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रबी के पीक आवर में दोहरीघाट पंप कैनाल बंद
Mau
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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दोहरीघाट। रबी सीजन के पीक आवर में अब फसलों की सिंचाई की बारी आ रही है तो दोहरीघाट पंप कैनाल नहर तीन दिसंबर तक के लिए बंद कर दी गई है। सिंचाई के लिए किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरा सीजन शुरू हो गया है लेकिन न तो नहरों से सिल्ट निकाला गया है और न हीं घास-झंखाड़ को हटाया गया।
कहने को तो जिले में नहरों का जाल बिछा है। जिले में 391 किमी की तीन नहरें हैं। इसके बाद भी किसानों के खेत का पेट पानी से भर पाने में असक्षम साबित हो रही है। शारदा सहायक लिंक नहर तो दोहरीघाट पंप कैनाल के भरोसे चलती है। वहीं लघु डाल पंप कैनाल खुरहटका यही हाल है। जिले में कृषि योग्य कुल भूमि 145295.42 हेक्टेयर है। एशिया में प्रसिद्ध कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर लगभग 22 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। लेकिन पूरी क्षमता से न चल पाने से अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंचता है। रबी की बुआई का पीक आवर एक नवंबर से ही चल रहा है। सिंचाई महकमे की संस्तुति पर जिला प्रशासन ने दोहरीघाट पंप कैनाल नहर का एक नवंबर से तीन दिसंबर तक क्लोजर टाइम घोषित कर दिया है। इस अवधि में नहर और माइनर की सफाई तथा मोटर की मरम्मत आदि कार्य किया जाना है। नहर की मरम्मत के लिए महकमे की ओर से 28 लाख के सापेक्ष 15 लाख रुपये मिला है। शारदा सहायक लिंक नहर की हालत तो और बदतर है। नहर में कभी कभार ही पानी आता है। यही हाल खुरहट पंप कैनाल का है। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनरें हैं। टेल तक तो पानी ही नहीं पहुंचता है। कई माइनरों में तो वर्षों से पानी नहीं गया है। जबकि कागज में सब कुछ चकाचक रहता है।
माइनरों में जमी सिल्ट, प्रति वर्ष होता लाखों खर्च
मऊ। किसानों को उनके खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रति वर्ष माइनरों की साफ सफाई के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन महज औपचारिकता निभाकर ठेकेदार धन भुना लेते हैं। इसके चलते पानी इधर उधर बहकर बेकार चला जाता है। किसान देव प्रकाश राय, संजय सिंह, रामनवल राही, विनय राय का कहना है कि सिंचाई महकमे की ओर से सफाई और मरम्मत का कार्य रबी की सीजन के पहले ही कर लिया जाना चाहिए था। मांग पर पानी उपलब्ध ही नहीं कराया जाता है। यह सोची समझी रणनीति के तहत ही होता है।
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सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके सिंह का कहना था कि नहर की साफ सफाई तथा मरम्मत के लिए नहर क्लोजर टाइम के तहत बंद चल रही है। अभी पानी की डिमांड किसानों को नहीं है।
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कहने को तो जिले में नहरों का जाल बिछा है। जिले में 391 किमी की तीन नहरें हैं। इसके बाद भी किसानों के खेत का पेट पानी से भर पाने में असक्षम साबित हो रही है। शारदा सहायक लिंक नहर तो दोहरीघाट पंप कैनाल के भरोसे चलती है। वहीं लघु डाल पंप कैनाल खुरहटका यही हाल है। जिले में कृषि योग्य कुल भूमि 145295.42 हेक्टेयर है। एशिया में प्रसिद्ध कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर लगभग 22 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। लेकिन पूरी क्षमता से न चल पाने से अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंचता है। रबी की बुआई का पीक आवर एक नवंबर से ही चल रहा है। सिंचाई महकमे की संस्तुति पर जिला प्रशासन ने दोहरीघाट पंप कैनाल नहर का एक नवंबर से तीन दिसंबर तक क्लोजर टाइम घोषित कर दिया है। इस अवधि में नहर और माइनर की सफाई तथा मोटर की मरम्मत आदि कार्य किया जाना है। नहर की मरम्मत के लिए महकमे की ओर से 28 लाख के सापेक्ष 15 लाख रुपये मिला है। शारदा सहायक लिंक नहर की हालत तो और बदतर है। नहर में कभी कभार ही पानी आता है। यही हाल खुरहट पंप कैनाल का है। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनरें हैं। टेल तक तो पानी ही नहीं पहुंचता है। कई माइनरों में तो वर्षों से पानी नहीं गया है। जबकि कागज में सब कुछ चकाचक रहता है।
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माइनरों में जमी सिल्ट, प्रति वर्ष होता लाखों खर्च
मऊ। किसानों को उनके खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रति वर्ष माइनरों की साफ सफाई के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन महज औपचारिकता निभाकर ठेकेदार धन भुना लेते हैं। इसके चलते पानी इधर उधर बहकर बेकार चला जाता है। किसान देव प्रकाश राय, संजय सिंह, रामनवल राही, विनय राय का कहना है कि सिंचाई महकमे की ओर से सफाई और मरम्मत का कार्य रबी की सीजन के पहले ही कर लिया जाना चाहिए था। मांग पर पानी उपलब्ध ही नहीं कराया जाता है। यह सोची समझी रणनीति के तहत ही होता है।
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सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके सिंह का कहना था कि नहर की साफ सफाई तथा मरम्मत के लिए नहर क्लोजर टाइम के तहत बंद चल रही है। अभी पानी की डिमांड किसानों को नहीं है।