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हिंदी और उर्दू दोनों सगी बहनें: डॉ. रफीक अहमद
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मऊ। डुमरी मर्यादपुर स्थित इंदिरा गांधी पीजी कॉलेज में अल्लामा इकबाल के जन्मदिवस को उर्दू दिवस के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ उर्मलेश्वर सिंह ने किया। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि ब्लाक प्रमुख मीनू सिंह ने कहा कि अल्लामा इकबाल उर्दू जबान के मशहूर शायर थे, जिन्होंने कौमी तराना लिखा जिसे आज पूरा हिंदुस्तान बड़े जोश के साथ पढ़ता है, इसीलिए उन्हें शायरे मशरिक कहा जाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रफीक अहमद ने कहा कि उर्दू एक प्रेम की भाषा है। हिंदी और उर्दू दोनों सगी बहनों जैसी हैं, दोनों ने समाज मे प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्रबंधक राष्ट्र कुंवर सिंह ने बच्चों को अल्लामा इकबाल के बारे में बताते हुए कहा कि अल्लामा इकबाल ने अपने कलम से आजादी की जंग लड़ी। उन्होंने अपने कलम से ऐसे आजादी के तराने लिखे जिसने देशभक्ति की आग में घी का काम किया। उन्होंने उर्दू को बढ़ावा देने की बात करते हुए कहा कि हमें उर्दू जुबान को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाने की जरूरत है। कॉलेज के उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ जहीर ने कहा कि उर्दू हमारी रगों में खून की तरह है। कितना भी कोई हमसे उर्दू से जुदा करने की कोशिश करें कर नहीं सकता।अंत मे छात्राओं ने अल्लामा इकबाल का लिखा प्रसिद्ध तराना सारे जहां से अच्छा.. पढ़ा, जिसने कार्यक्रम में समां बांध दिया। कार्यकम में मुख्य रूप से अमित मिश्रा, मोहम्मद फैज, अब्दुल्लाह , प्रिंस, डॉ सालेह अंसारी, रहमतुल्लाह , तारिक,शगुफ्ता आदि रहें।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रफीक अहमद ने कहा कि उर्दू एक प्रेम की भाषा है। हिंदी और उर्दू दोनों सगी बहनों जैसी हैं, दोनों ने समाज मे प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्रबंधक राष्ट्र कुंवर सिंह ने बच्चों को अल्लामा इकबाल के बारे में बताते हुए कहा कि अल्लामा इकबाल ने अपने कलम से आजादी की जंग लड़ी। उन्होंने अपने कलम से ऐसे आजादी के तराने लिखे जिसने देशभक्ति की आग में घी का काम किया। उन्होंने उर्दू को बढ़ावा देने की बात करते हुए कहा कि हमें उर्दू जुबान को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाने की जरूरत है। कॉलेज के उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ जहीर ने कहा कि उर्दू हमारी रगों में खून की तरह है। कितना भी कोई हमसे उर्दू से जुदा करने की कोशिश करें कर नहीं सकता।अंत मे छात्राओं ने अल्लामा इकबाल का लिखा प्रसिद्ध तराना सारे जहां से अच्छा.. पढ़ा, जिसने कार्यक्रम में समां बांध दिया। कार्यकम में मुख्य रूप से अमित मिश्रा, मोहम्मद फैज, अब्दुल्लाह , प्रिंस, डॉ सालेह अंसारी, रहमतुल्लाह , तारिक,शगुफ्ता आदि रहें।
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