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सीएचसी परदहां: रिक्त चल रहा विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद
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परदहां ब्लाक मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं को बहाल नहीं किया जा सका है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। एक्सरे मशीन खराब है। परदहां ब्लाक क्षेत्र में 30 गांव हैं, आबादी लगभग एक लाख है। लोगों की सहूलियत के लिए ब्लाक मुख्यालय पर स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना दिया गया। लेकिन सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। महिला चिकित्सक भी अक्सर अनुपस्थित रहती हैं।
2013-14 में तत्कालीन सपा सरकार ने परदहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सीएचसी बनाने के लिए मंजूरी देकर इसे 30 बेड का अस्पताल बनवाया। चार करोड़ 97 लाख 11 हजार से बने नए भवन को वर्ष 2019 में स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया गया। शासन की तरफ से परदहां सीएचसी के लिए एक अधीक्षक, दो चिकित्सक, एक बाल रोग विशेषज्ञ, दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक फिजिशियन, एक सर्जन, एक डेंटल सर्जन, एक नेत्र सर्जन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, तीन फार्मासिस्ट, एक एक्सरे टेक्नीशियन, तीन स्टाफ नर्स, दो वाॅर्ड ब्वाय, एक महिला सहायिका, स्वीपर और चौकीदार का पद स्वीकृत हुआ था।
लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। यहां नौ डॉक्टरों के सापेक्ष अधीक्षक सहित केवल तीन डाॅक्टर, दो महिला डाॅक्टर, दो वार्ड ब्वाय, तीन स्टाफ नर्स, तीन फर्मासिस्ट की तैनाती है। कोरोना काल के दौरान सीएचसी को कोविड अस्पताल बनाया गया था। इस दौरान परदहां सीएचसी पर डिजिटल एक्सरे मशीन तो लगा दी गई लेकिन प्रिंटर नहीं होने के कारण लोगों को एक्सरे का लाभ नहीं मिल रहा। हालत यह हैं गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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आक्सीजन प्लांट का गेट भी नहीं लगा
बढुआगोदाम। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सीएचसी परदहां में शासन की तरफ से ऑक्सीजन प्लांट लगवाया गया। बजट भी खर्च कर दिया गया। लेकिन अब भी ऑक्सीजन प्लांट के भवन पर गेट नहीं लगाया गया है। इससे प्लांट का रखरखाव सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
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सीमित संसाधनों से मरीजों के बेहतर इलाज करने का प्रयास जारी है। स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है।
डॉ. दिलीप कुमार, अधीक्षक,
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, परदहां
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2013-14 में तत्कालीन सपा सरकार ने परदहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सीएचसी बनाने के लिए मंजूरी देकर इसे 30 बेड का अस्पताल बनवाया। चार करोड़ 97 लाख 11 हजार से बने नए भवन को वर्ष 2019 में स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया गया। शासन की तरफ से परदहां सीएचसी के लिए एक अधीक्षक, दो चिकित्सक, एक बाल रोग विशेषज्ञ, दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक फिजिशियन, एक सर्जन, एक डेंटल सर्जन, एक नेत्र सर्जन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, तीन फार्मासिस्ट, एक एक्सरे टेक्नीशियन, तीन स्टाफ नर्स, दो वाॅर्ड ब्वाय, एक महिला सहायिका, स्वीपर और चौकीदार का पद स्वीकृत हुआ था।
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लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। यहां नौ डॉक्टरों के सापेक्ष अधीक्षक सहित केवल तीन डाॅक्टर, दो महिला डाॅक्टर, दो वार्ड ब्वाय, तीन स्टाफ नर्स, तीन फर्मासिस्ट की तैनाती है। कोरोना काल के दौरान सीएचसी को कोविड अस्पताल बनाया गया था। इस दौरान परदहां सीएचसी पर डिजिटल एक्सरे मशीन तो लगा दी गई लेकिन प्रिंटर नहीं होने के कारण लोगों को एक्सरे का लाभ नहीं मिल रहा। हालत यह हैं गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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आक्सीजन प्लांट का गेट भी नहीं लगा
बढुआगोदाम। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सीएचसी परदहां में शासन की तरफ से ऑक्सीजन प्लांट लगवाया गया। बजट भी खर्च कर दिया गया। लेकिन अब भी ऑक्सीजन प्लांट के भवन पर गेट नहीं लगाया गया है। इससे प्लांट का रखरखाव सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
सीमित संसाधनों से मरीजों के बेहतर इलाज करने का प्रयास जारी है। स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है।
डॉ. दिलीप कुमार, अधीक्षक,
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, परदहां