{"_id":"5bbba4d8867a5528296cc6cc","slug":"contractual-worker-strtike-on-collectorate","type":"story","status":"publish","title_hn":"संविदाकर्मियों ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संविदाकर्मियों ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:11 AM IST
विज्ञापन
strike
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ(एटक) के पदाधिकारियों तथा संविदाकर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। साथ ही जिलाधिकारी को संबोधित सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली विभाग में कार्यरत संविदा श्रमिकों का लगभग 12 माह से मानदेय रुका है। बेरोजगारी का लाभ उठा कर विद्युत प्रबंधन द्वारा संविदाकर्मियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। विद्युत प्रबंधन के लचर कार्यप्रणाली के कारण शीर्ष ऊर्जा निगम प्रबंधन के लगभग 30 आदेशों के बावजूद संविदाकर्मियों का आर्थिक शोषण रूक नहीं रहा है।
अपवादस्वरूप कुछ बिजलीघरों को छोड़कर अधिकांश बिजलीघरों पर कार्य करने के बावजूद लगभग 12 माह से अधिक अवधि का वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है।जो पूर्व से भुगतान जो हो रहा है वह मनमाने ढ़ग से 2000 या 3000 रूपये अनियमित रूप से आरटीजीएस के बजाय नगद किया जा रहा है। शासन एवं निगम आदेश के विपरीत जिले के बिजली संविदाकर्मियो को न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। न तो ईपीएफ कटौती की धनराशि संविदाकर्मियों के खाते में जमा नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि मांगों पर विचार अविलंब नहीं किया गया तो 12 अक्तूबर को अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर एक दिवसीय सामूहिक उपवास आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर इसरारूल हक, देवेंद्र यादव, मनोज कुमार, विनोद सिंह, छविनाथ शर्मा, विजयकांत सिंह, बब्बन सिंह, जमालुद्दीन, सुग्रीव कुमार मौर्या, विजेंद्र कुमार, राजू राजभर आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली विभाग में कार्यरत संविदा श्रमिकों का लगभग 12 माह से मानदेय रुका है। बेरोजगारी का लाभ उठा कर विद्युत प्रबंधन द्वारा संविदाकर्मियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। विद्युत प्रबंधन के लचर कार्यप्रणाली के कारण शीर्ष ऊर्जा निगम प्रबंधन के लगभग 30 आदेशों के बावजूद संविदाकर्मियों का आर्थिक शोषण रूक नहीं रहा है।
विज्ञापन
अपवादस्वरूप कुछ बिजलीघरों को छोड़कर अधिकांश बिजलीघरों पर कार्य करने के बावजूद लगभग 12 माह से अधिक अवधि का वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है।जो पूर्व से भुगतान जो हो रहा है वह मनमाने ढ़ग से 2000 या 3000 रूपये अनियमित रूप से आरटीजीएस के बजाय नगद किया जा रहा है। शासन एवं निगम आदेश के विपरीत जिले के बिजली संविदाकर्मियो को न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। न तो ईपीएफ कटौती की धनराशि संविदाकर्मियों के खाते में जमा नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि मांगों पर विचार अविलंब नहीं किया गया तो 12 अक्तूबर को अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर एक दिवसीय सामूहिक उपवास आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर इसरारूल हक, देवेंद्र यादव, मनोज कुमार, विनोद सिंह, छविनाथ शर्मा, विजयकांत सिंह, बब्बन सिंह, जमालुद्दीन, सुग्रीव कुमार मौर्या, विजेंद्र कुमार, राजू राजभर आदि शामिल रहे।