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जनसहयोग से कर डाला पांच किलोमीटर लंबे नालों की सफाई
mau news
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:50 PM IST
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रतनपुरा ब्लाक के गाढ़ा ताला में ग्रामीणों के चंदे से जेसीबी मशीन द्वारा खोदा जा रहा नाला।
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मऊ। रतनपुरा ब्लाक के इटौरा और गाढ़ा तालों से जलनिकासी के लिए बने नालों की सफाई पिछले छह सालों से नहीं हुई है।इससे दोनों तालों के आस पास के क्षेत्रों में जलभराव रहने से 17 गांवों के किसानों की हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि पर कई सालों से खेती नहीं हो पाती है। किसानों ने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से नालों की सफरई के लिए गुहार लगाया लेकिन कोई सुनवाई न देख किसानों ने जनसहयोग से नालों की सफराई का बीड़ा उठाया। चंदा एकत्र करके किसान दोनों नालों की सफाई की मुहिम में 14 जून से जुट गए और उनकी दृढ़ संकल्प का प्रतिफल रहा कि जो काम जिम्मेदार सरकारी अफसर नहीं कर सके उसे महज 20 दिनों की अथक मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से क्षेत्र के किसानों ने अपने संसाधनों से कर दिखाया।
ब्लाक क्षेत्र में इटज्ञैरा और नगवा दो बड़े ताल हैं। इन तालों के पानी के निकास के लिए खड़िया और नगवा ड्रेन हैं। लेकिन इनकी सफाई छह सालों से नहीं हुई है। इससे आस पास के 17 गांवों के हजारों किसानों के हजारों हेक्टेएयर कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है। असमय बरसात होने पर किसानों की पकी फसलें नष्ट हो जाती हैं। नालों की सफाई के लिए भाजपा नेता पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश सिंह के नेतृत्व में कई बार ज्ञापन सौंपने से लेकर धरना प्रदर्शन भी किया। नालों की सफाई के लिए शासन से मिले 6.70 लाख रुपये भी अधिकारियों की उपेक्षा के चलते वापस हो गए। अधिशासी अभियंता संचाई अशोक कुमार ने किसान नेताओं से कहा कि नालों की सफाई के लिए कोई धन नहीं है और अब 15 जून के बाद नालों की सफाई भी संभव नहीं है। सरकारी तंत्र से मिली निराशा से आहत किसानों ने क्षेत्र के आशापूर्णा देवी मंदिर पर सभी की। सभसा में तया किया गया कि अब सरकारी तंत्र से कोई उम्मीद करना बेकार है इसलिए अब उन्हें खुद नालों की सफाई के लिए आगे आना होगा। उसी दिन से कई टोलियों में किसान क्षेत्र के गांवों में चंदे के लिए निकल पड़े। लोगों ने किसानों की इस बड़ी समस्या से निजात दिलाने के लिए खुले दिल से उनकी मदद की। उसी दिन से जेसीबी से नालों की सफाई शुरु कर दी गई । कुछ जेसीबी मालिकों ने किसानों के लिए नि:शुल्क मदद किया। किसानों की अटूट लगन , दृढ़ इच्छा शक्ति और संगठन की बदौलत चार जुलाई तक 20 दिन तक लगातार चली मुहिम में पांच किलोमीटर लंबे नालों की सफाई कर डाली गई। नालों की सफाई गाढ़ा , सेहबरपुर , मखना , बखरिया, गोबरिया, इटौरा , जोगापुर , रतनपुरा , खालिसपुर , अरदौना , नगवा , बीबीपुर, सिधवल , बिलौवा, दतौड़ा , इसहाकपुर सहित 20 गांवों के किसानों की हजारों हेक्टएयर भूमि में अब खेती की जा सकेगी। इस मुहिम में मुरलीधर तिवारी , शिवशंकर सिंह, शेषनाथ सिंह, सूर्यनाथ सिंह, रामजन्म , मनेेज सिंह, कृष्णदेव राम , फेंकू राम , राम मिलन राजभर आदि किसान नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। ,
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ब्लाक क्षेत्र में इटज्ञैरा और नगवा दो बड़े ताल हैं। इन तालों के पानी के निकास के लिए खड़िया और नगवा ड्रेन हैं। लेकिन इनकी सफाई छह सालों से नहीं हुई है। इससे आस पास के 17 गांवों के हजारों किसानों के हजारों हेक्टेएयर कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है। असमय बरसात होने पर किसानों की पकी फसलें नष्ट हो जाती हैं। नालों की सफाई के लिए भाजपा नेता पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश सिंह के नेतृत्व में कई बार ज्ञापन सौंपने से लेकर धरना प्रदर्शन भी किया। नालों की सफाई के लिए शासन से मिले 6.70 लाख रुपये भी अधिकारियों की उपेक्षा के चलते वापस हो गए। अधिशासी अभियंता संचाई अशोक कुमार ने किसान नेताओं से कहा कि नालों की सफाई के लिए कोई धन नहीं है और अब 15 जून के बाद नालों की सफाई भी संभव नहीं है। सरकारी तंत्र से मिली निराशा से आहत किसानों ने क्षेत्र के आशापूर्णा देवी मंदिर पर सभी की। सभसा में तया किया गया कि अब सरकारी तंत्र से कोई उम्मीद करना बेकार है इसलिए अब उन्हें खुद नालों की सफाई के लिए आगे आना होगा। उसी दिन से कई टोलियों में किसान क्षेत्र के गांवों में चंदे के लिए निकल पड़े। लोगों ने किसानों की इस बड़ी समस्या से निजात दिलाने के लिए खुले दिल से उनकी मदद की। उसी दिन से जेसीबी से नालों की सफाई शुरु कर दी गई । कुछ जेसीबी मालिकों ने किसानों के लिए नि:शुल्क मदद किया। किसानों की अटूट लगन , दृढ़ इच्छा शक्ति और संगठन की बदौलत चार जुलाई तक 20 दिन तक लगातार चली मुहिम में पांच किलोमीटर लंबे नालों की सफाई कर डाली गई। नालों की सफाई गाढ़ा , सेहबरपुर , मखना , बखरिया, गोबरिया, इटौरा , जोगापुर , रतनपुरा , खालिसपुर , अरदौना , नगवा , बीबीपुर, सिधवल , बिलौवा, दतौड़ा , इसहाकपुर सहित 20 गांवों के किसानों की हजारों हेक्टएयर भूमि में अब खेती की जा सकेगी। इस मुहिम में मुरलीधर तिवारी , शिवशंकर सिंह, शेषनाथ सिंह, सूर्यनाथ सिंह, रामजन्म , मनेेज सिंह, कृष्णदेव राम , फेंकू राम , राम मिलन राजभर आदि किसान नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। ,
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