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देवारा में टापू में तब्दील गांवों में कच्चे मकानों के गिरने का जारी है सिलसिला
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बाढ़ के पानी से बर्बाद फसल।
- फोटो : MAU
दुबारी। घाघरा नदी के जलस्तर में घटाव के बाद भी देवारा इलाकों के लोगों की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। 24घंटे में नदी के जलस्तर में एक सेमी घटाव दर्ज किया गया। घाघरा में आई बाढ़ से टापू में तब्दील
कई गांवों में लंबे समय से जलजमाव से कच्चे मकानों के गिरने से बाढ़पीड़ितों को खानाबदोश की जिंदगी जीना पड़ रहा है। काफी समय से जलमग्न हजारों एकड़ फसलें नष्ट होने से पशुओं के चारा का संकट उत्पन्न हो गया है। लेकिन शासन प्रशासन की तरफ से किसानों की सुधि नहीं ली जा सकी है।
बृहस्पतिवार को नदी के जलस्तर मेेें घटाव होने से लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन टापू में तब्दील विंदटोलिया, नई बस्ती, जरलहवा, बइरकंटा, विशुन का पुरा, पब्बर का पुरा, खैरा हरिलाल का पुरा, बिंदर का पुरा, बिशुन का पुरा, भगत का पुरा, धूस का पूरा, पब्बर का पुरा, चौहानपुञ, बरोहा, कुंवरपुरवा,परसिया, गजियापुर मोलनापुर सहित विभिन्न गांवों में कच्ची मकानों के गिरने का क्रम जारी रहने से बाढ़पीड़ितों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। अब तक 70 से अधिक कच्चा मकान धाराशायी हो चुका है।
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मकान गिरने से हजारों का गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया है। लो बंधों तथा सुरक्षित स्थलों पर खानाबदोश की जिंदगी जीने को विवश हं। गांवों में जलजमाव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सभी मुख्य मार्ग तथा संपर्क मार्ग डूबे रहने से आवागमन ठप है पर्याप्त मात्रा में नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। 50किमी से अधिक एरिया में जलमग्न हजारों एकड़ फसलें नष्ट होने से पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। उधर गजियापुर बंधा पर मरम्मत कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो परसिया जयराम गिरी हाहा नाला के रेगुलेटर पर बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 66.63 मीटर रहा। बुधवार को नदी का जलस्तर 66.64मीटर रहा।नदी का खतरा निशान 66.31मीटर है।
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कई गांवों में लंबे समय से जलजमाव से कच्चे मकानों के गिरने से बाढ़पीड़ितों को खानाबदोश की जिंदगी जीना पड़ रहा है। काफी समय से जलमग्न हजारों एकड़ फसलें नष्ट होने से पशुओं के चारा का संकट उत्पन्न हो गया है। लेकिन शासन प्रशासन की तरफ से किसानों की सुधि नहीं ली जा सकी है।
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बृहस्पतिवार को नदी के जलस्तर मेेें घटाव होने से लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन टापू में तब्दील विंदटोलिया, नई बस्ती, जरलहवा, बइरकंटा, विशुन का पुरा, पब्बर का पुरा, खैरा हरिलाल का पुरा, बिंदर का पुरा, बिशुन का पुरा, भगत का पुरा, धूस का पूरा, पब्बर का पुरा, चौहानपुञ, बरोहा, कुंवरपुरवा,परसिया, गजियापुर मोलनापुर सहित विभिन्न गांवों में कच्ची मकानों के गिरने का क्रम जारी रहने से बाढ़पीड़ितों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। अब तक 70 से अधिक कच्चा मकान धाराशायी हो चुका है।
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मकान गिरने से हजारों का गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया है। लो बंधों तथा सुरक्षित स्थलों पर खानाबदोश की जिंदगी जीने को विवश हं। गांवों में जलजमाव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सभी मुख्य मार्ग तथा संपर्क मार्ग डूबे रहने से आवागमन ठप है पर्याप्त मात्रा में नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। 50किमी से अधिक एरिया में जलमग्न हजारों एकड़ फसलें नष्ट होने से पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। उधर गजियापुर बंधा पर मरम्मत कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो परसिया जयराम गिरी हाहा नाला के रेगुलेटर पर बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 66.63 मीटर रहा। बुधवार को नदी का जलस्तर 66.64मीटर रहा।नदी का खतरा निशान 66.31मीटर है।