों व मध्यमवर्गीय ग्राहकों को अमान्य करेंसी को जमा कराने का विकल्प भी नहीं दिया है।
जिला सहकारी बैंक मझले, छोटे किसानों को खेती की वित्तीय आवश्यकताओं बीज एवं खाद की सुविधा प्रदान करता है। इस सुविधा के बंद होने से किसानों के समक्ष संकट आ गया है। संभावना है कि कृषि उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़े। शाखाओं को प्राप्त न होने के कारण ग्राहकों को उनके खातों से आहरित धनराशि का भुगतान नहीं कर पा रहा है।
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इससे शाखाओं में ग्राहकों के साथ अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो रही है। कहा कि सभी सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त है। अत: इन बैंकों को सामान्य बैंकिंग का अधिकार है। जमाकर्ताओं को बंद करेंसी को अपने खातों में जमा कराने का विधिक अधिकार है।
उन्होंने मांग की कि किसानों द्वारा लिए गए कर्ज को जमा करने एवं अन्य कार्यों के लिए अन्य बैंकों की भांति उन्हें भी अधिकार दिया जाए। प्रदर्शन में सुशील कुमार पांडेेय, समरजीत सिंह, शैलेंद्र कुमार, अरविंद कुमार खरवार, हिरामन प्रसाद, ज्ञानप्रकाश, अखिलेश सिंह आदि शामिल रहे।
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संगठन के अध्यक्ष रमाशंकर यादव न कहा कि यह पक्षपातपूर्ण अवैधानिक कदम है। इसके परिणाम स्वरूप जिला सहकारी बैंकों की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचा है। रिजर्व बैंक द्वारा जिला सहकारी बैंकाें के लाखों किसानों, मजदूरों व मध्यमवर्गीय ग्राहकों को अमान्य करेंसी को जमा कराने का विकल्प भी नहीं दिया है।
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जिला सहकारी बैंक मझले, छोटे किसानों को खेती की वित्तीय आवश्यकताओं बीज एवं खाद की सुविधा प्रदान करता है। इस सुविधा के बंद होने से किसानों के समक्ष संकट आ गया है। संभावना है कि कृषि उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़े। शाखाओं को प्राप्त न होने के कारण ग्राहकों को उनके खातों से आहरित धनराशि का भुगतान नहीं कर पा रहा है।
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इससे शाखाओं में ग्राहकों के साथ अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो रही है। कहा कि सभी सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त है। अत: इन बैंकों को सामान्य बैंकिंग का अधिकार है। जमाकर्ताओं को बंद करेंसी को अपने खातों में जमा कराने का विधिक अधिकार है।
उन्होंने मांग की कि किसानों द्वारा लिए गए कर्ज को जमा करने एवं अन्य कार्यों के लिए अन्य बैंकों की भांति उन्हें भी अधिकार दिया जाए। प्रदर्शन में सुशील कुमार पांडेेय, समरजीत सिंह, शैलेंद्र कुमार, अरविंद कुमार खरवार, हिरामन प्रसाद, ज्ञानप्रकाश, अखिलेश सिंह आदि शामिल रहे।