मऊ। कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी के वैज्ञानिकों ने बरसात को देखते हुए किसानों को बेहतर खेती के सुझाव दिए हैं। कहा है कि वह कम समय से पकने वाली फसलों को चुनाव करें जो उनके लिए अच्छा होगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि 15 जून से 15 जुलाई तक धान की रोपाई होने पर पैदावार अच्छी होती है। इसके बाद 30 जुलाई तक धान की रोपाई होने पर रोग लगने की संभावना अधिक है। ऐसी परिस्थिति में किसानों को कम पानी वाली एवं कम समय से पकने वाली फसलों का चुनाव करना चाहिए और रोपाई के स्थान पर धान की सीधी बुआई करनी चाहिए। इस विधि में पानी, खाद, समय, मजदूरी कम लगती है। यदि समय से बरसात नहीं होती है तो किसानों को अपनी आजीविका चलाने के लिए मुर्गी पालन, बकरी पालन, एवं गाय और भैंस पालन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने बताया कि देर से बुआई करने से लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित होता है। बरसात न होने से धान की फसल में लागत करीब 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। खेत में मिट्टी में दरार पड़ने से धान की जड़े कमजोर होंगी। केंद्र के बीज प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक डॉ. हिमांशु राय ने किसानों को ऊंची भूमि वाले खेतों पर अरहर की खेती करने की सलाह दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अंगद प्रसाद ने बताया कि किसानों के लिए तिल की खेती भी लाभदायक है। इसकी खेती सफसलीय फसल के रूप में अरहर, मक्का एवं ज्वार के साथ की जा सकती है। तिल की बुवाई कतारों में करनी चाहिए।