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मुख्यमंत्री जी: गैर जनपद जाकर क्यों पकड़ें पूर्वांचल एक्सप्रेस वे:

Mon, 21 Dec 2020 12:29 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Dec 2020 12:29 AM IST
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Chief Minister: Why should we go to non-district and catch Purvanchal Expressway:
मऊ। करोड़ों की लागत से बना 354 किमी लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जिले की सीमा से 26 किमी तक गुजरा है। लेकिन जिले में लिंक न होने से जनपदवासियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। अमर उजाला में खबर प्रकाशित करने पर लोग इस मुहिम से जुड़ने लगे हैं। काफी संख्या में साड़ी कारोबारी लखनऊ, दिल्ली सहित अन्य महानगरों को जाते हैं, लेकिन जिले सुविधा न मिलने से आंदोलित हैं। कारोबारियों का कहना है कि हम गैर जनपद जाकर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पकड़ने क्यों जाएं ? सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिले में आ रहे मुख्यमंत्री योगी को ज्ञापन देने का निर्णय लिया है।
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जिले का मुख्य कारोबार साड़ी उद्योग है। यहां के बुनकरों द्वारा बुनी गई साड़ियाें ने देश, विदेश में अपनी पहचान बनाई है। सरकार की तरफ से साड़ी कारोबार को गति देने के लिए इसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ में शामिल किया है। आम लोगों के साथ ही कारोबारियों को कम समय में लखनऊ सहित महानगरों को जाने के लिए करोड़ों की लागत से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जिले के सदर तथा मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के नियामतपुर, शाहजादपुर, अहिलाद, ओन्हाइच, मजखनी, खरगजेपुर, ताजपुर गांव, गोकुलपुरा, खरेवा, अमेठी, समसाबाद, करहां, कोतवालीपुर, बरडीहा, सुदामपुर, भुजैनी, शंभूपुर, भांटीकला, लखनपुरा, कड़याखास, जमुई, टड़वाचौबेपुर, सैदपुर, चाल्हा, सादीपुर, पोछा, मुबारकपुर पट्टी, दतौली, जहनियापुर, भांटी खुर्द, कोठिया, हुसेनपट्टी, भुसुवा, याकूबपुर, सुरहुरपुर सहित 40 गांवों से होकर गुजरा है। इसके लिए करीब तीन हजार किसानों की 325.75 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है।
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कारोबारियों की मानें तो पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जिले के 26 किमी से होकर गुजरा है, हजारों हेक्टेयर कृषि उपयोगी जमीन को किसानों ने दिया है, लेकिन इस एक्सप्रेस वे से जिले के लोगों को चढ़ने या उतरने की सुविधा प्रदान नहीं की गई है। यदि ऐसा होता तो जिले के उद्यमियों, कारोबारियों, किसानों से लेकर अन्य तरह के कारोबार करने वालों तथा आम जनता को लाभ मिलता। यही नहीं कम समय में लखनऊ तथा दिल्ली की यात्रा इस हाइवे से पूरी की जा सकती है। सीधा जुड़ाव होने पर माल से लेकर अन्य सामानों की आवक भी आसानी से होती।
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जिले से गुजरे हिस्से को यूपीडा ने पैकेज नंबर सात सात का नाम दिया है। इसका मतलब आजमगढ़ के सठियांव और गाजीपुर के हैदरा में चढ़ने उतरने की व्यवस्था है। ऐसे में एक गेट से चढ़ने तथा दूसरे गेट को पैकेज से डिवाइड किया गया है। इस तरह से मऊ जिले का हिस्सा भले ही पैकेज सात में है, लेकिन यहां इसकी सुविधा नहीं है।
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क्या कहते हैं सामाजिक कार्यकर्ता
सामाजिक कार्यकर्ता छोटेलाल गांधी ने बताया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस जिले के 40 गांवों से होकर गुजरा है, लेकिन हम लंबी दूरी तय कर गैर जनपद जाकर पूर्वांचल एक्सप्रेस क्यों पकड़ने जाए। इससे कारोबारियों को अपना माल मंगाने भेजने में लागत बढ़ेगी। जिले के आसपास लिंक मार्ग की व्यवस्था की जाए। अन्यथा हम लोग आंदोलन करने को बाध्य हो जाएंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता बसंत कुमार ने कहा कि जिले के विकास का गति देने के लिए सरकार की तरफ से साड़ी कारोबार को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किया गया है। बेहतर यातायात सुविधा देने में शासन प्रशासन का ध्यान ही नहीं है। पूर्वांचल एक्सप्रेस जिले के 40 गांवों से होकर गुजरा है। लेकिन लोगों को एक्सप्रेस-वे से चढ़ने उतरने की सुविधा ही नहीं दी गई है। बेहतर यातायात की सुविधा मिलने से साड़ी कारोबार को गति मिल सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति ने बताया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से कम समय में लखनऊ तथा दिल्ली जाने की उम्मीद जगी है। लेकिन अपने जनपद से लिंक न देकर शासन प्रशासन ने अन्याय किया है। कहीं ऐसा न हो कि मऊ का साड़ी व्यवसाय विकास से पिछड़ न जाए। जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से जोड़ने पर ही जिले में विकास की गति तेज होगी। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बुनकर नेता अबुबकर अंसारी ने कहा कि करोड़ों की लागत से महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का लाभ जिले को न मिलना खल रहा है। जिले के तीन हजार किसानों की हजारों हेक्टेयर जमीन गई है। लेकिन जिले में लिंक न मिलने से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री को संबोधित जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
वहीं विजय तुलस्यान ने कहा कि देश के विभिन्न प्रांतों के कारोबारी मऊ जिले में साड़ी कारोबार करने आते हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेस से जनपदवासियों को चढ़ने और उतरने की सुविधा न दिया जाना बेहद खराब है। गांवों से गुजरे एक्सप्रेस वे पर कहीं चढ़ने और उतरने की सुविधा प्रदान किए जाने पर ही पूरे क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है। समस्या का समाधान न होने पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को जागरुक किया जाएगा।

उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष प्रतिनिधि राकेश तिवारी ने बताया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस में जिले के 40 गांवों से होकर गुजरा है, लेकिन लिंक मार्ग से न जोड़े जाने से हम लोग ठगा महसूस कर रहे हैं। गैर जनपद जाकर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पकड़ने क्यों जाएं। जिले को लिंक मार्ग से जोड़ा नहीं गया तो हम लोग आंदोलन करने को बाध्य हो जाएंगे।
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