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घूस लेते लिपिक को दबोचा
ब्यूरो/ अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 05 May 2016 11:39 PM IST
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कलेक्ट्रेट परिसर से घूस लेते पकड़े गए लघु सिंचाई विभाग के वरिष्ठ लिपिक अशोक (बीच में) को पकड़कर ले जाती एंटी करप्शन गोरखपुर की टीम।
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एंटी करप्शन गोरखपुर की टीम ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट से घूस लेते लघु सिंचाई विभाग के एक लिपिक को रंगेहाथ पकड़ा। उसके पास से तीन हजार रुपये बरामद किए। लिपिक एक ग्राम प्रधान से मनरेगा से हुई तालाब की खुदाई का बिल पास कराने के नाम पर घूस की मांग की थी। इसकी शिकायत ग्राम प्रधान ने एंटी करप्शन टीम से कर दी। गुरुवार को पकड़े जाने के बाद एंटी करप्शन की टीम ने लिपिक के आलमारी से 43 हजार रुपये बरामद किए। टीम ने आरोपी को पकड़कर कोतवाली लाया और उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराकर पुलिस को सौंप दिया।
लघु सिंचाई विभाग से कोपागंज के धवरियासाथ गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत एक पोखरे की खुदाई कराई गई थी। इस पोखरे की खुदाई में कुल 5 लाख 73 हजार रुपये का बिल बना। भुगतान के लिए को लेकर ग्राम प्रधान रेनू सिंह अपने पति प्रवीण देव को लेकर ब्लॉक पर आए। वहां पर भी उनसे रुपयों की मांग की गई। आरोप लगाया कि वहां धन न देने पर उनकी फाइल सीधे जिला मुख्यालय लघु सिंचाई विभाग में भेज दी गई।
भुगतान के लिए जब वह विभाग में गए तो सक्षम अधिकारी ने उनसे अपने लिपिक अशोक कुमार से मिलने को कहा। लिपिक ने इस संबंध में प्रधान पति से धन की मांग की। वह वहां से टाल मटोल कर बाद में देने के लिए कहकर चले आए। बाद में प्रधान के पति प्रवीण देव ने इसकी शिकायत गोरखपुर के एंटी करप्शन टीम से की। प्रवीण देव ने गुरुवार को लिपिक को पैसा देने का वादा किया और इसी दिन एंटी करप्शन टीम को भी बुलाया।
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एंटी करप्शन टीम ने केमिकलयुक्त पाउडर लगा दो एक-एक हजार एवं दो 500-500 रुपये का नोट देने के लिए दिया और आस पास अपने भी मौजूद रहे। ज्योहि प्रवीण देव घूस दिए और लिपिक अशोक कुमार ने नोटों को थामा उसी दौरान एंटी करप्शन की टीम ने पकड़ लिया। लिपिक का हाथ धुलवाया तो उसका हाथ रंगीन हो गया यही प्रक्रिया उन्होंने घूस देने वाले प्रवीण देव से भी कराई। रंगयुक्त पानी का सैंपल लेकर उसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजने के लिए रख लिया और आरोपी लिपिक को पकड़कर कोतवाली लाया। लिपिक से पूछताछ के बाद टीम ने उसके आलमारी से 43 हजार रुपये बरामद किया।
पूछताछ के लिए विभाग के सहायक अभियंता मोती राम को भी बुलाया लेकिन उन्होंने पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया। कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं है। एंटी करप्शन टीम में शामिल इंसपेक्टर सभाजीत त्रिपाठी ने आरोपी लिपिक के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराकर उसे पुलिस को सौंप दिया। इस संबंध में इंसपेक्टर सभाजीत त्रिपाठी ने बताया कि प्रवीण देव की लिखित शिकायत पर उनकी टीम लिपिक को रंगे हाथों पकड़ने के लिए आई थी। आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस को सुपुर्द कर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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लघु सिंचाई विभाग से कोपागंज के धवरियासाथ गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत एक पोखरे की खुदाई कराई गई थी। इस पोखरे की खुदाई में कुल 5 लाख 73 हजार रुपये का बिल बना। भुगतान के लिए को लेकर ग्राम प्रधान रेनू सिंह अपने पति प्रवीण देव को लेकर ब्लॉक पर आए। वहां पर भी उनसे रुपयों की मांग की गई। आरोप लगाया कि वहां धन न देने पर उनकी फाइल सीधे जिला मुख्यालय लघु सिंचाई विभाग में भेज दी गई।
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भुगतान के लिए जब वह विभाग में गए तो सक्षम अधिकारी ने उनसे अपने लिपिक अशोक कुमार से मिलने को कहा। लिपिक ने इस संबंध में प्रधान पति से धन की मांग की। वह वहां से टाल मटोल कर बाद में देने के लिए कहकर चले आए। बाद में प्रधान के पति प्रवीण देव ने इसकी शिकायत गोरखपुर के एंटी करप्शन टीम से की। प्रवीण देव ने गुरुवार को लिपिक को पैसा देने का वादा किया और इसी दिन एंटी करप्शन टीम को भी बुलाया।
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एंटी करप्शन टीम ने केमिकलयुक्त पाउडर लगा दो एक-एक हजार एवं दो 500-500 रुपये का नोट देने के लिए दिया और आस पास अपने भी मौजूद रहे। ज्योहि प्रवीण देव घूस दिए और लिपिक अशोक कुमार ने नोटों को थामा उसी दौरान एंटी करप्शन की टीम ने पकड़ लिया। लिपिक का हाथ धुलवाया तो उसका हाथ रंगीन हो गया यही प्रक्रिया उन्होंने घूस देने वाले प्रवीण देव से भी कराई। रंगयुक्त पानी का सैंपल लेकर उसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजने के लिए रख लिया और आरोपी लिपिक को पकड़कर कोतवाली लाया। लिपिक से पूछताछ के बाद टीम ने उसके आलमारी से 43 हजार रुपये बरामद किया।
पूछताछ के लिए विभाग के सहायक अभियंता मोती राम को भी बुलाया लेकिन उन्होंने पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया। कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं है। एंटी करप्शन टीम में शामिल इंसपेक्टर सभाजीत त्रिपाठी ने आरोपी लिपिक के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराकर उसे पुलिस को सौंप दिया। इस संबंध में इंसपेक्टर सभाजीत त्रिपाठी ने बताया कि प्रवीण देव की लिखित शिकायत पर उनकी टीम लिपिक को रंगे हाथों पकड़ने के लिए आई थी। आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस को सुपुर्द कर मुकदमा दर्ज कराया गया है।