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आदेश के बाद सिर्फ 25 प्रतिशत वाहनों में ही जीपीएस लग सका

Sat, 13 Nov 2021 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 11:45 PM IST
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After the order, GPS could be installed in only 25 percent of the vehicles.
मऊ। रानीपुर थाना क्षेत्र के महासो रेल हादसा होने के लगभग छह वर्ष बाद भी परिवहन विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में नजर आ रहे हैं। शासन से स्कूली बसों में जीपीएस लगाने का आदेश वर्षों पहले जारी किया जा चुका है। लेकिन अभी तक लगभग 25 प्रतिशत स्कूली बसों में ही जीपीएस लग सका है। बाकी बगैर फिटनेस के ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। भारी भरकम फीस देने के बाद भी अभिभावकों को अपने बच्चों की लोकेशन नहीं मिल पाती है। खटारा स्कूली बसों के संचालन से बच्चों की जिंदगी खतरे में रहती है। नियम कानून को ताक पर रखकर कई स्कूल संचालकों द्वारा छोटे सवारी वाहनों से ढ़ोया जाता है। विभाग की तरफ से स्कूली बस संचालकों को नोटिस जारी की गई है।
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जिले में 542 निजी स्कूल संचालित हैं। चार दिसंबर 2014 को रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के महासो में स्कूली बस ट्रेन से टकरा गई थी। रेल हादसे ने जिलेवासियों को झकझोर दिया था, लेकिन अब तक न तो प्रशासन चेता और न ही परिवहन विभाग को सुध रही। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो जिले में 370 स्कूली बस पंजीकृत हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्थिति सामान्य होने के बाद अब स्कूल कालेज पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। स्कूली बसें भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। लेकिन सबंधित विभाग की तरफ से लापरवाह स्कूल संचालकों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। हालत यह है कि 85 स्कूली बसों में ही जीपीएस लगाया जा सका है। इसके चलते स्कूल जाते समय तथा आते समय अपने बच्चों की लोकेशन अभिभावकों को नहीं मिलती है। बाकी अनफिट बसें संचालित हो रही है। कई स्कूल संचालकों द्वारा स्टाफ ढ़ोने वाले वाहनों पर भी स्कूली बच्चों को ढोने का काम किया जा रहा है।
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शहर की सडक़ों पर मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए खटारा स्कूल वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं। जबकि स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही अनुमन्य हैं, बावजूद इसके टेंपो, मैजिक वैन बच्चों को ढो रही हैं। वह भी क्षमता से अधिक। इन ओवरलोड स्कूल वाहनों के चलते नौनिहालों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है।
इस संबंध में अभिभावक महेंद्र यादव, संजीव सिंह, श्रीराम शर्मा, जर्नादन पांडेय का कहना था कि स्कूल में भारी भरकम फीस अदा करने के बाद भी स्कूल प्रशासन द्वारा मानक के अनुरूप बसों को नहीं चलाया जाता है। बस में जीपीएस न लगने के चलते बच्चे की लोकेशन नहीं मिलने से हमेशा चिंता रहती है। शिकायत के बाद भी संबंधित विभाग की तरफ से कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूल बस संचालकों को नोटिस जारी की गई है। छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चे को ले जाना गैर कानूनी है। अभियान चलाया जाएगा। लापरवाही पाने पर स्कूल वाहन संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - ,
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