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Mau News: छठ पर देवलास सूर्य मंदिर पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब
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मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र के देवकली देवलास पर स्थित सूर्य मंदिर पर छठ में मेले का आयोजन
वलीदपुर। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के देवल मुनि की तपोभूमि देवलास पर प्राचीन सूर्य मंदिर पर डाला छठ पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा। यह मंदिर बालार्क रूप में स्थापित है। मंदिर के पास सूर्य कुंड भक्तों के लिए आज भी आस्था का केंद्र है। सूर्य मंदिर स्थित पवित्र सरोवर के जल को गंगा जल की तरह सहेज कर रखा जाता है।
मान्यता है कि छठ के दिन सूर्य मंदिर सहित अन्य देवालयों में स्वर्ग लोक से देवता उतरते हैं। सरोवर में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इसी मान्यता के तहत डाला छठ के अवसर पर हजारों महिलाएं भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। यहां पर दीपावली के बाद 10 दिनों तक छठ मेला लगता है। मंदिर समिति के पदाधिकारी अभी से तैयारी करने में जुट गए हैं। बताया जाता है कि भगवान राम अपने गुरु विश्वामित्र जी के साथ ताड़का वध करने के लिए बक्सर जाते समय सूर्य देवता की उपासना करने के लिए रात्रि में विश्राम किए थे। इसके साथ ही वहां पर स्नान कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया था। इसलिए माना जाता है कि इस सरोवर मेें स्नान कर लेने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। गंगा जल की तरह सरोवर के जल को लोग अपने घरों में रखते हैं। साथ ही यहां पूजा- अर्चन करने पर सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। इसी मान्यता के तहत आसपास सहित गैर जनपदों से हजारों व्रती महिलाएं पौराणिक स्थल पर छठ पर्व के अवसर पर विधि विधान से पूजा-अर्चन कर देवलास मंदिर के तट पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। यहां पर दीपावली के बाद छठ मेला लगता है।
इनसेट
देश भर में तीन तरह के सूर्य मंदिर
भारत में तीन प्रमुख सूर्य मंंदिर हैं। जिसमें पहला बालार्क रूप मंदिर देवलास, दूसरा काशी में लोलार्क और तीसरा उड़ीसा में कोणार्क है। देेेवलास तपोभूमि की विशेषता है कि प्राचीन तथा पौराणिक देवलास स्थल पर सूर्य मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, शंकर मंदिर, संतगणिनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, संत रविदास का मंदिर सूघर दास का मठ सहित 16 से अधिक मंदिर हैं।
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मान्यता है कि छठ के दिन सूर्य मंदिर सहित अन्य देवालयों में स्वर्ग लोक से देवता उतरते हैं। सरोवर में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इसी मान्यता के तहत डाला छठ के अवसर पर हजारों महिलाएं भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। यहां पर दीपावली के बाद 10 दिनों तक छठ मेला लगता है। मंदिर समिति के पदाधिकारी अभी से तैयारी करने में जुट गए हैं। बताया जाता है कि भगवान राम अपने गुरु विश्वामित्र जी के साथ ताड़का वध करने के लिए बक्सर जाते समय सूर्य देवता की उपासना करने के लिए रात्रि में विश्राम किए थे। इसके साथ ही वहां पर स्नान कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया था। इसलिए माना जाता है कि इस सरोवर मेें स्नान कर लेने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। गंगा जल की तरह सरोवर के जल को लोग अपने घरों में रखते हैं। साथ ही यहां पूजा- अर्चन करने पर सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। इसी मान्यता के तहत आसपास सहित गैर जनपदों से हजारों व्रती महिलाएं पौराणिक स्थल पर छठ पर्व के अवसर पर विधि विधान से पूजा-अर्चन कर देवलास मंदिर के तट पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। यहां पर दीपावली के बाद छठ मेला लगता है।
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देश भर में तीन तरह के सूर्य मंदिर
भारत में तीन प्रमुख सूर्य मंंदिर हैं। जिसमें पहला बालार्क रूप मंदिर देवलास, दूसरा काशी में लोलार्क और तीसरा उड़ीसा में कोणार्क है। देेेवलास तपोभूमि की विशेषता है कि प्राचीन तथा पौराणिक देवलास स्थल पर सूर्य मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, शंकर मंदिर, संतगणिनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, संत रविदास का मंदिर सूघर दास का मठ सहित 16 से अधिक मंदिर हैं।
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